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MADE IN INDIA स्नाइपर राइफल्स दुश्मनों को मौत की नींद सुलाने को तैयार हैं! जानें खूबियां

भारतीय सेना को पांच से छह हजार स्नाइपर राइफलों की जरुरत हैं और भारत अपनी इन जरुरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका और रूस की कंपनियों की निर्भर है।

Author नई दिल्ली | Updated: October 14, 2019 2:21 PM
अभी दोनों राइफलों को टेस्ट में पास होना है। अगर ये राइफलें टेस्ट में पास हो गईं तो कंपनी अपनी कई और योजनाओं पर काम करेगी। (ANI PHOTO)

केंद्र सरकार की भारत को डिफेंस मैनुफैक्चरिंग का हब बनाने की प्रतिबद्धता के बीच कर्नाटक की एक फर्म ने पहली स्वदेशी स्नाइपर राइफल बनाने का दावा किया है, जो भारतीय सुरक्षा बलों के इस्तेमाल में लाई जाएंगी। दो स्नाइपर राइफलें बनाने वाले एसएसएस डिफेंस को उम्मीद है कि भविष्य में भारत हथियार निर्माण और निर्यात हब का नेतृत्व कर सकता है। एसएसएस डिफेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) सतीश आर मचानी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, ‘हमने रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ आने के बाद इन राइफलों को डिजाइन और विकसित करना शुरू किया। हम देश में हथियार विकसित करने की अनुमति देने वाले कुछ निर्माताओं में से एक बन गए। हमने जो दो राइफलें विकसित की हैं वो पूरी तरह से स्वदेशी हैं।’ करीब 61 साल पुरानी कंपनी पूर्व में मोटर वाहन उद्योग के लिए पुरजे और मुख्य रूप से स्प्रिंग्स बनाती थी।

मचानी ने कहा, ‘हम डिफेंस सेक्टर के लिए पुर्जों की भी सप्लाई कर रहें हैं। हमारा विचार है कि सेना के लिए हथियारों का एक पूरा सिस्टम हो और आखिर में हम हथियार निर्यातक बनने की कोशिश में हैं। हालांकि हमें अपने हथियारों को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए बहुत अधिक मेहनत करनी होगी, लेकिन हमारे पास उत्कृष्ट रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर हैं।’ कंपनी मैनुफैक्चरिंग यूनिट के लिए कर्नाटक के जिग्नी में 80,000 Sq मीटर आर्म्ड फैक्ट्री का निर्माण भी कर रही है।

कंपनी ने इन राइफलों को वाइपर साबेर नाम दिया है। इसमें वाइपर में .338/7.62×51 की गोली और साबेर में .338 की गोली लगती है। वाइपर की रेंज करीब एक किलोमीटर है जबकि साबेर की रेंज 1.5 किलोमीटर बताई गई है। सतीश आर मचानी के मुताकि दोनों राइफल सेना और सरकारी एजेंसियों के बीच खासी मशहूर हैं। हालांकि अभी दोनों राइफलों को टेस्ट में पास होना है। अगर ये राइफलें टेस्ट में पास हो गईं तो कंपनी अपनी कई और योजनाओं पर काम करेगी। सूत्रों ने बताया कि कंपनी हथियारों के क्षेत्र में अभी तक 20 करोड़ रुपए निवेश कर चुकी है।

बता दें कि भारतीय सेना को पांच से छह हजार स्नाइपर राइफलों की जरुरत हैं और भारत अपनी इन जरुरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका और रूस की कंपनियों की निर्भर है।

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