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तबाही के 19 महीने बाद ‘ज़िंदगी’ से मुलाकात

केदारनाथ में 2013 में आई भीषण आपदा के दौरान लापता हो गई और बाद में सरकारी रिकार्ड में मृत घोषित कर दी गई राजस्थान की एक महिला तीर्थयात्री 19 महीने बाद आश्चर्यजनक रूप से उत्तरकाशी जिले में मिल गई है। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक जगत राम जोशी ने बताया कि अलवर जिले की रहने वाली […]
Author February 9, 2015 10:32 am
2013 में 16-17 जून को आई आपदा के समय दंपति केदारनाथ के भ्रमण पर था और उसी दौरान दोनों एक दूसरे से अलग हो गए। (एक्सप्रेस फ़ोटो-मनु पब्बी)

केदारनाथ में 2013 में आई भीषण आपदा के दौरान लापता हो गई और बाद में सरकारी रिकार्ड में मृत घोषित कर दी गई राजस्थान की एक महिला तीर्थयात्री 19 महीने बाद आश्चर्यजनक रूप से उत्तरकाशी जिले में मिल गई है।

उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक जगत राम जोशी ने बताया कि अलवर जिले की रहने वाली 45 साल की लीला कंवर बीती तीन जनवरी को गंगोत्री के पास हिना बाजार में उसके पति को मिली। स्थानीय लोगों और ग्राम प्रधान की मदद से पति लीला तक पहुंचा।

जोशी ने बताया कि महिला जब पति विजेंद्र सिंह कंवर को मिली, वह सदमे की हालत में थी और एक शब्द भी नहीं बोल पा रही थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पति ने इस संबंध में प्रशासन से कोई संपर्क नहीं साधा था और इसलिए दंपति के मिलने के काफी दिनों बाद अधिकारियों को इस के बारे में पता चला। 2013 में 16-17 जून को आई आपदा के समय दंपति केदारनाथ के भ्रमण पर था और उसी दौरान दोनों एक दूसरे से अलग हो गए।

आपदा गुजर जाने के बाद विजेंद्र कंवर ने अपनी पत्नी को रूद्रप्रयाग और चमोली जिलों में बहुत ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली। पति ने लीला के मिलने की सारी उम्मीदें छोड़ दी थीं लेकिन किसी के यह बताने पर कि एक महिला गंगोत्री बाजार में भीख मांगती देखी जा रही है, उसने पत्नी को ढूंढने का एक आखिरी प्रयास करने का फैसला किया।

जोशी ने बताया कि कंवर जनवरी की शुरुआत में उत्तरकाशी आए और उन्होंने स्थानीय लोगों को अपनी पत्नी का फोटो दिखा कर उसे ढूंढने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों में से एक ने फोटो से महिला को तुरंत पहचान लिया जिसके बाद उसे तलाशने के लिए एक अभियान चलाया गया और महिला गंगोत्री के पास हिना बाजार में घूमती मिल गई।

ग्राम प्रधान के हवाले से, पुलिस अधीक्षक जोशी ने बताया कि लीला भीख मांग कर गुजारा कर रही थी लेकिन उसने कभी किसी से कोई बात नहीं की। उन्होंने बताया कि संभवत: त्रासदी का मंजर देखने के बाद महिला की मन:स्थिति पर बुरा असर हो गया और उसने अपने पति को भी नहीं पहचाना। हालांकि, विजेंद्र कंवर ने स्थानीय लोगों को अपनी पत्नी को ढूंढने के लिए धन्यवाद दिया और उसे अपने साथ राजस्थान ले गया।

उन्होंने कहा कि इस मामले के बारे में हमारी जानकारी मीडिया में आई खबरों या स्थानीय लोगों के कथन पर आधारित है। विजेंद्र की पत्नी की मानसिक स्थिति भी फिलहाल ऐसी नहीं है कि वह पुलिस के सामने बयान दे सके और उसकी पहचान के बारे में निश्चित तौर पर कुछ कहा जा सके। उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है।

बौडाई ने कहा कि अगर अलवर के उस व्यक्ति को अपनी लापता पत्नी वास्तव में मिल गई है तो उसे सामने आना चाहिए और अपनी पत्नी के नाम से जारी मृत्यु प्रमाणपत्र को निरस्त कराने के लिए आवेदन करना चाहिए।

इस संबंध में, पुलिस अधीक्षक को भी महिला की पहचान के बारे में कुछ संदेह है क्योंकि महिला केदारनाथ से लापता हुई लेकिन वह एक अलग रूट पर स्थित गंगोत्री राजमार्ग के पास एक स्थान पर मिली।

इसके अलावा, जिस सड़क का इस्तेमाल कर महिला उत्तरकाशी आ सकती थी, वह आपदा के बाद महीनों तक खराब रही। जोशी ने कहा कि इस मामले में संदेह का एक और कारण गंगोत्री क्षेत्र के रात्रि चौकीदार का वह बयान भी है जिसमें उसने कहा है कि वह महिला को 2008-09 से देख रहा है जबकि त्रासदी जून, 2013 में आई।

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