गुरुवार को होने वाले कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के सात सीटों के चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डीके शिवकुमार के राज्य के सीएम बनने के बाद एक बार फिर रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी दिख रही है। कांग्रेस ने इस चुनाव में पांच उम्मीदवार उतारे हैं जबकि भाजपा के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं JD(S) ने अंतिम समय में अपना उम्मीदवार उतारा है। हालांकि उसके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं माना जा रहा है।

कांग्रेस विधायक दल (CLP) की मंगलवार शाम बैठक हुई जिसके बाद पार्टी ने अपने विधायकों को बेंगलुरु दक्षिण जिले के एक रिजॉर्ट में रहने का निर्देश दिया। गुरुवार को सभी विधायकों को सीधे विधानसभा (Vidhana Soudha) मतदान के लिए ले जाया जाएगा।

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने अपने-अपने विधायकों को बेंगलुरु के आसपास अलग-अलग रिजॉर्ट्स में ठहराया है ताकि MLC चुनाव से पहले क्रॉस वोटिंग और गैरहाजिरी की आशंका को रोका जा सके।

सीएम डी.के. शिवकुमार ने जताई चिंता

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने चिंता जताई कि कुछ कांग्रेस विधायकों से जेडी(एस) संपर्क कर सकती है। इसके बाद विधायकों को यह भी प्रशिक्षण दिया गया कि मतदान कैसे किया जाए क्योंकि इस चुनाव में वरीयता आधारित (preferential voting) सिस्टम का इस्तेमाल होता है।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री तथा जेडी(एस) नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी कांग्रेस विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, ”हमने सिर्फ एक उम्मीदवार इसलिए उतारा है ताकि हमारी पार्टी के वोट एकजुट रहें। हम किसी भी तरह के गलत तरीके अपनाकर सीट जीतने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।”

बीजेपी से कुमारस्वामी का निवेदन

जेडी(एस) ने अपने विधायकों को देवनहल्ली पहुंचा दिया है और अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा से अतिरिक्त वोटों को ट्रांसफर करने की अपील की है। एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा, ”हम एक छोटी पार्टी हैं। हम क्या कर सकते हैं? उनके पास (कांग्रेस के पास) संख्या बल, ताकत और धनबल है। क्या हम उनके खिलाफ मुकाबला कर सकते हैं?”

इस चुनाव में जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता वोट हासिल करना जरूरी होगा जिसके बाद उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाएगा। इस कारण चार कांग्रेस उम्मीदवार- कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद, टिप्पन्नप्पा कमकनूर, पी. वी. मोहन और शिवन्ना मल्लावली और दो भाजपा उम्मीदवार- लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य को आरामदायक जीत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सातवीं सीट के लिए कांग्रेस के पास दो वोटों की कमी बताई जा रही है। हालांकि पार्टी को भरोसा है कि कार्तिक के पक्ष में डाले गए दूसरे वरीयता (सेकंड प्रेफरेंस) वोटों की मदद से वह आसानी से जीत हासिल कर लेंगे।

वहीं जेडी(एस) उम्मीदवार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है और भाजपा के संभावित समर्थन तथा भाजपा के बागी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल के समर्थन के बावजूद भी उसकी स्थिति कमजोर बनी हुई है। जेडी(एस) की संभावनाओं को एक और झटका तब लगा जब उसके एक प्रमुख विधायक जी. टी. देवगौड़ा का हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व से मतभेद हो गया।

उधर, भाजपा बुधवार शाम को अपने विधानमंडल दल (Legislature Party) की बैठक करेगी जिसमें मतदान से पहले रणनीति तय की जाएगी।