अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। इसी बीच विपक्ष के आरोपों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच कर रहे अधिकारी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि इस मामले में सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने वाले विपक्षी नेताओं को तलब किया जाए और उनसे अपने दावों को साबित करने के लिए कहा जाए।

4 जुलाई को अयोध्या के डीएसपी और जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी को लिखे पत्र में आलोक कुमार ने कहा कि राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 0090/2026 की जांच में राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए उन बयानों की भी जांच की जानी चाहिए जो सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं।

पत्र में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बयानों का जिक्र है।

आलोक कुमार के अनुसार, राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि यह घोटाला 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का था और दावा किया कि सोना, चांदी, हीरे, नकदी और अन्य चढ़ावे गायब हो गए थे, और इस मामले में प्रभावशाली लोग शामिल थे।

कुमार ने केजरीवाल के उन बयानों का भी हवाला दिया जिनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भगवान राम के आभूषण, मुकुट, चांदी के दीपक और बड़ी मात्रा में नकदी सहित बहुमूल्य वस्तुएं चोरी हो गई थीं, और उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाया था।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) नेता ने संजय सिंह के उस दावे का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 200 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी हुई है और इसमें 50 से अधिक कर्मचारी शामिल हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि सिंह कथित तौर पर एसआईटी के समक्ष पेश हुए थे और उन्होंने जमीन खरीद से संबंधित अपने आरोपों के सबूत के तौर पर दस्तावेज जमा किए थे।

आलोक कुमार ने प्रियंका गांधी की उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया, जिनमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या सीसीटीवी कैमरे बंद करने के बाद अकेले निचले स्तर के कर्मचारी इतनी बड़ी चोरी को अंजाम दे सकते थे, या क्या इसमें वरिष्ठ व्यक्ति भी शामिल थे।

कुमार ने कहा कि नेताओं ने आरोप लगाए हैं और कुछ मामलों में कथित चोरी के संबंध में सटीक आंकड़े भी दिए हैं। जिससे पता चलता है कि उनके पास जांच से संबंधित जानकारी हो सकती है।

उन्होंने जांच एजेंसी से आग्रह किया कि उन्हें संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत तलब किया जाए या उनके बयान दर्ज किए जाएं ताकि वे अपने आरोपों का आधार, अपनी जानकारी का स्रोत और उनके पास मौजूद किसी भी दस्तावेज या सबूत का खुलासा कर सकें।

कुमार ने कहा, “अगर वे विश्वसनीय सबूत उपलब्ध कराते हैं, तो इससे सच्चाई का पता लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि अगर गंभीर आरोप बिना किसी तथ्यात्मक आधार के लगाए गए पाए जाते हैं, तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यदि बिना किसी सहायक साक्ष्य के जानबूझकर या लापरवाही से आरोप लगाए जाते हैं, तो जांच एजेंसी कानून के तहत अनुमत कार्रवाई पर विचार कर सकती है।

आलोक कुमार ने कहा कि किसी को भी ऐसे निराधार आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जो नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा देते हों। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामले में कानून अपना काम करेगा।

‘पत्नी के गहने पिघलाकर…’ पूर्व गृह सचिव की दान दी गई सोने के पन्नों वाली रामचरित मानस गायब

राम मंदिर दान चोरी को लेकर रोज के नए खुलासे हो रहे हैं। इसी कड़ी में अब खबर है कि राम मंदिर से सोने के पन्नों वाली रामचरित मानस भी गायब है। दान देने वाले पूर्व गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने इसे लेकर कई दावे किए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को सोने से पन्नों वाली रामचरित मानस दी थी, लेकिन उन्हें उसकी कोई रसीद नहीं मिली। पढ़ें पूरी खबर।