कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक कथित धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद कुछ समय के लिए घर पर रहने की सलाह दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर सरकार ने विभिन्न विभागों को मौखिक निर्देश देकर इन कर्मचारियों को सतर्क रहने और फिलहाल काम पर नहीं आने के लिए कहा है। खास तौर पर स्कूलों और राजस्व विभागों में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

ऑनलाइन सामने आए इस पत्र में घाटी में काम करने वाले कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर अपनी ‘कार्यप्रणाली बदलने’ की चेतावनी दी गई है। पत्र में कुछ कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी प्रकाशित किए गए हैं। यह पत्र ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ नाम के एक समूह की ओर से जारी किए जाने का दावा किया गया है। पुलिस इसकी प्रामाणिकता की जांच कर रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह समूह आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का कोई अन्य मोर्चा हो सकता है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक पत्र की वास्तविकता और इसके पीछे मौजूद लोगों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

राजस्व विभाग के कर्मचारियों को विशेष तौर पर निशाना बनाने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, पत्र में खास तौर पर राजस्व विभाग में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी दी गई है। कथित पत्र में उनके काम को आतंकवादियों की संपत्तियों पर सरकार की कार्रवाई से जोड़ने की कोशिश की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, घाटी में कार्यरत प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। एहतियात के तौर पर उन्हें 20 अगस्त तक काम पर नहीं आने के लिए कहा गया है। जिन कर्मचारियों के नाम और संपर्क विवरण पत्र में साझा किए गए हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

सरकार ने जारी नहीं किया औपचारिक आदेश

हालांकि, इस संबंध में जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से कोई औपचारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न विभागों को मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को फिलहाल घर पर रहने के लिए कहा जाए।

एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि शुरुआत में प्रवासी कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर नरमी बरतने के निर्देश दिए गए थे। उनके मुताबिक, पहले 5 अगस्त को विशेष अवकाश देने की बात कही गई थी, जिसके बाद कुछ समय के लिए कर्मचारियों को घर पर रहने के लिए कहा गया।

करीब 6,000 कश्मीरी पंडितों को मिला रोजगार पैकेज का लाभ

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के तहत केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज के माध्यम से वर्षों में करीब 6,000 लोगों को लाभ मिला है। इस योजना के तहत नियुक्त कर्मचारियों के लिए घाटी में काम करना रोजगार की प्रमुख शर्तों में से एक रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर में तैनात इन कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में बढ़ाई गई है। शिक्षकों के लिए घाटी में ऑनलाइन जीपीएस आधारित उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है, लेकिन सुरक्षा कारणों से प्रवासी कर्मचारियों को इसमें छूट दी गई है। उन्हें आगमन रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति है।

2022 में भी हुए थे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों पर हमले

कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता नई नहीं है। वर्ष 2022 में आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाकर कई हमले किए थे। इन हमलों में पांच लोगों की मौत हुई थी।

इन घटनाओं के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने घाटी से बाहर स्थानांतरण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। हालांकि, सरकार ने उनकी सामूहिक स्थानांतरण की मांग स्वीकार नहीं की और सुरक्षा के लिहाज से उन्हें घाटी के अलग-अलग अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में तैनात किया गया।

ताजा धमकी भरे पत्र के सामने आने और 31 जुलाई को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में ईंट भट्ठे पर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। ऐसे में घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर उठाए गए ताजा एहतियाती कदमों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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