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इजलास में बैठे जज न करें फेसबुक, व्हाटसअप इस्तेमाल, हाईकोर्ट ने जारी किया लिखित निर्देश

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश के अनुसार जारी सर्कुलर में कहा गया है कि किसी भी तरह के चूक को गंभीरता से लिया जाएगा।

Author बेंगलुरु | June 16, 2019 8:00 PM
कर्नाटक हाईकोर्ट की तस्वीर। (Express Photo)

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी कर जजों को निर्देश दिया कि वे इजलास पर बैठने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करें। हाईकोर्ट ने जजों को कोर्ट के दौरान अपने व्यक्तिगत या यहां तक कि आधिकारिक संचार के लिए व्हाट्सएप, फेसबुक, स्काइप आदि जैसे सोशल मीडिया एप्प का उपयोग करने से मना करने का भी निर्देश दिया है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश के अनुसार जारी सर्कुलर में कहा गया है कि किसी भी तरह के चूक को गंभीरता से लिया जाएगा। सर्कुलर में लिखा है, “राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे इजलास पर बैठकर किसी भी प्रकार से मोबाइल फोन का उपयोग न करें और न हीं फेसबुक, वाट्सएप, स्काइप जैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें। कोर्ट में कार्य के दौरान आधिकारिक और निजी किसी भी काम के लिए ऐसा न करें। किसी भी चूक को गंभीरता से देखा जाएगा।”

बता दें कि एक दिन पहले दिल्ली विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष के.सी. मित्तल ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर भारतीय विधिज्ञ परिषद (बार काउंसिल ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को शुक्रवार को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने हाल ही में आगरा में उत्तर प्रदेश विधिज्ञ परिषद की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरवेश सिंह यादव की हत्या के मामले का उल्लेख करते हुए उनसे अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कानून बनवाने और सुरक्षा संबंधी समुचित उपायों के लिए पहल करने की अपील की है।

मित्तल ने कहा कि अदालत के परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि वकील अपनी सुरक्षा संबंधी समुचित उपाय किये जाने और ‘‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’’ को लागू किये जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं समझ सकता हूं कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में इसके लिए कदम उठाये गये हैं, लेकिन अन्य जगहों पर ऐसे कदम उठाये जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया सकता क्योंकि इससे अदालत का समूचा कामकाज पूरी तरह से प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुये अदालत के सुचारू संचालन के लिए वकीलों की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था किये जाने की जरुरत है। उन्होंने मिश्रा से इस मामले को भारत के प्रधान न्यायाधीश, गृह मंत्री और विधि व न्याय मंत्री के समक्ष उठाते हुए सभी अदालतों के भीतर और बाहर अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। (भाषा इनपुट के साथ)

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