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कश्मीरी पंडितों के लिए अलग शहर के मुद्दे पर पीडीपी-भाजपा आमने-सामने

जम्मू कश्मीर में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी पीडीपी और भाजपा घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए एक अलग शहर बसाने के मुद्दे पर हमख्याल नहीं हैं। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि विस्थापित समुदाय के लिए अलग से बस्तियां नहीं बसाई जाएंगी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि […]

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Jammu Kashmir मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि विस्थापित समुदाय के लिए अलग से बस्तियां नहीं बसाई जाएंगी (फाइल फ़ोटो-पीटीआई)
जम्मू कश्मीर में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी पीडीपी और भाजपा घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए एक अलग शहर बसाने के मुद्दे पर हमख्याल नहीं हैं। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि विस्थापित समुदाय के लिए अलग से बस्तियां नहीं बसाई जाएंगी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि इस मुद्दे पर केंद्र के नजरिए में कोई बदलाव नहीं आया है।

इस कदम को लेकर आलोचनाओं से घिरे सईद ने विधानसभा को बताया कि घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए अलग से कोई बस्ती नहीं होगी। उन्होंने कहा, मैंने केंद्रीय गृह मंत्री को बताया था कि कश्मीरी पंडित घाटी में अलग से नहीं रह सकते और उन्हें एकसाथ रहना होगा। विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस और घाटी के नेताओं और अलगाववादी समूहों की आलोचनाओं के बाद सईद ने यह बात कही।

सईद का यह बयान दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई मुलाकात के बाद आया है। बैठक के बाद उस समय गृह मंत्रालय ने एक सरकारी बयान में कहा था कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार विस्थपित कश्मीरी पंड़ितों के लिए संयुक्त कस्बे बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण करेगी और भूमि उपलब्ध कराएगी।

नेशनल कांफ्रेंस ने इसे राज्य के लोगों को बांटने की नापाक साजिश करार दिया था तो वहीं अलगाववादियों ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ घाटी में गाजा जैसी स्थिति पैदा करने के लिए इजराइल का अनुसरण कर रही है।

उधर, नई दिल्ली में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि केंद्र कश्मीरी पंडितों के लिए समग्र बस्ती बनाने की अपनी योजना पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं ब्योरे में नहीं जाना चाहता। केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए जो भी फैसला किया है फैसला वही है। इस मुद्दे पर हमारी जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के साथ अच्छी बातचीत हुई है।

राजनाथ सिंह ने पूर्ववर्ती उमर अब्दुल्ला सरकार को एक पत्र लिखा था। इसके बाद राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा को एक अन्य सूचना भेजी जिसमें इस प्रकार के विस्थापितों के लिए जमीन की पहचान करने को कहा गया था। फिलहाल देश में कश्मीरी विस्थापितों के 62 हजार पंजीकृत परिवार हैं। ये परिवार 1989 में राज्य में आतंकवाद के चलते घाटी से जम्मू, दिल्ली एवं देश के अन्य भागों में चले गए थे। राज्य के भाजपा-पीडीपी गठबंधन ने अपने साझा न्यूनतम कार्यक्रम में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का जिक्र किया है। 2015-16 के बजट में केंद्र ने विस्थापित के पुनर्वास के लिए 580 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं।

विधानसभा में दिए गए सईद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने सीआरपीएफ के एक समारोह से इतर संवाददाताओं से कहा, चिंता मत कीजिए, हमें कश्मीरी पंडितों और वहां रह रहे लोगों की सुरक्षा की चिंता है। हम इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर एक कार्य योजना तैयार करेंगे।

विधानसभा में सईद ने माना था कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग गृह प्रदेश संभव नहीं है और राज्य में विवाद पैदा करने के लिए अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने को सरकार का प्रयास बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के विवाद पैदा किए जाएंगे तो वे कैसे वापस लौटेंगे ।

उन्होंने कहा, हम इसे जल्दबाजी में नहीं करना चाहते। हम कोई फैसला लेने से पूर्व सभी पक्षों को साथ लेंगे। हम कश्मीर में धर्मनिरपेक्षता के फूल खिलाना चाहते हैं ताकि कश्मीर विभिन्न किस्मों के फूलों का बगीचा बन सके। उन्होंने अलगाववादियों से भी अपील की कि उन्हें इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे कश्मीर की बदनामी होती है।

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