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कठुआ गैंगरेप: जांच करने वाली महिला अफसर बोलीं- हमारे सिर पर मां दुर्गा का हाथ, मेरी वर्दी ही मेरा धर्म

आरोपियों ने उनसे यह भी कहा कि हम सभी एक ही धर्म और जाति से आते हैं, इसलिए मुझे उन्हें एक मुस्लिम लड़की के मामले में दोषी नहीं ठहराना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि एक अफसर के तौर पर मेरा सिर्फ एक ही धर्म है और वह है मेरी वर्दी।

कठुआ गैंगरेप कांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। हर दिल में इस कांड के खिलाफ आक्रोश भरा है और हर कोई इस कांड के आरोपियों के लिए सजा की मांग कर रहा है। इस जघन्य कांड का उद्भेदन और इसके आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का श्रेय निश्चित तौर से उस जांच टीम को जाता है, जिसने दिन-रात एक कर इस कांड के आरोपियों के खिलाफ न सिर्फ सबूत जुटाए, बल्कि कई तरह की मुश्किलों का सामना करते हुए अपनी जांच को निष्पक्ष बनाए रखा।

श्वेतांबरी शर्मा- यह नाम है उस एसआईटी यानी विशेष जांच टीम की प्रमुख का जिन्होंने आठ साल की बच्ची के साथ हुई इस क्रूरता के मामले की जांच का जिम्मा संभाला। श्वेतांबरी शर्मा ने न्यूज वेबसाइट ‘द क्विंट’ से बातचीत करते हुए कहा कि जांच की शुरुआत में हमें जिन लोगों पर इस कांड में शामिल होने का शक था, उनके परिजनों और वकीलों ने हमारे काम में अड़ंगा लगाने और इस जांच को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हमें परेशान करने के लिए उन्होंने अपनी सारी ताकत लगा दी, लेकिन हम अपने स्टैंड पर कायम रहे।

हम बहुत निराश थे, खासतौर पर जब हमने ये जाना कि हीरानगर पुलिस स्‍टेशन के लोगों को केस  छिपाए रखने के लिए रिश्‍वत दी गई है और उन्‍होंने मारी गई लड़की के कपड़ों को धो दिया और साक्ष्‍य के मटीरियल्‍स को नष्‍ट कर दिया। लेकिन मां दुर्गा का आशीर्वाद सदा हमारे साथ था।

श्वेतांबरी ने बतलाया कि इस मामले के ज्यादातर आरोपी ब्राह्मण थे। कई बार इन आरोपियों ने उनसे यह भी कहा कि हम सभी एक ही धर्म और जाति से आते हैं, इसलिए मुझे उन्हें एक मुस्लिम लड़की के मामले में दोषी नहीं ठहराना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि एक अफसर के तौर पर मेरा सिर्फ एक ही धर्म है और वह है मेरी वर्दी। श्वेतांबरी शर्मा ने कहा कि नवरात्र की छुट्टियों के दौरान हम लोगों ने इस केस को सॉल्व कर लिया था। 2012 बैच की जम्मू पुलिस सेवा की अधिकारी ने कहा कि मां दुर्गा का हाथ मेरे सिर पर था और मैं इस केस को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ती गई।

श्वेतांबरी ने आगे बतलाया कि जब जांच को प्रभावित करने में आरोपी और उनके समर्थक फेल हो गए तो उन्होंने लाठी का सहारा लेकर हमें डराने की कोशिश की। यहां तक की हमारे खिलाफ रैलियां निकाली गईं और स्लोगन भी बनाए गए। लेकिन बहुत ही धैर्यपूर्वक हम अपना काम करते रहे। श्वेतांबरी ने बतलाया कि आरोपियों की जमानत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के बाहर 10-20 की संख्या में मौजूद वकीलों ने हंगामा खड़ा किया। हमलोगों ने इस बारे में एसएचओ से एफआईआर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

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