Iran-Israel War: अमेरिका-इजरायल ने ईरान से युद्ध के पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या कर दी थी। इसके चलते भारत में भी शिया मुस्लिम लोगों ने ईरान और अमेरिका की आलोचना की है। कश्मीर के मुस्लिम समाज के लोगों में ईरान के प्रति सहानुभूति देखने को मिली है। लोग गहने, नकदी, और तांबा जैसी चीजें इकट्ठा कर रहे हैं, जिससे युद्ध में ईरान की मदद की जा सके।

पिछले एक हफ्ते के दौरान घाटी की कई मस्जिदों और नुक्कड़ों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा है। यहां लोग ईरान में युद्ध से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अपनी कीमती चीजें दान कर रहे हैं। बता दें कि कश्मीर में अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सबसे ज्यादा गुस्सा दिखा था।

6 साल की बच्ची ने दान किया गुल्लक

छह साल की सैयद अनम ज़ेहरा ईद से ठीक पहले इनमें से एक केंद्र पर पहुंचीं और अपना गुल्लक (पिगी बैंक) एक्टिविस्ट्स सौंप दिया। जब किसी ने उनसे पूछा कि वह कितने समय से यह पैसे जमा कर रही थीं, तो उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से पैसा जोड़ रही है। यह ईरान के लिए है।

एक अन्य मामले में, एक महिला ने अपने गहने बेचे और उससे मिले पैसे दूतावास को दान कर दिए। ईरानी दूतावास के एक्स (X) हैंडल ने पोस्ट किया कि कश्मीर की एक बहन ने अपने पति की याद में रखे सोने को दान कर दिया, जिनका 28 साल पहले निधन हो गया था। यह दान उन्होंने ईरान के लोगों के प्रति प्रेम और एकजुटता से भरे दिल के साथ किया है। आपके आंसू और पवित्र भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सुकून का सबसे बड़ा जरिया हैं और इन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा।

आर्थिक मदद के लिए आगे आए कश्मीर शिया मुस्लिम

एक बड़ी शिया आबादी वाले कश्मीर और लद्दाख में 1 मार्च को खामेनेई की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शनों की लहर देखी गई थी। उसके कुछ हफ्तों बाद यह समुदाय उन देशों के खिलाफ युद्ध में लगे ईरान की आर्थिक मदद और समर्थन के लिए एक साथ आया है, जो अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध में उलझा हुआ है।

17 मार्च को भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट कर समर्थन के लिए भारत के लोगों का धन्यवाद किया और दान को दूतावास के आधिकारिक बैंक खातों में भेजने का निर्देश दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारुख अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और श्रीनगर के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी सहित कश्मीरी राजनीतिक नेतृत्व ने भी नई दिल्ली में ईरानी दूतावास का दौरा कर शोक वाली किताब पर हस्ताक्षर किए।

दान को बताया मानवीय और धार्मिक कार्य

ऑल जम्मू एंड कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान रज़ा अंसारी ने इस बात पर जोर दिया कि समाज ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए आगे आया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि कथित तौर पर कलेक्शन की प्रक्रिया में शामिल कुछ व्यक्तियों को विभिन्न अधिकारियों के फोन आ रहे हैं, जो फंड कलेक्शन करने वालों और दानदाताओं आदि का विवरण मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह सभी को आश्वस्त करना महत्वपूर्ण है कि ये दान विशुद्ध रूप से एक मानवीय और धार्मिक कार्य है जिसका उद्देश्य जरूरत के समय ईरान के लोगों की मदद करना है। उन्होंने कहा कि मैं अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि ऐसे मामलों को समझदारी और सम्मान के साथ निपटाया जाए ताकि आस्था और एकजुटता के इस सामूहिक कार्य को गरिमा के साथ जारी रखा जा सके।

‘रहबर के फरमान पर जान भी कुर्बान’

श्रीनगर के लाल बाजार के एक एक्टिविस्ट अबरार अली ने कहा कि हमारे बचपन से ही एक नारा रहा है कि ‘रहबर के फरमान पर जान भी कुर्बान है’ और मुझे लगता है कि यह वह समय है, जब लोग इसे साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। हम जाकर ईरान के लिए लड़ नहीं सकते लेकिन कम से कम हम प्रार्थना कर सकते हैं और कुछ दान कर सकते हैं ताकि पिछले कुछ हफ्तों में ईरान को जो नुकसान हुआ है, उसकी थोड़ी भरपाई हो सके।

उनके इलाके में करीब 60 घर हैं, और कल दान अभियान के पहले तीन घंटों के भीतर ही उन्हें 3 लाख रुपये नकद और करीब 9 लाख रुपये के सोने के आभूषण मिले। उन्होंने कहा कि यहां तक कि जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है, उन्होंने भी कुछ सोना और नकदी दान कर दी जो उन्होंने अपने लिए बचा कर रखी थी।

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कश्मीरी महिला ने दान की पति की 28 साल पुरानी निशानी। (इमेज सोर्स- एक्स)

ईरान में चल रहे युद्ध में फंसे नागरिकों की मदद के लिए कश्मीरी लोगों ने बड़ा दिल दिखाया है। वह ईरान की मदद के लिए नकदी, सोना और यहां तक ​​कि घरेलू सामान भी दान कर रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी ने लोगों के दिलों को छू लिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने एक्स पर साझा किया कि कैसे कश्मीर की एक महिला ने लगभग तीन दशकों से सहेज कर रखा सोना दान कर दिया। यह उनके पति की आखिरी निशानी थी, जिनका 28 साल पहले निधन हो गया था। पढ़िए पूूरी खबर…