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केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद

गढ़वाल हिमालय में स्थित विश्व प्रसिद्घ धाम केदारनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल में श्रद्घालुओं के दर्शन के लिए बंद हो गए..
Author देहरादून | November 13, 2015 22:46 pm

गढ़वाल हिमालय में स्थित विश्व प्रसिद्घ धाम केदारनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल में श्रद्घालुओं के दर्शन के लिए बंद हो गए। केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रावल भीमशंकर लिंग शिवाचार्य स्वामीजी ने बताया, ‘मंदिर के कपाट सुबह आठ बजे पारंपरिक पूजा अर्चना और विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान भीषण ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्घालु, मंदिर समिति के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।’

उन्होंने बताया, ‘कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव की मूर्ति को एक डोली में बैठाकर निकटवर्ती उखीमठ के ओंमकारेशवर मंदिर की ओर रवाना कर दिया गया। भगवान शिव की डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए परसों ओमकारेश्वर मंदिर में पहुंचेगी जहां शीतकाल के दौरान उनके दर्शन किए जा सकेंगे।’

रावल ने बताया, ‘इस वर्ष के यात्रा सीजन में कुल 1.52 लाख श्रद्घालु केदारनाथ धाम के दर्शन हेतु पहुंचे और यह संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 50 हजार ज्यादा है।’

उन्होंने कहा कि श्रद्घालुओं की बढती संख्या इस बात का संकेत है कि यात्रा रूट पर यात्रियों के लिए सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं और यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर भी उनमें विश्वास बढ़ रहा है।

केदारनाथ और उसके आसपास के क्षेत्रों में वर्ष 2013 के मध्य में भीषण प्राकृतिक आपदा से भयंकर तबाही हुई थी। हालांकि, उसके बाद से केदारनाथ में युद्घस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। गढ़वाल हिमालय में समुद्रतल से 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर और अन्य तीनों धामों, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट हर साल अक्तूबर-नवंबर में शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोले जाते हैं।

छह माह के यात्रा सीजन के दौरान देश विदेश से लाखों श्रद्घालु और पर्यटक उत्तराखंड आते हैं और चारधाम यात्रा को गढ़वाल हिमालय की आर्थिक रीढ़ माना जाता है।

केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट बंद होने के साथ ही अब तक गढ़वाल हिमालय के चार धामों के नाम से मशहूर तीन धामों के कपाट बंद हो चुके हैं। गंगोत्री मंदिर के कपाट गुरुवार को अन्नकूट पर्व पर बंद हुए थे जबकि बदरीनाथ मंदिर के कपाट 17 नवंबर को बंद होंगे। उधर, उत्तरकाशी जिले में स्थित मां यमुना को समर्पित यमुनोत्री मंदिर के कपाट भी शुक्रवार को अनुराधा नक्षत्र में दोपहर 1.15 बजे श्रद्घालुओं के लिए बंद कर दिए गए।

पुरोला के उपजिलाधिकारी के के सिंह ने बताया कि विधि विधान और पारंपरिक पूजा अर्चना के साथ मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही मां यमुना की डोली उनके शीतकालीन प्रवास खरसाली के लिए रवाना कर दी गई।
हिमालय की उंची पहाड़ियों पर स्थित ये चारों धाम शीतकाल में भीषण ठंड और भारी बर्फवारी की चपेट में रहते हैं और इसलिए इस दौरान उन्हें श्रद्घालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है। हर साल अक्तूबर-नवंबर में शीतकाल के लिए बंद होने वाले ये कपाट अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोल दिए जाते हैं।

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