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डर के कारण कोरोना के एहतियाती खुराक लेने से बच रहे लोग

कोवीशील्ड का निर्माण करने वाले सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआइआइ) के सीईओ अदार पूनावाला ने बीते हफ्ते कहा था कि उनके स्टाक में बड़ी संख्या में बिना बिके हुए टीके मौजूद हैं।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस प्रतीकातम्क फोटो)

भारत में दस अप्रैल से लेकर अब तक महज 4.64 लाख लोगों ने कोविड-19 रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगवाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर भारतीय डर, भ्रम और गलत जानकारी के चलते एहतियाती खुराक लगवाने से बच रहे हैं। भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच ज्यादातर लोग बूस्टर खुराक नहीं लगवा रहे हैं। वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और टीका उद्योग के जानकारों का कहना है कि बूस्टर खुराक लगवाने में हिचक की मुख्य वजह प्रतिकूल प्रभाव का डर, कोविड-19 का मामूली संक्रमण होने की सोच व एहतियाती खुराक के असर को लेकर मन में संशय है।

कोवीशील्ड का निर्माण करने वाले सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआइआइ) के सीईओ अदार पूनावाला ने बीते हफ्ते कहा था कि उनके स्टाक में बड़ी संख्या में बिना बिके हुए टीके मौजूद हैं। पूनावाला के मुताबिक, ‘हमने 31 दिसंबर 2021 को उत्पादन बंद कर दिया था। मौजूदा समय में हमारे पास 20 करोड़ से अधिक खुराक मौजूद हैं। मैंने इन्हें मुफ्त देने की पेशकश की है, लेकिन उस प्रस्ताव पर भी ज्यादा अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली है।’ पूनावाला ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि लोगों में टीके को लेकर हिचक है। कीमतों के 225 रुपए प्रति खुराक तक घटने के बावजूद इनकी ज्यादा खरीद नहीं हो रही है।’

इकरिस फार्मा नेटवर्क के सीईओ प्रवीण सीकरी की नजर में लोग एहतियाती खुराक की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि कोविड-19 संक्रमण की पिछली लहर ज्यादा घातक नहीं थी। सीकरी ने कहा कि टीकाकरण विरोधी लोग टीका लगवाने से बच्चों का लिवर खराब होने, खून के थक्के जमने और लोगों की मौत होने जैसी झूठी खबरें फैला रहे हैं, जिससे लोगों में टीकाकरण को लेकर हिचक पैदा हो रही है।

बच्चों के लिए कोरोनारोधी दो टीकों को मंजूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को बताया कि भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआइ) ने पांच से 12 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों के लिए कोरोनारोधी टीके कारबेवैक्स और छह से 12 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों के लिए कोवैक्सीन टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।

डीसीजीआइ ने इससे पहले जायडस कैडिला को 12 साल या अधिक उम्र के बच्चों के लिए 28 दिन के अंतर पर दो खुराक के साथ तीन मिलीग्राम की अतिरिक्त खुराक के वास्ते उसके जायकोव-डी टीके के लिए भी आपातकालीन उपयोग की मंजूरी (ईयूए) दे दी थी। वर्तमान में जायकोव-डी की दो मिलीग्राम की तीन खुराक की मंजूरी दी गई है।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोरोना वैश्विक महामारी पर गठित विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की सिफारिशों के बाद भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआइ) ने इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है। एसईसी ने पांच से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए बायोलाजिकल-ई के कोरोनारोधी टीके कारबेवैक्सह्ण और 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए कोवैक्सीन टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी (ईयूए) देने की पिछले सप्ताह सिफारिश की थी।

बायोलाजिकल-ई के कारबेवैक्स टीके की खुराक अभी 12 से 14 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों को दी जा रही है। वहीं, 24 दिसंबर, 2021 को डीसीजीआइ ने 12 से 18 वर्ष के आयुवर्ग के लोगों के लिए कोवैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की सूची में डाल दिया था। भारत ने 16 मार्च को 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। देशभर में कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान 16 जनवरी 2021 को शुरू किया गया था।

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