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कर्नाटक संकट: सीएम कुमारास्वामी ने बहुमत साबित करने के लिए मांगा वक्त, SC ने कहा- यथास्थिति बनाए रखें

संकटग्रस्त जद(एस) नेता कुमारास्वामी ने कहा है कि वह हर परिस्थिति के लिये तैयार हैं और वह सत्ता से चिपके रहने वाले व्यक्ति नहीं हैं।

Author नई दिल्ली | July 12, 2019 8:16 PM
सीएम कुमारास्वामी, जस्टिस रंजन गोगई और कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार। फोटो: फाइनेंशियल एक्स्प्रेस/ इंडियन एक्सप्रेस

कर्नाटक में जारी सियासी संकट हर एक नए दिन के साथ नया मोड़ ले रहा है। कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएंगे या नहीं इसपर असमंजस है। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी ने शुक्रवार (12 जुलाई 2019) को कहा है कि उन्हें बहुमत साबित करने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।

संकटग्रस्त जेडीएस नेता ने यह भी कहा कि वह हर परिस्थिति के लिये तैयार हैं और वह सत्ता से चिपके रहने वाले व्यक्ति नहीं हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में आज बागी विधायकों की अर्जी पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में यथास्थिति बनाए रखें।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्पीकर, बागी विधायकों और कर्नाटक के मुख्यमंत्री की तरफ से पेश वकीलों की दलीलें सुनीं। बागी विधायकों की तरफ से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश कीं। जबकि अभिषेक मनु सिंघवी कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार की तरफ से पेश हुए। वहीं कुमारस्वामी की तरफ से राजीव धवन ने जिरह की।

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मुकुल रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्पीकर विधायकों के इस्तीफे पर कोई फैसला इसलिए नहीं ले रहे हैं क्योंकि वह उन्हें अयोग्य ठहराना चाहते हैं। अगर ऐसा होता है तो विधायकों के इस्तीफों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि स्पीकर ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह पता लगाना जरूरी है कि विधायकों के इस्तीफे सही है या गलत।

सभी पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने स्पीकर से कहा कि वे कांग्रेस और जेडीएस के 10 बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता के मामले में यथास्थिति बनाये रखें। इसके साथ ही बेंच ने कर्नाटक के राजनीतिक संकट को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई 16 जुलाई के लिये स्थगित कर दी।

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