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बीफ विवाद: केरल हाउस मामले में केजरीवाल सरकार की जांच, दिल्ली पुलिस दोषी

दिल्ली सरकार द्वारा कराई गई एक जांच में कहा गया है कि केरल हाउस की कैंटीन में गोमांस परोसे जाने की शिकायत पर वहां प्रवेश कर पुलिस ने कानून के प्रावधानों..

Author नई दिल्ली | Published on: November 4, 2015 8:04 PM
दिल्ली के केरल भवन में ‘गोमांस’ पर विवाद छिड़ा। (पीटीआई फोटो)

दिल्ली सरकार द्वारा कराई गई एक जांच में कहा गया है कि केरल हाउस की कैंटीन में ‘गोमांस’ परोसे जाने की शिकायत पर पड़ताल के लिए भवन के अंदर प्रवेश कर पुलिस ने कानून के प्रावधानों का उल्लंधन किया। पिछले दिनों हुई इस घटना से राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था और दिल्ली सरकार ने घटना के संबंध में पुलिस कार्रवाई को लेकर जांच दल गठित किया था। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 26 अक्तूबर को केरल हाउस की कैंटीन में दिल्ली पुलिस की टीम के प्रवेश को महज दौरा नहीं समझा जा सकता, जैसा कानून प्रर्वतन एजेंसी ने दावा किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वे शिकायत की ‘‘जांच के एकमात्र मकसद’’ से वहां गए थे।

एक उपायुक्त की जांच में कहा गया है कि पुलिस टीम के पहले दौरे के समय यह पूरी तरह से साफ था कि गोमांस नहीं परोया गया था, लेकिन 15/20 मिनट पर बाद पुलिस टीम फिर से वहां गई। जांच रिपोर्ट में इसे ‘‘पूरी तरह से अनैतिक’’ करार दिया गया। पुलिस का कहना था कि गोमांस परोसे जाने की शिकायत मिलने के बाद उसकी टीम कैंटीन में गयी थी। विपक्षी दलों के साथ ही केरल सरकार ने पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। बाद में, पुलिस ने हिन्दू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्त को कैंटीन में गोमांस परोसे जाने के संबंध में गलत शिकायत करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली कृषि पशु बचाव कानून, 1994 तथा इसके तहत बने नियमों के अनुसार दिल्ली पुलिस को कैंटीन में कथित तौर पर गोमांस की बिक्री या उपस्थिति के संबंध में प्रवेश करने, पूछताछ करने और तलाशी लेने का अधिकार नहीं है।

इसमें कहा गया है कि पशुपालन विभाग के निदेशक और पशुचिकित्सा अधिकारी किसी भी परिसर में प्रवेश कर सकते हैं और तलाशी ले सकते हैं जहां उन्हें यह मानने का आधार हो कि अपराध हुआ है या हो सकता है। जांच रिपोर्ट में सिफारिश की गयी है कि दिल्ली पुलिस के कर्मियों और पशुचिकित्सा के अधिकारियों को संबंधित कानून के प्रावधानों के कार्यान्वयन के लिए राज्यों के भवनों और होटलों में जांच के दौरान उचित प्रोटोकॉल के बारे में अवगत कराया जाना चाहिए। कानून के तहत निरीक्षण करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित किए जाने के संबंध में भी रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की थी और कहा था कि क्या किसी मुख्यमंत्री को किसी राज्य के गेस्ट हाउस से गिरफ्तार किया जा सकता है, अगर उस पर कोई ऐसी चीज खाने का संदेह है जिसे भाजपा नहीं पसंद करती।

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