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लेटेस्ट तकनीक हुई फेल तो शिकारी आए काम, 15 किलो चावल लेकर लापता AN-32 विमान ढूंढने निकल पड़ा था ‘लोकल टार्जन’

यह तलाशी अभियान भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा था। हाई टेक तकनीक और पुरजोर कोशिशों के बावजूद विमान के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था।

Author नई दिल्ली | June 16, 2019 2:20 PM
एएन-32 का मलबा काफी मशक्कत के बाद अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी इलाके में मिला था। (प्रतीकात्मक फोटो)

भारतीय वायु सेना के विमान एएन-32 का मलबा काफी मशक्कत के बाद अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी इलाके में मिल ही गया। हालांकि, इसमें सवार लोगों के शव या जीवित बचे लोगों की तलाश का अभियान अभी भी जारी है। 3 जून को एएन-32 विमान जब लापता हुआ तो सुरक्षाबल यह जानते थे कि उनके लिए इस विमान को ढूंढना आसान नहीं होगा।

यह तलाशी अभियान भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा था। हाई टेक तकनीक और पुरजोर कोशिशों के बावजूद विमान के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था। द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, विमान के लापता होने के अगले ही दिन टी यूबी नाम के शख्स ने इसे ढूंढने में मदद करने की पेशकश की। केइंग स्थित गांव के निवासियों के बीच यूबी ‘लोकल टार्जन’ के तौर पर जाने जाते हैं।

40 से कुछ ज्यादा उम्र के यूबी परंपरागत शिकार और मछली पकड़ने में सिद्धहस्त हैं। माना जाता है कि वह बेयर पर्वत श्रृंखला के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। सियांग जिले में केइंग सर्किल के एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर पुमेक रोन्या ने कहा, ‘हमने यूबी को 15 किलो चावल और अन्य जरूरी सामान दिए। वह उसी दिन यानी 4 जून को पैदल ही एयरक्राफ्ट को ढूंढने निकल गए।’

मेचुका वैली की दुर्गम पहाड़ियां बड़े-बड़ों का हौसला तोड़ दे लेकिन यूबी का नहीं। वह यहां के स्थानीय आदी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। यह आदिवासी समुदाय अरुणाचल प्रदेश के 6 जिलों में रहता है। स्थानीय शिकारियों की टीम और पुलिस व आर्मी की टीमें यूबी के पीछे भेजी गईं।

विमान का मलबा ढूंढने की दिशा में बड़ी कामयाबी 7 जून को मिली। इसी दिन सेना और वायु सेना की टीमों को सही दिशा में बढ़ने का संकेत मिला, लेकिन यूबी का कोई पता नहीं चला। स्थानीय प्रशासन को भरोसा था कि यूबी वापस गांव लौट आएगा।

दरअसल, 7 जून को पेयूम के एक स्थानीय ने आकर केइंग में बताया कि उसने विमान को टूटिंग-लोएर इलाके की तरफ बढ़ते देखा है। इस सूचना की बदौलत ही तलाशी अभियान को सही दिशा में जारी रखने में मदद मिली। विमान के बारे में प्राथमिक सूचना मिलने के बाद दो स्थानीय पर्वतरोहियों ताका टामुट और किशोन टेकसेंग की मदद ली गई।

उन्हें कुछ अन्य पर्वतरोहियों की टीम भी दी गई। स्थानीय टीमें हर जानकारी वायुसेना और आर्मी को देती रही। उधर, टामुट और टेकसेंग ने गांववालों से बात की, जिनसे पता चला कि विमान गेसेंग गांव के ऊपर नजर आया था। पेउम से वहां तक दो दिन में पैदल पहुंचा जा सकता है। इसके बाद, वे गेसेंग गांव के लिए रवाना हो गए। 11 जून को वायुसेना के एक हेलिकॉप्टर ने पर्वतारोहियों को एयरलिफ्ट किया और आखिरकार क्रैश साइट तक पहुंचने में मदद मिली।

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