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कर्नाटक में कभी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई हैं गठबंधन की सरकारें, 1983 से तोड़-फोड़ का रहा है इतिहास

कर्नाटक में पहली गठबंधन सरकार साल 1983 में बनी थी। उस वक्त जनता पार्टी 95 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

Author नई दिल्ली | July 8, 2019 9:41 PM
कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी। (file pic)

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार पर संकट के बादल छाए हैं। सरकार के 13 विधायकों ने शनिवार को विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद गठबंधन सरकार पर अल्पमत हो जाने का खतरा बढ़ गया है। वहीं विपक्षी पार्टी भाजपा भी इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में लग रहा है कि शायद कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार अपना कार्यकाल पूरा ना कर सके। हालांकि राजनैतिक विश्लेषकों के लिए यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। दरअसल कर्नाटक की राजनीति के इतिहास में कभी भी गठबंधन सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी है। मौजूदा हालात को देखकर लग रहा है कि कांग्रेस-जेडीएस सरकार भी इसकी अपवाद नहीं रहेगी।

क्या रहा है कर्नाटक में चुनाव बाद गठबंधन सरकारों का इतिहास: कर्नाटक में पहली गठबंधन सरकार साल 1983 में बनी थी। उस वक्त जनता पार्टी 95 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा और लेफ्ट पार्टियों ने जनता पार्टी को समर्थन दिया और इस तरह रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बन गई। हालांकि अगले ही साल हुए लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी का प्रदर्शन बेहद बुरा रहा और पार्टी सिर्फ 4 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। इस पर हेगड़े ने कहा कि पार्टी के पास जनता का समर्थन नहीं है और उन्होंने लोकसभा चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेते हुए गठबंधन सरकार को भंग कर दिया।

गठबंधन सरकार का दूसरा मौका साल 2004 में आया, जब कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव बाद गठबंधन किया और धरम सिंह सीएम बने। सरकार गठन के 2 साल से भी कम समय में जेडीएस दो फाड़ हो गई। इसके बाद जेडीएस के एक धड़े ने एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में भाजपा से गठबंधन कर सरकार बनायी। बताया जाता है कि गठबंधन के तहत तय हुआ था कि 20 माह कुमारस्वामी सीएम रहेंगे और बाद के 20 माह भाजपा के येदियुरप्पा सीएम पद संभालेंगे। लेकिन कुमारस्वामी ने 20 माह सीएम रहने के बाद सरकार गिरा दी थी, जिससे येदियुरप्पा सीएम नहीं बन सके थे।

अब तीसरी बार राज्य में मौजूदा गठबंधन सरकार सत्ता में आयी है, लेकिन सरकार गठन के बाद से ही कर्नाटक की राजनीति में रस्साकशी का दौर चल रहा है। दरअसल बीते विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से दूर रही। इस पर कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर सत्ता पर कब्जा कर लिया और कम सीटें होने के बावजूद कांग्रेस ने जेडीएस को सीएम पद दे दिया था।

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