कर्नाटक के मांड्या शहर में रहने वाले मैकेनिक शफीउल्ला खान तीन महीने पहले राशन की दुकान पर यह शिकायत लेकर पहुंचे थे कि उन्हें दो महीने से राशन नहीं मिला है। लेकिन वहां उन्हें पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी मौत हो चुकी है। 50 वर्षीय खान अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं।

पांच बच्चों के पिता खान ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हाल ही में मेरे बैंक से लेन-देन और राशन मिलना दोनों बंद हो गए। जब मैं सरकारी राशन की दुकान पर पहुंचा तो मुझे केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया। इसके लिए मुझसे आय प्रमाणपत्र लाने को कहा गया। जब मैं यह प्रमाणपत्र बनवाने के लिए राजस्व विभाग का सेवा केंद्र गया, तब मुझे पता चला कि रिकॉर्ड में मेरी ‘अक्टूबर 2024 में मौत हो चुकी है’।”

इसके बाद खान मांड्या नगर परिषद के जन्म और मृत्यु पंजीकरण विभाग पहुंचे। वहां रिकॉर्ड में दर्ज था कि उनकी मौत 19 अक्टूबर 2024 को जिले के सरकारी अस्पताल मांड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MIMS) में हुई थी। 12 नवंबर 2024 को जारी उनके मृत्यु प्रमाणपत्र में भी मौत का पंजीकरण 11 नवंबर को किए जाने की बात दर्ज है।

खान ने कहा, “मैं रोज 400-500 रुपये कमाता हूं और मेरी चार बेटियां पढ़ रही हैं। मैं डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर, पुलिस थानों और MIMS तक गया, लेकिन कहीं से भी ठीक से जवाब नहीं मिल रहा है।”

पिछले एक महीने से ज्यादा समय से खान की मदद कर रहे आरटीआई कार्यकर्ता फिलिप्स ने कहा, “ऐसा लगता है कि इसमें एक पूरा गठजोड़ हो सकता है। मैंने कुछ जांच की है और ऐसे कई मामले सामने आए हैं। मैं पुलिस महानिदेशक के पास शिकायत दर्ज करूंगा और उससे जुड़े दस्तावेज भी सौंपूंगा।”

पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया

खान का कहना है कि जब उन्होंने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस ने कहा कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान हो चुके खान ने कहा, “अब मुझे राशन नहीं मिल रहा है और मैं बैंक से लेन-देन भी नहीं कर पा रहा हूं। मैं जहां भी जाता हूं, अधिकारी मुझे ऐसे दस्तावेज दिखाते हैं जिनमें लिखा है कि मैं मर चुका हूं। जब मैं अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाता हूं तो कोई ठीक से जवाब नहीं देता।”

खान ने बताया कि उन्हें दिल की बीमारी है। उनका कहना है कि राशन कार्ड लेकर अस्पताल जाने के बावजूद उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है।

जब इंडियन एक्सप्रेस ने मांड्या की पुलिस अधीक्षक शोभारानी वी. जे. से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक लक्ष्मीनारायण प्रसाद को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।

19 अक्टूबर 2024 को MIMS में किसकी मौत हुई थी?

MIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जी. शिवकुमार ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया, “हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक शफी मोहम्मद नाम का एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती हुआ था और 19 अक्टूबर 2024 को उसकी मौत हो गई। अस्पताल में भर्ती होने के दो दिन बाद उसने अपना नाम शफीउल्ला खान दर्ज करने का अनुरोध किया था। उसके पास इसी नाम का आधार कार्ड भी था। मौत के बाद शव परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया।”

फिलिप्स ने दावा किया कि मोहम्मद का पोस्टमार्टम किया गया था। हालांकि, MIMS के सूत्रों ने इससे इनकार किया। उनका कहना था कि मौत स्वाभाविक होने के कारण पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं पड़ी।

हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस ने जिन अधिकारियों से बात की, उनमें से कोई भी यह पुष्टि नहीं कर सका कि 19 अक्टूबर 2024 को मरने वाला व्यक्ति आखिर कौन था।

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