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वकीलों ने सीजेआई को लिखी चिट्ठी- जाति और भाई-भतीजावाद कर कर्नाटक में मुख्य न्यायाधीश ने चुने जज

वकीलों का आरोप है कि जजों के कलीजियम ने जिनका चयन किया है वह उनमें से कई उन्हीं के समुदाय के हैं।

Author January 12, 2017 9:58 AM
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

कर्नाटक के चीफ जस्टिस एसके मुखर्जी की अगुआई में जजों के एक कलीजियम द्वारा कर्नाटक बार असोसिएशन से 9 वकीलों को हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश का मामला विवादों में आ गया है। वकीलों ने इसमें जातिवाद का आरोप लगाया है। वकीलों के एक समूह ने भारत के प्रधान न्यायधीश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कानून मंत्री को पत्र लिखकर नए जजों नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। कर्नाटक अनुसूचित जाति/जनजाति और माइनॉरिटी एडवोकेट्स फेडरेशन के तले वकीलों ने सीजेआई जेएस खेहर ने अनुरोध किया है कि वह कर्नाटक कलीजियम द्वारा चुने गए वकीलों को रद्द करे क्योंकि इनमें से 6 वकील उसी समुदाय के हैं, जहां से जस्टिस मुखर्जी आते हैं। इसके अलावा 3 में से दो वकील हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों के बेटे हैं।

फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि यह न्यायपालिका में जातिवाद, पैरवी और भाई-भतीजेवाद का मामला है। फेडरेशन ने अपने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चयन प्रक्रिया तब शुरू होनी चाहिए जब योग्यता और पारदर्शिता का काम पूरा हो जाए। फेडरेशन ने कर्नाटक के चीफ जस्टिस एसके मुखर्जी को उत्तराखंड में ट्रांसफर करने की मांग भी की, जो पिछले 8 महीने से पेंडिंग है।

उन्होंने दावा किया कि चीफ जस्टिस एसके मुखर्जी, जस्टिस जयंत पटेल और जस्टिस एचजी रमेश के कलीजियम ने बार के 9 वकीलों को चुना है। 9 लोगों में से 6 ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। इस पत्र में उन्होंने नए सीजेआई से कहा कि एडवोकेट्स असोसिएशन अॉफ बेंगलुरु ने भी दिसंबर में कलीजियम की एेसी ही सिफारिश पर सांप्रदायिक कार्रवाई करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि हम इस बारे में कर्नाटक हाई कोर्ट के कलीजियम के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, हमें संवैधानिक संस्था के जातिवादी चयन पर सुप्रीम कोर्ट से जवाब चाहिए।

पत्र के मुताबिक फिलहाल कर्नाटक हाई कोर्ट में 30 जज हैं, 3 जज ब्रह्माण समुदाय से हैं और कलीजियम द्वारा इन नामों का चुना जाना इनके समुदाय की संख्या में इजाफा करेगा। कर्नाटक हाई कोर्ट में 62 जजों के पद हैं, जिनमें से 32 खाली हैं। नवंबर में जिला अदालतों के 5 जजों को अपॉइंट किया गया था।

 

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