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कश्मीर अशांति: उमर की अगुवाई में विपक्षी नेताओं ने की मोदी से मुलाकात, घाटी में सभी पक्षों से बात करने को कहा

उमर के नेतृत्व वाले शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा- कश्मीर में अशांति से निपटने में लगातार विफल रहने से अलगाव की भावना गहरी होगी।

Author नई दिल्ली | August 22, 2016 4:34 PM
20 अगस्त (शनिवार) को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के बाद मीडिया को संबोधित करते नेकां प्रमुख। (पीटीआई फोटो)

उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर से विपक्षी पार्टियों के एक शिष्टमंडल ने सोमवार (22 अगस्त) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और घाटी में मौजूदा संकट के राजनीतिक समाधान की जरूरत बताते हुए यह सुनिश्चित करने की अपील की कि बीते दिनों जो भी ‘गलतियां’ हुईं, उन्हें नहीं दोहराया जाए। प्रधानमंत्री के साथ 75 मिनट चली बैठक के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर ने संवाददाताओं को बताया कि ‘प्रधानमंत्री ने उन्हें पूरे धैर्य से सुना और उनके ज्ञापन को स्वीकार किया।’ नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष 46 वर्षीय नेता ने बताया कि कश्मीर के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री से एक राजनीतिक हल तलाशने का अनुरोध किया ताकि देश के साथ साथ राज्य में स्थायी शांति सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली पहुंचने पर जम्मू कश्मीर के मुद्दे खासकर मौजूदा संकट के दृष्टिकोण से हमने अन्य नेताओं से जो भी बातें कीं वही प्रधानमंत्री से भी की हैं, जिसे सार्थक तरीके से समझने और एक समाधान की आवश्यकता है।’

बैठक के बाद उमर ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू कश्मीर का मुद्दा राजनीतिक प्रकृति का है। वक्त वक्त पर इस तरह की स्थितियां फिर से उत्पन्न होती रहती हैं, लेकिन अगर हम इसके राजनीतिक समाधान को तलाशने में नाकाम रहते हैं तो हम बार बार वही गलतियां दोहराते रहेंगे।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शिष्टमंडल की इस बात से सहमत दिखे कि इस संकट के लिए विकास ही एकमात्र जवाब नहीं है। बहरहाल, बैठक के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने हमें स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ विकास ही अकेले इस समस्या का हल नहीं है।’ उमर ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री के मुंह से कोई बात नहीं निकलवाने जा रहा हूं और उन्होंने जो कुछ भी कहा था, उसका कोई मतलब नहीं निकालने जा रहा हूं।’

उमर के अलावा इस शिष्टमंडल में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रमुख जी ए मीर के नेतृत्व में सात सदस्यीय दल, माकपा विधायक एम वाई तरीगामी, मुख्य विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस के क्षेत्रीय प्रमुखों नसीर वानी और देविंदर राणा सहित आठ सदस्यीय दल शामिल थे। यह शिष्टमंडल राष्ट्रीय राजधानी में है और सरकार एवं विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहा है। जम्मू में रविवार (21 अगस्त) को वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, ‘इस बारे में मैं कुछ भी नहीं कहना चाहता क्योंकि प्रधानमंत्री ने हमें ऐसा कुछ भी नहीं कहा।’ जेटली ने रविवार को कहा था, ‘पथराव करने वाले सत्याग्रही नहीं, बल्कि आक्रमणकारी हैं।’ उमर ने कहा, ‘और… सबसे अहम बात यह है कि जम्मू कश्मीर पर राजनीति नहीं की जाए। राजनीति का खेल खेलने के लिए हमें बाद में पर्याप्त समय मिलेगा।’

उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में किसी राजनीतिक मकसद से नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं इतना बेरहम नहीं हूं कि जब मेरे लोग हर रोज मारे जा रहे हैं तो राजनीति करूंगा। हमारा मकसद मौत के इस चक्र को तोड़ना है और इस समस्या के लिए एक दीर्घकालिक समाधान तलाश करना है।’ शिष्टमंडल ने ‘घाटी में लोगों की मौत पर नाराजगी और दुख प्रकट करते हुए और हालात से निपटने में राजनीतिक दृष्टिकोण की कमी पर निराशा जाहिर करते हुए’ प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री को बताया कि कश्मीर में इस मुद्दे के समाधान के लिए राजनीतिक तरीका अपनाने के बजाय पहले भी आजमाए जा चुके प्रशासनिक तरीकों से करने के कारण स्थिति और बिगड़ी है और ‘इसके कारण लोगों में खासकर नौजवानों में असंतोष एवं मोहभंग की भावना पनपी है।’

ज्ञापन में कहा गया, ‘हमारा यह दृढ़ मत है कि केंद्र सरकार को अब ज्यादा वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए और राज्य में अशांति दूर करने के लिए सभी पक्षों के साथ विश्वसनीय और अर्थपूर्ण राजनीतिक संवाद शुरू कर देना चाहिए।’ शिष्टमंडल ने कहा, ‘कश्मीर में व्याप्त अशांति दूर करने में लगातार विफल रहने से अलगाव की भावना और गहरी होगी।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री ‘इस नाजुक स्थिति से निपटने के लिए तत्काल उपाय करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि हमारे प्रयासों से कुछ फलदायी नतीजे निकलेंगे। हमलोग यहां किसी से शिकायत करने नहीं बल्कि एक अनुरोध के साथ आए हैं कि हमारे सुझावों पर अगर गौर किया जाता है तो इससे ना केवल जम्मू कश्मीर बल्कि समूचे देश में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’

उमर ने कहा, ‘हम सभी को अपनी गलतियों से सीखना चाहिए। मैंने 2010 (आंदोलन) से सीखा और इसी तरह दूसरों को भी सीखना चाहिए। समस्या यह है कि हम यह मानने लगते हैं कि हमने अपनी पिछली गलतियों से सीख लिया है और फिर कमोबेश लापरवाह हो जाते हैं।’ ज्ञापन पत्र में प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया कि वह ‘पैलेट गन पर तत्काल प्रतिबंध लगाएं जिससे मौजूदा अशांति में बहुत से लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कई लड़के-लड़कियां इसकी चपेट में आकर या तो अपंग हो गए हैं या फिर उनकी आंखों की रोशनी चली गई है।’ शिष्टमंडल ने घाटी में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई युवा इनका शिकार बने हैं। इनमें इरफान नाम का एक किशोर भी शामिल है। वह सीने पर आंसू गैस का गोला लगने से घायल हो गया था। बीती रात उसने दम तोड़ दिया।

ज्ञापन में कहा गया, ‘हम आपसे यह भी अनुरोध करते हैं कि आप पैलेट गन के इस्तेमाल पर तत्काल रोक की घोषणा करें और सामूहिक प्रताड़ना, छापेमारी और गिरफ्तारियों की नीति के खिलाफ संबंधित तबकों को सलाह दें क्योंकि इसके कारण राज्य में पहले से बिगड़ी हुई स्थिति और अधिक नाजुक हो गई है। ये नीतियां हमारे लोकतांत्रिक ताने-बाने के मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ हैं।’ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर केंद्र के रुख के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, ‘यह सवाल पीएमओ या विदेश मंत्रालय के समक्ष रखा जाना चाहिए। मैं यहां राज्य में अपने लोगों के बारे में बात करने के लिए आया हूं।’ इस शिष्टमंडल ने अपनी राजनीतिक पहल की शुरूआत शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर और उन्हें एक ज्ञापन सौंप कर की। इस ज्ञापन में राष्ट्रपति से अपने पद का इस्तेमाल करते हुए केंद्र को राज्य के सभी पक्षकारों के साथ राजनीतिक वार्ता शुरू करने का अनुरोध किया गया था। राज्य के इस शिष्टमंडल ने कल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें राज्य की स्थिति से अवगत कराया था।

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