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कर्नाटक में सीएम पद से हटाए जाएंगे 77 वर्षीय येदियुरप्पा? पार्टी के असंतुष्ट विधायकों ने की पूर्व सीएम शेट्टार से मुलाकात

दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने येदियुरप्पा का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में कोई अन्य नेता नहीं है जिसे इतना ज्यादा समर्थन मिला हुआ है। बीजेपी के महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा, "येदियुरप्पा और उनकी सरकार पर किसी तरह का कोई खतरा नहीं है।"

कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा से नाराज विधायकों ने पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार से मुलाकात की। (फाइल फोटो)

क्या कर्नाटक में सीएम पद से हटाए जाएंगे 77 वर्षीय बीएस येदियुरप्पा? यह चर्चा इस वजह से हो रही है क्योंकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस महीने 77 साल के हो चुके येदियुरप्पा को सीएम पद से हटाने की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर एक अहस्ताक्षरित पत्र जारी किया गया है। इस पत्र के जारी होने के बाद भाजपा में असंतोष पनपने की अटकलें शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही असंतुष्ट विधायकों ने पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार से भी मुलाकात की।

सोमवार शाम को भाजपा के वरिष्ठ विधायक उमेश कट्टी, मुरुगेश निरानी, अरविंद बेलाद और शंकर पाटिल मुननकोप्पा ने पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार से मुलाकात की। ये सभी विधायक मंत्री पद चाहते थे, लेकिन हालिया विस्तार में येदियुरप्पा मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए। इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस और जेडीएस के उन 10 बागी विधायकों को जगह दी गई जिन्होंने विधानसभा में स्पष्ट बहुमत साबित करने में करने में भाजपा की मदद की थी। इस बैठक के एक दिन बाद राज्य और केंद्र स्तर पर पार्टी की बैठक हुई।

हालांकि शेट्टार ने इनकार किया कि उन्होंने असंतुष्ट विधायकों के साथ बैठक की। वह सुबह की नाश्ते के समय बैठक के लिए येदियुरप्पा के घर गए और यह स्पष्ट करना चाहा कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ विधायक उनके निर्वाचन क्षेत्रों में उद्योग मंत्रालय से संबंधित मुद्दों के बारे में उनसे मिले थे, और कोई अन्य (असंतुष्ट) गतिविधियां नहीं हुई थीं।

उन्होंने कहा, “मैंने विधायकों की कोई बैठक नहीं की। कुछ विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मामलों पर चर्चा करने के लिए मेरे आवास पर आए थे। लोग मुझसे मिलने आते रहते हैं और मैं उन्हें रोक नहीं सकता। यह असंतुष्टों की बैठक नहीं थी। मैंने इस बाबत मुख्यमंत्री को समझाया है।”

येदियुरप्पा खेमे ने भी पार्टी में असंतोष की अटकलों को खारिज किया है। सीएम के एक सहयोगी ने कहा, “असंतुष्टों की एक बैठक के बारे में कुछ अफवाहें फैलाई गई है। सरकार में ऐसी कोई गतिविधि नहीं हो रही है और न हीं ये ऐसी बातों को लेकर किसी तरह की चिंता है।”

दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने येदियुरप्पा का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में कोई अन्य नेता नहीं है जिसे इतना ज्यादा समर्थन मिला हुआ है। बीजेपी के महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा, “येदियुरप्पा और उनकी सरकार पर किसी तरह का कोई खतरा नहीं है।”

पार्टी सूत्रों ने इस पूरे मामले को ‘प्रेशर टैक्टिस’ बताया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सका … वे राज्य के नेतृत्व से नाराज हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो येदियुरप्पा का उत्तराधिकारी बनने की बाट जोह रहे हैं। वे सिर्फ वहां के राजनीतिक परिदृश्य को सक्रिय रखना चाहते हैं। दोनों समूहों से दबाव है। वास्तव में राज्य इकाई काफी सारे सक्षम नेता हैं।”

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने येदियुरप्पा की कार्यशैली के साथ उनके मतभेद और मोहभंग के बारे में बताया है। भाजपा के एक नेता ने स्वीकार किया कि उनमें से कुछ ने सरकार के कामकाज में येदियुरप्पा के बेटे बी वाई विजयेंद्र द्वारा “हस्तक्षेप” पर नाराजगी व्यक्त की थी। नेता ने कहा, “ऐसी शिकायतें हैं कि वह राज्य में एक सुपर सीएम की तरह काम करते हैं।”

हालांकि, सूत्रों ने कहा कि येदियुरप्पा को राष्ट्रीय नेतृत्व पूरा समर्थन कर रहा है। बीजेपी नेता ने कहा, “वह सबसे लोकप्रिय नेता हैं और पार्टी को उनका विरोध करने से पूर्व में काफी नुकसान भी हुआ है।”

इस बीच, सोशल मीडिया पर और बीजेपी सर्किल में एक अनाम चार-पन्नों का पत्र सर्कुलेट किया जा रहा है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि येदियुरप्पा को सीएम के रूप में पद छोड़ देना चाहिए और एक सलाहकार या “मार्गदर्शी” की भूमिका निभानी चाहिए। पत्र में दावा किया गया है कि येदियुरप्पा का परिवार प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू कर चुका है, जो भाजपा के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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