कश्मीर में एक ही जमीन को कई बार बेचने का मामला सामने आया है। इस मामले की जांच भी शुरू हो गई है। वर्ष 2017 में रिटायर्ड फिशरीज़ डायरेक्टर मुफ्ती मंजूर अपनी जमीन देखने के लिए श्रीनगर के बाहरी इलाके बलहामा गए थे। वह अपने बेटे के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। 2012 में जमीन खरीदने के बाद से वह उस जगह पर नहीं गए थे। उन्हें जो मिला उससे वह हैरान रह गए। जमीन पर बाड़ लगा दी गई थी और उस पर एक घर बनाया जा रहा था। लेकिन उन्होंने इसे कभी बेचा नहीं था।
मुफ्ती मंजूर ने जवाब के लिए रेवेन्यू अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिर में वह अपनी शिकायत उस समय के श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर सैयद आबिद राशिद के पास ले गए, जिन्होंने उस समय के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के के सिद्धा की अगुवाई में एक कमेटी बनाई। जांच में पता चला कि किसी और ने उनकी (मंजूर की) जानकारी या सहमति के बिना प्रॉपर्टी खरीदी थी।
क्राइम ब्रांच ने शुरू की जांच
इसके बाद जम्मू और कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की, जिसमें पाया गया कि मामला मुफ्ती मंजूर की जमीन से कहीं ज्यादा बड़ा था। यह एक बड़ा लैंड माफिया था जहां कथित तौर पर जमीन के एक ही प्लॉट को कई बार अलग-अलग खरीदारों को बेचा गया था, और रेवेन्यू अधिकारियों ने धोखाधड़ी को आसान बनाने के लिए जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर किया था।
मुफ्ती मंजूर ने 2012 में अपने बेटे और भाभी के साथ तीन प्लॉट खरीदे थे। दो प्लॉट 800-800 स्क्वेयर यार्ड के थे और तीसरा 425 स्क्वेयर यार्ड का। आधिकारिक स्टाम्प ड्यूटी देने के बाद उनकी सेल डीड रजिस्टर हो गईं, और बाद में जमीन मंजूर की पत्नी, बेटे और बहन के नाम पर म्यूटेट कर दी गई।
लेकिन उन म्यूटेशन के 58 दिन बाद उन्हें कैंसल कर दिया गया। जांच करने वालों ने आरोप लगाया कि उसी शहर के सबअर्ब की तहसीलदार नुसरत अज़ीज ने रियाज अहमद भट नाम के एक ब्रोकर और दूसरे रेवेन्यू अधिकारियों के साथ मिलकर कैंसलेशन का ऑर्डर दिया। अधिकारियों ने दावा किया कि अहमद भट ने ही मुफ्ती मंजूर को जमीन बेची थी। अधिकारियों ने दावा किया कि कैंसलेशन से अहमद भट को पटवारी से जमीन के नए एक्सट्रैक्ट लेने और प्रॉपर्टी को फिर से बेचने का मौका मिला और इस बार दो भाइयों को बेचा गया। एक कनाल जमीन भी अजीज के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई।
अहमद भट के कारनामे आए सामने
अज़ीज ने जांच करने वालों को बताया कि उसने अहमद भट से जमीन खरीदी थी। फिर जांच में रेवेन्यू रिकॉर्ड में गड़बड़ी का पता चला। जब भी कोई प्रॉपर्टी खरीदी या बेची जाती है और लेन-देन म्यूटेशन के जरिए रिकॉर्ड किया जाता है, तो पटवारी जमीन के दस्तावेजों की दो कॉपी तैयार करता है। पहली पार्टी-पटवार, जो पटवारी के ऑफिस में रखी जाती है, और दूसरी कॉपी पार्टी-सरकार के लिए होती , जिसे सेफ रखने के लिए मुहाफ़िज खाना भेजा जाता है।
श्रीनगर में मुहाफ़िज खाना एक सेंट्रलाइज़्ड रेवेन्यू रिकॉर्ड रूम है। इसमें कश्मीर के दोनों हिस्सों के बंटवारे से पहले के रेवेन्यू रिकॉर्ड भी हैं। मुफ्ती मंजूर के मामले में जांच से पता चला कि पटवारी के ऑफिस रिकॉर्ड में म्यूटेशन डॉक्यूमेंट बदल दिया गया था, लेकिन पार्टी-सरकार में वह वैसा ही रहा। पार्टी-सरकार ने अभी भी मुफ्ती मंजूर के परिवार को ओरिजिनल खरीदार के तौर पर रिकॉर्ड किया।
जांचकर्ताओं ने रेवेन्यू डॉक्यूमेंट्स को सिग्नेचर के फोरेंसिक एनालिसिस के लिए भेजा। इससे कन्फर्म हुआ कि अज़ीज ने इन डॉक्यूमेंट्स पर साइन किए थे। पुलिस ने अधिकारियों के बैंक स्टेटमेंट और कॉल रिकॉर्ड भी देखे और अहमद भट और अज़ीज के बीच कुछ कनेक्शन पाए। म्यूटेशन कैंसलेशन को बाद में रद्द कर दिया गया। उस समय के श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर की रिपोर्ट में ऑर्डर को शक वाला पाया गया और निर्देश दिया गया कि रजिस्टर्ड सेल डीड के आधार पर ओरिजिनल म्यूटेशन वैसे ही रहें। एक जांच अधिकारी ने यह भी कहा कि कैंसल करना अज़ीज के अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
क्या कहते हैं अधिकारी?
अधिकारी ने कहा, “उनके (अज़ीज) पास म्यूटेशन कैंसल करने की पावर या अधिकार क्षेत्र नहीं था। वह उस समय सेटलमेंट की तहसीलदार थीं और वह म्यूटेशन तभी कैंसल कर सकती थीं जब इलाका सेटलमेंट प्रोसेस में हो। लेकिन ऐसा नहीं था। इसके अलावा, कैंसलेशन सिर्फ़ उनके सीनियर ही कर सकते थे।”
इंडियन एक्सप्रेस ने अज़ीज से कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वह कमेंट के लिए उपलब्ध नहीं थीं। इस बीच मुफ्ती मंजूर ने कहा कि शिकायत दर्ज करने से पहले उन्होंने भट से बात की थी। उन्होंने दावा किया, “जब मैंने उनसे पूछा कि मेरी ज़मीन कैसे बेची गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें एक कनाल ज़मीन (800 वर्ग गज) तहसीलदार को देनी होगी। फिर अहमद भट ने मुझे दूसरे ऑप्शन देने शुरू कर दिए। आखिरकार हम पहलगाम में दो झोपड़ियाँ बनाने पर सहमत हुए।”
लेकिन वह डील भी टूट गई। मुफ्ती मंजूर ने कहा, “झोपड़ियाँ बन रही थीं। आखिर में जब वे बनीं, तो उसने (भट) बिजली की फिटिंग के लिए कुछ और समय मांगा। मैंने कहा कि हम खुद कर लेंगे। लेकिन बिक्री पूरी होने से पहले, मुझे पता चला कि झोपड़ियां और उसके साथ की जमीन बैंक के पास गिरवी रखी हुई है।”
मुफ्ती मंजूर ने दावा किया कि अहमद भट ने उन्हें कई ऑप्शन दिए और हर बार जब वे मान गए, तो वह किसी और की जमीन निकली। उन्होंने कहा, “एक दिन एक रिश्तेदार मुझसे मिलने आया और उसने बताया कि उसने जमीन का एक टुकड़ा खरीदा है। मैंने उससे पूछा कि उसने इसे कहां और किससे खरीदा है। जब उसने मुझे लोकेशन बताई, तो वह वही ज़मीन थी जो वह (भट) हमें बेच रहा था।” अहमद भट ने कथित तौर पर उनके साथ भी यही चाल चली। मुफ्ती मंजूर ने दावा किया, “उसने पैसे लिए और उन्हें ज़मीन नहीं दी।”
पीड़ित के खिलाफ ही दर्ज हो गई FIR
अहमद भट और अज़ीज के बीच कथित सांठगांठ की जांच के लगभग एक साल बाद अज़ीज ने मुफ्ती मंजूर, उसके बेटे और एक और व्यक्ति के खिलाफ़ FIR दर्ज कराई। उसने उन पर हमला करने और उसकी इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। अपनी शिकायत में अज़ीज ने दावा किया कि उसे बताया गया था कि कुछ लोग अहमद भट से खरीदी गई ज़मीन की बाउंड्री वॉल गिरा रहे थे। उसने दावा किया कि जब वह मौके पर पहुंचा और उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की।
पुलिस ने FIR दर्ज की और चार्जशीट फाइल की। हालांकि कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया। कोर्ट ने नोट किया कि अज़ीज समेत छह गवाहों को लिस्ट किया गया था, लेकिन प्रॉसिक्यूशन ने सिर्फ़ उससे पूछताछ की। उसके पति और भतीजे, जिन्हें भी गवाह के तौर पर लिस्ट किया गया था, पेश नहीं हुए। कोर्ट ने 31 अगस्त को अपने ऑर्डर में कहा, “रिकॉर्ड में मौजूद पूरी जानकारी और बताए गए फैक्ट्स पर विचार करने के बाद, आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए चार्ज से बरी किया जाता है क्योंकि उनके खिलाफ बिना किसी शक के कुछ भी साबित नहीं हुआ है।”
पिछले साल दिसंबर में जांचकर्ताओं के अज़ीज और दूसरे रेवेन्यू अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल करने से पहले, उन्हें उसी ब्रोकर और अधिकारियों से जुड़ी एक और शिकायत मिली। क्राइम ब्रांच को एक लिखित शिकायत में एक महिला ने कहा कि उसने 88.4 लाख रुपये में पांच कनाल और चार मरला जमीन खरीदी थी। उसने पुलिस को बताया कि खरीदने के कुछ समय बाद, ब्रोकर उसके पास आया और रेवेन्यू डॉक्यूमेंट्स मांगे, यह कहते हुए कि उनमें कुछ करेक्शन की जरूरत है।
जांचकर्ताओं ने कहा, “महिला ने हमें बताया कि उसे बाद में पता चला कि लैंड रेवेन्यू डॉक्यूमेंट्स में कुछ गलतियां थीं और ज़मीन का खसरा नंबर बदल दिया गया था। बाद में पता चला कि उसने जो जमीन खरीदी थी, वह किसी और को बेच दी गई थी।”
जांचकर्ताओं ने कहा कि म्यूटेशन रिकॉर्ड में कोई गलतियां नहीं हो सकतीं, लेकिन अज़ीज के ऑफिस के रिकॉर्ड में दो नंबरों के बीच गलतियां दिखाई दीं। एक जांचकर्ता ने कहा, “यह ऐसा था जैसे म्यूटेशन नंबर 3 और 4 के बीच, आपने नंबर 3/1 से एक और म्यूटेशन डाल दिया हो। यह साफ तौर पर गैर-कानूनी है।” मुफ्ती मंजूर ने कहा कि उसने तब से उन लोगों के नाम इकट्ठा किए हैं जिनके बारे में उसे लगता है कि उनके साथ भी इसी तरह धोखा हुआ है। उसने डॉक्यूमेंट देते हुए कहा, “मैंने नाम इकट्ठा कर लिए हैं, आप इस लिस्ट में 13 नाम देख सकते हैं। असली संख्या 30 से ज़्यादा है।” इनमें श्रीनगर के क्रालपोरा के तीन भाई शामिल हैं (सैयद असलम अंद्राबी, सैयद याह्या अंद्राबी और सैयद शब्बीर अंद्राबी) भी है।” असलम ने दावा किया कि अहमद भट पर परिवार का 2 करोड़ रुपये से ज़्यादा बकाया है।
असलम ने क्या कहा?
असलम ने कहा, “मैं अपना घर बेचना चाहता था और उसने इसके लिए एक क्लाइंट दिलाने का ऑफर दिया। डील पक्की हो गई थी।” उन्होंने कहा कि क्लाइंट के पास अहमद भट के बन रहे एक कॉम्प्लेक्स में दो दुकानें थीं और उन्होंने असलम को घर के बाकी पैसे के साथ-साथ पार्ट-पेमेंट के तौर पर उन्हें ऑफर किया था। असलम ने कहा, “मैंने उससे (क्लाइंट) दुकानों के डॉक्यूमेंट्स और बाकी पैसे लिए और उसे पज़ेशन दे दिया।”
असलम ने कहा कि तीन साल बाद भी उसे दुकानों का पज़ेशन नहीं मिला है। अहमद भट ने बाद में अपने बकाया पैसे का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए पहलगाम में तीन कनाल जमीन ऑफर की। उन्होंने कहा कि असलम के भाइयों ने भी उन्हें ऑफर की गई ज़मीन के लिए 80 लाख रुपये और 50 लाख रुपये दिए।
असलम ने कहा, “लेकिन उसने हमें कभी नहीं दिया। उसका भाई शब्बीर अब मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट में अपनी ज़िंदगी के लिए लड़ रहा है। उसने रियाज़ द्वारा ऑफर की गई ज़मीन के लिए परिवार के गहने बेच दिए थे।”
असलम ने कहा कि उसने शुरू में पुलिस या कोर्ट जाए बिना मामला सुलझाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, “मैंने भी पुलिस से संपर्क करने और कोर्ट जाने का फैसला किया है। सरकार उसके साथ इतनी नरम कैसे है? लोगों की ज़िंदगी बर्बाद करने के लिए उसे जेल में डाल देना चाहिए।” मुफ्ती मंजूर के लिए अपनी जमीन वापस पाना अब अकेला मकसद नहीं रहा। उन्होंने कहा कि ड्रग माफ़िया की तरह, यह लैंड माफ़िया भी है। वे ताकतवर लोग हैं। उन्होंने कहा कि मेरा अब एकमात्र मकसद उन्हें सज़ा दिलाना है जो उन्होंने इतने सारे लोगों के साथ किया है।
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