Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश पुलिस ने रविवार सुबह छतरपुर जिले के कुपी गांव में विरोध स्थल से केन-बेतवा आंदोलन के नेता अमित भटनागर और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इससे 44605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ दो हफ्ते से चल रहा आंदोलन खत्म हो गया।
यह कार्रवाई तब हुई जब भटनागर 14 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। वे इस प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के लिए जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास और मुआवजे में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों का मुख्य चेहरा बन गए थे।
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट भारत का पहला रीवर लिंक प्रोजेक्ट है। इसके तहत दौधन बांध और नहरों के नेटवर्क के जरिये केन नदी का पानी बेतवा बेसिन में पहुंचाया जाएगा। इसका मकसद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सिंचाई, पीने का पानी और पनबिजली उपलब्ध कराना है। इस प्रोजेक्ट के कारण जलाशय में डूबने वाले इलाकों के लगभग 2000 परिवारों को विस्थापित होना पड़ेगा, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।
स्थानीय पुलिस की कई पलटनें विरोध स्थल पर पहुंच गईं, जबकि भटनागर और प्रदर्शनकारी नदी में उतरकर पुलिस बल से दूरी बनाए हुए थे, वहीं पुलिस उन्हें विरोध प्रदर्शन खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही थी।
छतरपुर के एडिशनल एसपी आदित्य पटले ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “भटनागर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। वह दो हफ्ते से अनशन पर थे और उनकी सेहत को देखते हुए हमने उन्हें हिरासत में लिया और इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले गए।”
150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया
पटले ने बताया कि लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, बसों में बिठाया गया और पन्ना जिले भेज दिया गया। “हमारी जांच में पता चला कि ये लोग स्थानीय नहीं थे, बल्कि पन्ना से आए थे और उन्हें बांध की दूसरी परियोजनाओं से दिक्कतें थीं। इसलिए हमने उन्हें हिरासत में लिया और पन्ना भेज दिया।”
भटनागर एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने बुंदेलखंड में विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दों पर कई सालों तक काम किया है। वे जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण नियमों के पालन और प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के अधिकारों से जुड़े अभियानों में शामिल रहे हैं। 3 जुलाई से उन्होंने कुपी विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया है। इसमें दौधन, पलखुआ, सुकवाहा और आस-पास के इलाकों के विस्थापित ग्रामीण शामिल हुए हैं। ये लोग नए सिरे से सर्वे करने, मुआवजे के रिकॉर्ड में सुधार करने और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
हिरासत में लिए जाने से कुछ घंटे पहले दो हफ्ते तक बिना कुछ खाए-पिए रहने के कारण कमजोर दिख रहे भटनागर ने विरोध स्थल पर तिरपाल के नीचे बिछी खाट से इंडियन एक्सप्रेस से बात की। खुद चल पाने में असमर्थ होने के कारण, प्रदर्शनों के दौरान साथी प्रदर्शनकारी अक्सर उन्हें उठाकर ले जाते थे। वे हर कुछ मिनटों में पानी पीने के लिए रुकते थे और फिर ग्रामीणों से बातचीत, आंदोलन का समन्वय और आगंतुकों को संबोधित करने का काम जारी रखते थे।
सरकार जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में निष्पक्ष नहीं- भटनागर
भटनागर ने कहा, “सरकार अपनी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही है। मुआवजा देने में कई अनियमितताएं हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि रतिया, कारी, खटवानी, पलखुआ, नैयापुर, खजुरी और सुकवाहा की ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द एक जैसी एंट्री थीं, जबकि कई ग्राम सभा बैठकें 17 और 18 फरवरी, 2022 को सुबह 11.30 बजे आयोजित दिखाई गई थीं, जिससे कार्यवाही की प्रमाणिकता पर सवाल उठते हैं।
भटनागर ने आगे आरोप लगाया कि खारिहानी गांव में घरों के मुआवजे के तौर पर करीब 11 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, जबकि उनके पास मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि लगभग 8 करोड़ रुपये उन लोगों को दिए गए थे जिनका या तो गांव से कोई संबंध नहीं था या जो दशकों पहले पलायन कर चुके थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुआवजा एक मुस्लिम परिवार के नाम पर मंजूर किया गया था, हालांकि ग्रामीणों के अनुसार, खारिहानी में कभी कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहा।
छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल ज्यादातर लोग केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं थे। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमने विरोध प्रदर्शन में शामिल 176 लोगों की पहचान की है। उनमें से लगभग 10% लोग केन-बेतवा प्रोजेक्ट से प्रभावित हैं। बाकी 90% लोग प्रोजेक्ट से प्रभावित नहीं हैं।”
ग्राम सभा की कार्यवाही में हेरफेर के आरोपों को कलेक्टर ने किया खारिज
ग्राम सभा की कार्यवाही में हेरफेर के आरोपों को खारिज करते हुए जायसवाल ने कहा, “ग्राम सभा के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं थी।” इस दावे पर कि खरिहानी गांव में किसी मुस्लिम परिवार के न रहने के बावजूद एक मुस्लिम परिवार को मुआवजा मंज़ूर किया गया था, उन्होंने कहा कि उस परिवार के पास वहां उपजाऊ कृषि भूमि थी और उन्हें अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजा दिया गया था, न कि गांव में रहने के आधार पर।
जायसवाल ने कहा कि कई प्रदर्शनकारी पड़ोसी पन्ना जिले में अन्य बांध परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे, जो छतरपुर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते थे। उन्होंने कहा, “उनमें से कई लोगों को पन्ना जिले में अन्य बांध परियोजनाओं से संबंधित समस्याएं हैं। वे शिकायतें छतरपुर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती हैं। हमने उनका विवरण पन्ना प्रशासन के साथ साझा किया है।” उन्होंने आगे कहा कि केन-बेतवा परियोजना से संबंधित जहां भी कोई वास्तविक शिकायत थी, प्रशासन निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से उसकी जांच कर रहा था।
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