तेलंगाना रक्षण सेना (टीआरएस) की अध्यक्ष कलवाकुंतला कविता ने ऐलान किया है कि वह विधानमंडलों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 50% आरक्षण की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगी। पूर्व सांसद कविता ने गुरुवार को हैदराबाद के सरूरनगर इंडोर स्टेडियम में सामाजिक न्याय तेलंगाना संकल्प सभा के तहत विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कविता ने क्या कहा?

कविता ने कहा, “सामाजिक न्याय क्या है? यदि 100 लोगों के लिए 100 रोटियां हैं तो केवल 10 लोगों को 90 रोटियां खाने देना घोर अन्याय है। यह तय करना कि 100 रोटियां सभी 100 लोगों का पेट भर सकें, सच्चा न्याय है। दुर्भाग्य से, आज हमारे देश में 10 लोग 90% संसाधनों पर कब्जा करके बैठे हैं जबकि अधिकतर लोग भूखे रह जाते हैं।”

टीआरएस प्रमुख ने दावा किया कि सामाजिक न्याय की उनकी लड़ाई को राजर्षि शाहू महाराज, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता से प्रेरणा मिली है।

कविता ने कहा, “अगर आजादी के तुरंत बाद ओबीसी को एससी और एसटी के बराबर आरक्षण दिया गया होता तो भारत आज दुनिया की बड़ी महाशक्तियों जैसे अमेरिका के बराबर खड़ा होता।”

कविता ने आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण के मामले में तेलंगाना के नेता दोहरा खेल खेल रहे हैं। उन्होंने मांग की कि तेलंगाना की विधानसभा से पारित हो चुके 42% ओबीसी आरक्षण वाले विधेयक को केंद्र सरकार जल्द मंजूरी दे। उन्होंने यह भी मांग की कि संसद और विधानसभा में ओबीसी को 50% आरक्षण देने वाले विधेयक को संसद के बजट सत्र से पहले ही पारित किया जाना चाहिए।

कविता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने इस संबंध में विधेयक को पारित नहीं किया तो उनकी पार्टी हजारों कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली चलो रैली निकालेगी। तेलंगाना रक्षण सेना की जनसभा में 11 प्रस्ताव पारित किए गए।

इनमें विधान मंडलों में ओबीसी के लिए 50% आरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करना, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न से सम्मानित करना आदि शामिल हैं।

महिला आरक्षण विधेयक को किया जाए पेश

जनसभा में यह मांग भी की गई कि महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़े बिना इसे जल्द पेश किया जाए और पारित किया जाए। पूर्व सांसद ने इन मांगों को लागू करने के लिए दबाव बनाने का आह्वान किया और कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज से जुड़े सभी संगठनों, लोकतांत्रिक ताकतों को अपने मतभेदों को बुलाकर सामाजिक न्याय के बैनर तले एकजुट होना चाहिए।

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि देश की आरक्षण व्यवस्था सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि जाति, जनजाति और सामाजिक पिछड़ेपन जैसे ऐतिहासिक और सामाजिक आधारों पर तय की गई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।