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111 साल की उम्र में नहीं रहे सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी, 15 दिनों से थे वेंटिलेटर पर

2015 में लिंगायत समुदाय के धर्मगुरु को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था, जबकि 2007 में वह कर्नाटक रत्न से नवाजे गए थे।

Author January 21, 2019 4:43 PM
स्वामी जी से बात करते हुए बीजेपी चीफ अमित शाह। (फाइल फोटो)

लिंगायत समुदाय के धर्म गुरु और सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी नहीं रहे। सोमवार (21 जनवरी, 2019) को कर्नाटक के तुमकुरू में सुबह 11 बजकर 44 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह लगभग 111 साल के थे। उनके फेफड़ों में संक्रमण की शिकायत थी, जिसके चलते वह पिछले 15 दिनों से वह वेंटिलेटर पर थे। ये ऐलान मठ की तरफ से किया गया, जिसके कुछ देर बाद राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दोपहर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके निधन की जानकारी दी।

सीएम ने कहा कि महंत का अंतिम संस्कार मंगलवार (22 जनवरी) शाम साढ़े चार बजे किया जाएगा। उन्होंने इसके अलावा मंगलवार को सरकारी छुट्टी और तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की।लिंगायत समुदाय के धर्मगुरु सिद्धगंगा अस्पताल में भर्ती थे। वहां के मुखिया परमेश शिवाना ने पत्रकारों से कहा- सोमवार को महंत के शरीर में प्रोटीन की मात्रा और रक्तचाप काफी घट गया था।

स्वामीजी की तबीयत लगभग दो महीने से गड़बड़ थी। चेन्नई स्थित एक अस्पताल में तब उनकी सर्जरी भी हुई थी। हालांकि, उनका स्वास्थ्य थोड़ा सुधरा नजर आ रहा था, पर अचानक से उनकी हालत खराब हो गई थी। महंत के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खेद जताया।

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ महंत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

पिछले हफ्ते कर्नाटक बीजेपी चीफ येदियुरप्पा ने उन्हें भारत रत्न देने की मांग की थी। कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महंत को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिलाने के लिए बात करेंगे। बता दें कि स्वामी जी का जन्म एक अप्रैल 1907 को रामनगर के वीरपुरा गांव में हुआ था। सामाजिक कार्य के क्षेत्र में योगदान के लिए साल 2015 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था, जबकि साल 2007 में वह कर्नाटक रत्न से नवाजे गए थे।

इतना ही नहीं, 1965 में उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से साहित्य में पीएचडी की उपाधि भी हासिल की थी। वह श्री सिद्धगंगा एजुकेश्नल सोसायटी के भी प्रमुख थे, जो कि राज्य भर में लगभग 125 शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करती है।

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