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केंद्रीय विद्यालय संगठन ने खत्म किया दाखिले में सांसदों का कोटा

कई सांसदों की ओर से सांसदों के कोटे को खत्म करने या या सिफारिश के आधार पर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की मांग काफी समय से हो रही थी।

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केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने केंद्रीय विद्यालयों में दाखिलों में दिए जाने वाले सांसदों के कोटे को खत्म कर दिया है। हर सांसद को दस विद्यार्थियों का केंद्रीय विद्यालयों में दाखिला कराने का अधिकार था। इस संबंध में केवीएस की ओर आदेश जारी कर दिया गया है। इसके अलावा दाखिले के संशोधित दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कई सांसदों की ओर से सांसदों के कोटे को खत्म करने या या सिफारिश के आधार पर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की मांग काफी समय से हो रही थी। केवीएस की ओर से जारी संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक दाखिला नीति के ‘विशेष प्रावधान’ खंड में कई संशोधन किए गए हैं। सांसदों के कोटे के अलावा, केवीएस ने शिक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों के 100 बच्चों, सांसदों और सेवानिवृत्त केंद्रीय विद्यालय कर्मियों के बच्चों व आश्रित नाती-पोतों और विद्यालय प्रबंधन समिति (वीएमसी) के अध्यक्ष के विवेकाधीन कोटे सहित अन्य कोटा भी हटा दिया है।

केवीएस के एक अधिकारी के मुताबिक संगठन की ओर से विचार करने के बाद ये संशोधन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दाखिले के विशेष प्रावधान खंड के तहत कुछ अन्य कोटे के साथ सांसदों के कोटे को खत्म कर दिया गया है। साथ ही कुछ नए कोटे शामिल भी किए गए हैं। नए कोटे के तहत गृह मंत्रालय के अंतर्गत सीआरपीएफ, बीएसएफ, आइटीबीपी, एसएसबी, सीआइएसएफ, एनडीआरएफ और असम राइफल्स जैसे समूह बी और सी केंद्रीय पुलिस संगठनों के बच्चों के लिए 50 सीटें शामिल हैं, जिन्हें आंतरिक सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया के लिए तैनात किया जाता है। इसके अलावा विशेष प्रावधानों के तहत आधिकारिक तौर पर ‘पीएम केयर्स’ योजना के तहत आने वाले बच्चों को भी शामिल किया है।

हाल ही में संपन्न संसद सत्र के दौरान कांग्रेस के मनीष तिवारी और भाजपा सांसद सुशील मोदी समेत कई सांसदों ने सरकार से मांग की कि सांसद कोटे को खत्म किया जाए या सीमा बढ़ाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 21 मार्च को लोकसभा से सामूहिक रूप से बहस करने और यह तय करने का आग्रह किया कि क्या केंद्या विद्यालयों में सांसद कोटा जारी रखा जाना चाहिए या खत्म किया जाना चाहिए। उनकी अपील के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सुझाव दिया था कि इस मामले पर विचार-विमर्श करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक हो सकती है। हालांकि इस बात की जानकारी उपलब्ध नहीं को सकी कि यह सर्वदलीय बैठक हुई या नहीं हुई।

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