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कर्नाटक: स्कूली पाठ्यक्रमों से टीपू सुल्तान का चेप्टर हटाने की मांग, येदियुरप्पा सरकार पहले ही रद्द कर चुकी है टीपू जयंती समारोह

कर्नाटक के एक विधायक ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर स्कूलों के पाठ्यक्रमों से टीपू सुल्तान से जुड़े अध्याय को हटाने की मांग की है।

Author Updated: October 23, 2019 3:16 PM
कर्नाटक में एमएलए ने टीपू सुल्तान के सारे संदर्भों को स्कूलों के पाठ्यक्रम से हटाने की मांग की है। तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (file photo)

कर्नाटक में येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बेजीपी सरकार द्वारा ‘टीपू जयंती’ समारोह को रद्द किए जाने के बाद एक और विवाद कायम होता दिखाई दे रहा है। इस बार स्कूली पाठ्यक्रमों से टीपू सुल्तान के बारे में बताई जाने वाली सभी बातों को हटाने की मांग की गई है। मदिकेरी के विधायक अप्पाचू रंजन ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार को ख़त लिखकर मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से संबंधित सभी चेप्टरों को हटाने का आग्रह किया है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक रंजन टीपू सुल्तान को “कट्टरपंथी” और “हिंदू मंदिरों को तोड़ने” वाला बताया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रंजन ने कहा कि टीपू सुल्तान ने अपने आक्रमण के बाद कोडगु में कई क्षेत्रों के नाम बदल दिए और काफी लोगों का धर्मांतरण करा दिए। विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि टीपू को गैरवान्वित नहीं किया जाना चिहए। उन्होंने कहा है कि वे इस हफ्ते के आखिर में मंत्री से मुलाकात करेंगे और अपनी बात समझाएंगे। विधायक अप्पाचू रंजन ने सरकार से इतिहासकारों से मिलकर एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने की अपील की है और कहा है कहा है कि वह अपने मांग को पूरा कराने के लिए जरूरी दस्तावेज भी मुहैया कराएंगे। विधायक के मुताबिक वह मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे और इस संबंध में एक मांग रखेंगे कि स्कूल और कॉलेजों से टिपू सुल्तान से संबंधित सारे कंटेंट हटा दिए जाएं।

इस पूरे प्रकरण पर जानकार लोगों की भिन्न राय है। उनका मानना है कि किसी शासक के बारे में आपका नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन बतौर इतिहास का विद्यार्थी होने के नाते आपको सभी के बारे में पढ़ना होता है। पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा ‘टेक्स्टबुक रिविजन कमिटी’ का हिस्सा रहे लेखक बैरागुर रामचंद्रप्पा ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया ‘द हिदू’ के साथ साझा की है। उनका कहना है, “जिन छात्रों को इतिहास के अध्ययन की जरूरत है, उन्हें सभी शासकों के बारे में जानना आवश्यक है। टीपू सुल्तान के बारे में आपकी कोई राय हो सकती है, लेकिन इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से उसे मिटाना गलत होगा।”

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे प्रकरण पर अभी तक राज्य के शिक्षा मंत्री ने किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार किया है। उन्होंने किसी भी तरह के पत्र मिलने की बात को खारिज किया है और कहा कि जब तक उन्हें लेटर नहीं मिल जाता, तब तक कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उधर, विपक्ष ने इस प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि बीजेपी के पास कोई समझ नहीं है।

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