ताज़ा खबर
 
  • राजस्थान

    BJP+ 0
    Cong+ 0
    RLM+ 0
    OTH+ 0
  • मध्य प्रदेश

    BJP+ 0
    Cong+ 0
    BSP+ 0
    OTH+ 0
  • छत्तीसगढ़

    BJP+ 0
    Cong+ 0
    JCC+ 0
    OTH+ 0
  • तेलांगना

    BJP+ 0
    TDP-Cong+ 0
    TRS-AIMIM+ 0
    OTH+ 0
  • मिजोरम

    BJP+ 0
    Cong+ 0
    MNF+ 0
    OTH+ 0

* Total Tally Reflects Lead + Win

वैष्णो देवी यात्रा में खच्चर सेवा देनेवालों पर सुप्रीम कोर्ट नरम, चार सप्ताह में पुनर्वास पर रिपोर्ट तलब

जम्मू कश्मीर सरकार ने बुधवार उच्चतम न्यायालय से कहा कि जम्मू में कटरा और वैष्णोदेवी मंदिर के रास्ते में इस्तेमाल हो रहे खच्चरों के मालिकों के पुनर्वास के मुद्दे पर निर्णय वह चार सप्ताह के भीतर करेगी।

Author August 2, 2018 2:26 PM
उच्चतम न्यायालय से कहा कि जम्मू में कटरा और वैष्णोदेवी मंदिर के रास्ते में इस्तेमाल हो रहे खच्चरों के मालिकों के पुनर्वास के मुद्दे पर निर्णय वह चार सप्ताह के भीतर करेगी।

जम्मू कश्मीर सरकार ने बुधवार उच्चतम न्यायालय से कहा कि जम्मू में कटरा और वैष्णोदेवी मंदिर के रास्ते में इस्तेमाल हो रहे खच्चरों के मालिकों के पुनर्वास के मुद्दे पर निर्णय वह चार सप्ताह के भीतर करेगी। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की एक पीठ को बताया गया दो दिन के भीतर एक राज्य सलाहकार परिषद का गठन किया जाएगा और वह खच्चर मालिकों के प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के साथ मिलकर गत अक्तूबर में तैयार पुनर्वास योजना पर उसकी समग्रता में विचार करेगी। पीठ ने कहा कि खच्चरों को जितना संभव हो उस सीमा तक चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाना होगा और इस पर आश्चर्य जताया कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और अन्य हितधारकों के मशविरे से तैयार पुनर्वास योजना को अभी तक अंतिम रूप क्यों नहीं दिया गया।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह और अधिवक्ता शोएब आलम ने जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से पेश होते हुए कहा कि इस संबंध में निर्णय राज्य सलाहकार परिषद के गठन से तीन सप्ताह के भीतर निर्णय किया जाएगा। सुनवायी के दौरान पीठ ने इस पर चिंता जतायी कि खच्चर का गोबर मंदिर जाने वाले रास्ते में पड़ा रहता है। पीठ ने श्राइन बोर्ड से यह सुनिश्वित करने के लिए कहा कि रास्ता साफ रहे।

मंदिर जाने वाले रास्ते से घोड़े और खच्चरों को हटाने की मांग वाली अर्जी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने अदालत में कुछ तस्वीरें रखीं और कहा कि खच्चरों का गोबर सभी जगह पर पड़ा रहता है और इससे सीवर जाम होता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। श्राइन बोर्ड के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलीलों का विरोध किया और कहा कि वहां करीब 4600 खच्चरों का इस्तेमाल हो रहा है और बोर्ड रास्ते की सफाई सुनिश्वित कर रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि आप (बोर्ड) श्राइन को गंदा रखना चाहते हैं, कृपया वह कहिये। यदि जवाब नहीं है, तब आपको उनका (याचिकाकर्ता) सब कुछ में खंडन करने की जरूरत नहीं है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं स्थान को साफ रखना चाहता हूं लेकिन मैं कुछ करूंगा नहीं।’’ अदालत ने मामले की अगली सुनवायी 30 अगस्त को करना तय किया और कहा कि सभी पक्षों को बैठकर खच्चर मालिकों के पुनर्वास की योजना बनानी चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App