कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में कानून के पालन को लेकर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि हाथ-पैर काट दिए जाएं शायद लोग तब कानूनों का पालन करेंगे। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी यौन उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में की।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लोगों द्वारा लापरवाही से अपराध करने की प्रवृत्ति को देखते हुए कहा कि लोग शायद तभी कानून का पालन करेंगे जब आप किसी का पैर या हाथ काट देंगे। 29 मई को एक जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आर नटराज ने मौखिक रूप से कहा, “अगर आप किसी का पैर या हाथ काट देंगे, शायद तभी लोगों को कानून का पालन करना समझ आएगा। हमारे देश में लोकतंत्र है इसलिए हर कोई इसे स्वाभाविक मानता है।”
कानून कमजोर पड़ गया है- कर्नाटक HC
अदालत ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में कथित तौर पर शामिल इंजीनियरिंग के छात्र की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया। जस्टिस नटराज ने आगे कहा, “कानून कमजोर पड़ गया है क्योंकि हम अपराधियों से सख्ती से नहीं निपटते। यही कारण है कि मिडिल ईस्ट के विपरीत, अपराध करना इतना आसान हो गया है।”
जमानत की मांग करते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने कोई अपराध नहीं किया है और वह दो महीने से जेल में है जिससे उसके पेशेवर जीवन को नुकसान होगा। इस पर पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “उसे कुछ और दिनों के लिए जेल में रहने दें अगर निचली अदालत द्वारा दोषी पाया जाता है तो उसे वापस जेल जाना पड़ सकता है।” पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले की आगे की सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तारीख तय की।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी जो उसका सहपाठी था, उस ने कथित तौर पर जुलाई 2023 में उससे अपने प्यार का इज़हार किया जिसे महिला ने स्वीकार कर लिया। 12 सितंबर 2023 को आरोपी ने यह कहते हुए महिला को अपने अपार्टमेंट में साथ चलने के लिए राजी किया कि वह उसे मनाना चाहता है और कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया।
यौन उत्पीड़न के बाद महिला डिप्रेशन में चली गई
यौन उत्पीड़न के बाद शिकायतकर्ता महिला कथित तौर पर डिप्रेशन में चली गई और उसने मणिपाल के एक अस्पताल में इलाज कराया। बाद में वह बेंगलुरु चली गई जहां उसने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दर्ज कराई। मामला पुलिस को सौंपे जाने के बाद, आरोपी 20 मार्च 2026 को पुलिस के समक्ष पेश हुआ और अपना बयान दिया। उसे घर जाने की अनुमति दे दी गई। हालांकि, 4 अप्रैल को महिला ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए दोबारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। निचली अदालत ने 14 मई को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद आरोपी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए 5 नए न्यायाधीश
केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय विधि मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी कर दीं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
