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कश्मीरी पंडितों से मिले अमित शाह, कहा- कश्‍मीर में फिर बसाएंगे टाउनशिप व मंदिर

कश्मीरी नेताओं ने बताया कि 'अमित शाह ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि कश्मीर घाटी के सभी 10 जिलों में खास टाउनशिप बसायी जाएगी, जिसमें कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास किया जाएगा।'

amit shahकेन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर में खास टाउनशिप बनाने का वादा किया है। (एक्सप्रेस फोटो/फाइल)

कश्मीरी पंडितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल से वादा किया कि घाटी में जल्द ही कश्मीरी पंडितों के लिए खास टाउनशिप बसायी जाएगी। इसके साथ ही अमित शाह ने घाटी में तबाह किए गए मंदिरों के भी जीर्णोद्धार की बात कही है।

अमित शाह से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कश्मीरी मूल के कई गणमान्य लोग शामिल रहे। जिनमें उत्पल कौल, कर्नल ताज टिक्कू, डॉक्टर सुरिंदर कौल, संजय गंजू और पारेक्षित कौल आदि प्रमुख हैं।

इस मुलाकात में कश्मीरी नेताओं ने आर्टिकल 370 के प्रावधान हटाने के लिए सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किया। बता दें कि बीते साल अगस्त में केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के विशेषाधिकार को खत्म करते हुए जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधान हटा दिए थे। इसके साथ ही राज्य को दो भागों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया है।

इंडिया टुडे के साथ बातचीत में प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे उत्पल कौल ने बताया कि अमित शाह ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि कश्मीर घाटी के सभी 10 जिलों में खास टाउनशिप बसायी जाएगी, जिसमें कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास किया जाएगा।

कौल ने बताया कि अमित शाह ने घाटी के मंदिरों के जीर्णोद्धार की भी बात कही है, जिन्हें आतंकियों द्वारा तबाह कर दिया गया था। अमित शाह ने कश्मीरी लोगों को यह भी वादा किया कि राज्य में सरकारी नौकरियों में समुदाय के लिए उम्र सीमा में भी कुछ राहत दी जाएगी।

बता दें कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को पुनर्वास करने की भाजपा सरकार की योजना पुरानी है। जब जम्मू कश्मीर में भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनायी थी, उस वक्त भी भाजपा ने कश्मीरी पंडितों के लिए स्पेशल टाउनशिप बनाने के प्रयास किए थे। हालांकि उस वक्त पीडीपी सरकार के साथ इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पायी थी।

अब जब जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधान हट चुके हैं और राज्य केन्द्र शासित प्रदेश बन गया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भाजपा सरकार अपने वादे को पूरा कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि 90 के दशक कश्मीर में चरमपंथ के उभार के साथ ही बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी से निकाल दिया गया था। इसके बाद से ही कश्मीरी पंडित देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हैं। जम्मू में बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित कैंपों में रहने को मजबूर हैं। घाटी से आर्टिकल 370 हटने के बाद अब इन कश्मीरी पंडितों को घाटी वापस लौटने की आस फिर से जगी है।

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