ताज़ा खबर
 

‘खौफ में आ जाएंगे मुसलमान’, काशी-मथुरा मामले में हिन्दुओं की याचिका खारिज करें सुप्रीम कोर्ट, जमीयत ने दी अर्जी

जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से हिन्दुओं की याचिका खारिज करने का आग्रह किया है। जमीयत का कहना है कि अगर इस पर सुनवाई शुरू की गई, तो इससे मुस्लिम समुदाय में भय का माहौल बन जाएगा।

जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से हिन्दुओं की याचिका खारिज करने का आग्रह किया है।(PTI)

विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ नाम की संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका के माध्यम से महासंघ ने 1991 के प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट की धारा 4 को चुनौती दी है। इसको चुनौती देते हुए महासंघ के तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि यह कानून हिंदुओं के अधिकार का हनन करने वाला है। महासंघ की याचिका के खिलाफ जमीयत उलेमा ए हिंद भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से हिन्दुओं की याचिका खारिज करने का आग्रह किया है। जमीयत का कहना है कि अगर इस पर सुनवाई शुरू की गई, तो इससे मुस्लिम समुदाय में भय का माहौल बन जाएगा।

विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ की याचिका में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 25 लोगों को अपनी धार्मिक आस्था के पालन का अधिकार देता है। पार्लियामेंट इसमें बाधक बनने वाला कोई कानून पास नहीं कर सकता। महासंघ का कहना है कि 1991 में एक कानून बनाकर सीधे-सीधे हिंदुओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया है। काशी और मथुरा जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों पर मस्जिद बनी हुई है लेकिन इस कानून के चलते विदेशी आक्रमणकारियों की इन निशानियों को चुनौती नहीं दी जा सकती। महासंघ ने इस धारा को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने को कहा है।

वहीं सुन्नी मुस्लिम उलेमाओं के संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि वह पुजारी महासंघ की याचिका पर सुनवाई न करे। जमीयत का कहना है कि ऐसा करने से माहौल खराब होगा और अयोध्या के फैसले के बाद अगर कोर्ट इस याचिका पर नोटिस जारी करता है, तो इससे मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल पैदा हो जाएगा। जमीयत की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान भी कोर्ट को यह बताया गया था कि इसके बाद कई और मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर दावा ठोकने के लिए मुकदमा दायर होने की आशंका है। अब ऐसा ही हो रहा है। अगर यह कानून रद्द हो जाता है तो हिंदुओं की तरफ से ढेर सारे मुकदमे आना शुरू हो जाएंगे।

क्या है प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट –
1991 के प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट की धारा 4 में यह प्रावधान है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों की स्थिति वही बनाए रखी जाएगी, जो देश की आज़ादी के वक़्त यानि 15 अगस्त 1947 को थी। जब यह कानून बनाया गया था तब सिर्फ अयोध्या को अपवाद रखा गया था, क्योंकि 1991 में जब कानून बना तो अयोध्या से जुड़ा मुकदमा पहले से कोर्ट में लंबित था।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 सुशांत सिंह राजपूत ने की खुदकुशी: इंजीनियर से डांसर और फिर एक्‍टर बना था यह बिहारी लड़का
2 ‘भारत में उलटी गंगा बह रही, न्यायपालिका ने आंखें मूंद ली है’, SC के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू का तंज
3 आर्थिक बहिष्कार से चीन की सैन्य महत्वाकांक्षा नहीं हो सकती कमजोर, भारत को फेज वाइज पड़ेगा निपटना, पूर्व एनएसए ने दिए सुझाव
ये पढ़ा क्या?
X