Karnataka CM DK Shivkumar: कर्नाटक में बुधवार को सत्ता परिवर्तन हो गया है क्योंकि कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने सीएम पद की शपथ ले ली है। वे राज्य के 34वें मुख्यमंत्री हैं। डीके शिवकुमार के साथ ही उनकी कैबिनेट के मंत्रियों का भी शपथ ग्रहण हुआ है। डीके शिवकुमार की कैबिनेट में डिप्टी सीएम के तौर पर जी परमेश्वर ने भी शपथ ली। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए ये उनके राजनीतिक जीवन के लिहाज से एक सफलता का बड़ा पड़ाव है, क्योंकि उन्होंने ऐसा भी देखा था कि जब उन्हें तिहाड़ जेल में 50 दिन काटने पड़े थे।

डीके शिवकुमार की ये राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। एक दौर ऐसा आया था, कि जब वे तिहाड़ जेल में थे। 50 दिन के बाद जमानत मिली तो डीके को कांग्रेस ने कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 2023 में उनके नेतृत्व में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिली, लेकिन सिद्धारमैया की वजह से उन्हें लगभग तीन साल का इंतजार करना पड़ा। इसमें सबसे अहम पहलू उनके जेल जाने का है।

किस मामले में हुई थी जेल?

बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने डीके शिवकुमार को 7 साल पहले 3 सितंबर 2019 को केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। वे करीब 50 दिन तक जेल में ही रहे थे।

उन्हें 23 अक्टूबर 2019 को जमानत मिली थी, जिसके बाद वे आजाद हुए थे। केस की बात करें तो ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की थ। यह 2017 में उनके नई दिल्ली स्थित आवास और अन्य परिसरों पर IT विभाग के छापों के दौरान करोड़ों रुपये की बेहिसाब नकदी मिलने से संबंधित था।

डीके शिवकुमार के केस का अब स्टेटस क्या है?

डीके शिवकुमार जिस केस में जेल गए थे, उस केस की वर्तमान स्थिति की बात करें तो जांच एजेंसी ने उन पर और उनके सहयोगियों पर हवाला चैनलों के माध्यम से नियमित रूप से भारी मात्रा में गैर-कानूनी लेनदेन करने का आरोप लगाया था। इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें 24 अक्टूबर 2019 को जमानत दे दी थी।

डीके शिवकुमार को इस मामले में मार्च 2024 को राहत मिल गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ 2018 से चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग के मामले को रद्द कर दिया था। इसे डीके शिवकुमार ने अपने लिए एक क्लीन चिट के तौर पर भी पेश किया था। जिस केस की वजह से डीके शिवकुमार को 50 दिन की जेल हुई थी, वह केस बाद में रद्द हुआ। उसके बाद से डीके शिवकुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

गांधी परिवार की अहम भूमिका

डीके शिवकुमार गांधी परिवार की तरफ से काफी समर्थन मिला था। आज वे जो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, वह कुर्सी भी गांधी परिवार की ही देन मानी जा रही है। इसकी वजह यह भी है कि सिद्धारमैया सीएम की कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। अंत में राहुल गांधी के साथ मीटिंग के बाद सिद्धारमैया के रुख में नरमी आई, और उन्होंने इस्तीफा देते हुए डीके के सीएम बनने का रास्ता साफ कर दिया।

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कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के दौरान शिवकुमार हाथ में संविधान की प्रति लिए हुए थे। शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी के वरिष्ठ नेता जीपरमेश्वर और 12 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। वहीं, शपथ ग्रहण के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिवकुमार ने अपनी कैबिनेट का पहला फैसला सुनाया। पढ़िए पूरी खबर…