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कश्मीर की मुख्यमंत्री बोलीं- पहले पता होता तो नहीं मारा जाता बुरहान वानी

मुफ्ती ने कहा, 'हमें मुठभेड के बारे में नहीं पता था। मैं मानती हूं कि अगर सुरक्षा बल को पता होता कि वहां वानी भी मौजूद है तो वह उसे एक मौका और देते। राज्य में हालात इन दिनों सुधर रहे थे। '
हिंसा के बाद 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 5 हजार के करीब लोग घायल हो चुके हैं। इसमें से 3000 के करीब सुरक्षा बल के लोग हैं।

कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मफ्ती ने हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों से अलग बयान दिया है। महबूबा ने कहा कि अगर फोर्स को पता होता कि जिस जगह पर मुठभेड़ हुई है वहां बुरहान भी मौजूद है तो स्थिति को किसी और तरह से कंट्रोल किया जाता। उनका कहना था कि बुरहान को मारने से पहले पहचाने पर फोर्स उसे एक चांस जरूर देती। वहीं इस मामले पर अब तक सुरक्षा एजेंसी कुछ और ही बोलती रही हैं। उनके मुताबिक, 8 जुलाई की रात को उन्हें बुरहान और दो आतंकियों के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। बुरहान के मारे जाने के बाद घाटी में हालात सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे। अबतक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 5 हजार के करीब लोग घायल हो चुके हैं। इसमें से 3000 के करीब सुरक्षा बल के लोग हैं। इस सबकी वजह से घाटी में कर्फ्यू तो लगा ही हुआ है और साथ ही साथ मोबाइल, इंटरनेट जैसी सेवाएं भी बंद पड़ी हैं।

महबूबा की पार्टी पीडीपी से सांसद मुजफ्फर बेग ने सुरक्षा बल पर ठीक से काम ना करने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि सुरक्षा बलों ने आतंकवाद से लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए नियमों को तोड़ा है। बेग के मुताबिक, पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों ने वानी को सरेंडर करने का कोई मौका नहीं दिया गया था। NDTV से बातचीत के दौरान मुफ्ती ने कहा, ‘हमें मुठभेड के बारे में नहीं पता था। मैं मानती हूं कि अगर सुरक्षा बल को पता होता कि वहां वानी भी मौजूद है तो वह उसे एक मौका और देते। राज्य में हालात इन दिनों सुधर रहे थे।’

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