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Kashmir: घातक साबित हो रही है CRPF की पेलेट गन, 317 घायलों में से 50 प्रतिशत की आंख में लगी गोली

CRPF ने कुल 2,102 गोलियां (पेलेट गन से) चलाई हैं। इनसे कुल 317 लोग घायल हुए और उनमें से 50 प्रतिशत लोगों की आंखों में जाकर इस गोली के छर्रे लगे हैं।

X-ray में दिखाया गया है कि 14 साल की लड़की के कहां-कहां पेलेट गन की गोलियां लगी हैं। (Source: AP file photo)

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर घाटी में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में लोगों के पथराव से खुद को बचाने के लिए सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) पेलेट गन का इस्तेमाल कर रही है। कहने को तो इससे निकली गोलियां नुकसान ना पहुंचाने वाली मानी जाती हैं, लेकिन घाटी से आ रही खबरें कुछ और ही सच्चाई बयां करती हैं। कश्मीरी लोगों की भीड़ को इधर-उधर करने के लिए CRPF ने कुल 2,102 गोलियां (पेलेट गन से) चलाई हैं। इनसे कुल 317 लोग घायल हुए और उनमें से 50 प्रतिशत लोगों की आंखों में जाकर इस गोली के छर्रे लगे हैं। इनमें से कई लोगों की आंख की रोशनी भी जा सकती है।

तनाव को शांत करने के लिए CRPF पेलेट गन के अलावा रबर बुलेट, स्टेन ग्रेनेड, मल्टी बटन शैल, पेपर बॉल्स का भी इस्तेमाल कर रही है। ये पत्थर फेंक रहे लोगों को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना हटाने के लिए काम आते हैं। ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि कभी-कभी मामूली सा दिखने वाला पत्थर भी काफी घातक साबित हो जाता है। कश्मीर के लोगों द्वारा फेंके जा रहे पत्थरों से अबतक CRPF के 1,099 लोग घायल हो चुके हैं।

ऐसा नहीं है कि CRPF को इन गोलियों का इस्तेमाल करके खुशी होती है। CRPF के डायरेक्टर जनरल दुर्गा प्रसाद ने कहा, ‘वह हमारे लिए आखिरी चारा होता है। पेलेट गन हम तभी इस्तेमाल करते हैं जब बाकी कुछ काम नहीं करता। लेकिन लोगों की रोशनी चले जाना और उनकी चोटों को देखकर हमें भी दुख होता है। हम लोग इसपर भी काम कर रहे हैं कि इसके नुकसान को कैसे कम किया जा सकता है।’

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पेलेट गन बाकी हथियारों के मुकाबले ज्यादा असरदार है। इसके छर्रे फैल जाते हैं और ज्यादा भीड़ को हटाने में मददगार होते हैं। फिलहाल CRPF ने इसके विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। CRPF आने वाले वक्त में कोंडर गन का इस्तेमाल करना शुरू कर सकती है। इसका इस्तेमाल यूएन फोर्स द्वारा किया जाता है। इसमें से गोल आकार के रबर के छर्रे निकलते हैं।

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