कर्नाटक में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंत्री रिजवान अरशद गुरुवार को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें उन्होंने ‘फॉर्म 7’ के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाने की बात कही है। उनका आरोप है कि फॉर्म 7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन देकर वास्तविक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की जा रही है।

फॉर्म 7 वोटर लिस्ट में किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसी फॉर्म 7 को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि इसका बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल करके लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की जा रही है। सिविल सोसाइटी ग्रुप और विपक्षी नेताओं ने भी SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फॉर्म 7 आवेदन दाखिल किए जाने को लेकर चिंता जताई है।

फॉर्म 7 पर उठ रहे सवाल

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री रिजवान अरशद चुनाव आयोग से फॉर्म 7 के आवेदनों की सख्त जांच और वैध मतदाताओं के नाम हटने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग कर सकते हैं। वह बेंगलुरु अर्बन जिले की शिवाजीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं।

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब राज्य की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर कुछ लोगों द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए जाने के आरोप सामने आए। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने हाल में आरोप लगाया था कि राज्य की कई सीटों पर सही मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।

इनमें विजयपुरा जिले की बाबलेश्वर, बीदर जिले की भालकी, चिक्कमगलुरु जिले की मुदिगेरे और बेंगलुरु अर्बन की मल्लेश्वरम सीट समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। कुछ सीटों पर अधिकारियों की ओर से कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद कुछ लोगों ने फॉर्म 7 के जरिए किए गए आवेदन वापस भी ले लिए।

JD(S) ने भी जताई चिंता

कर्नाटक में SIR को लेकर सत्तारूढ़ NDA खेमे में भी चिंता सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम चार विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए गए हैं। BJP की सहयोगी JD(S) के नेताओं ने कथित तौर पर इस पर चिंता जताई है।

उन्होंने आशंका जताई है कि कर्नाटक में वोटर डिलीशन के लिए ‘पश्चिम बंगाल मॉडल’ अपनाया जा रहा है। बता दें, कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर है।

SIR में कितने वोटर हुए बाहर?

SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले कर्नाटक में करीब 5.54 करोड़ मतदाता थे। इनमें से लगभग 1 करोड़ नाम गणना चरण के दौरान मतदाता सूची से बाहर हो गए। इन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डिलीटेड और अन्य कैटेगरी में रखा गया।

इसके बाद करीब 4.4 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल हुए। अधिकारियों ने इनमें से 43.81 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक अगर इनमें से 20-25 फीसदी यानी करीब 9-11 लाख मतदाता अंतिम लिस्ट में वापस नहीं आते हैं, तो कर्नाटक में कुल मतदाताओं की संख्या 5.54 करोड़ से घटकर करीब 4.35 करोड़ रह सकती है।

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देश में SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर पूरे देश में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) लागू करने की मांग उठाई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।