बेंगलुरु में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से रह रहे प्रवासियों की पहचान करने के लिए पुलिस ने वेरिफिकेशन ड्राईव चलाई हुई है। इसके तहत शनिवार को शहर के इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीन में 20 और व्हाइटफील्ड डिवीजन में 4 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया।
शहर भर में चलाए जा रहे ऑपरेशन मुक्ता के तहत, इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन में पुलिस टीमों ने 29 जगहों पर 1909 लोगों की जांच की। इस ऑपरेशन के लिए कुल 23 टीमें और 295 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सिटी में बिना वैध वीजा या कागजात के रह रहे 20 बांग्लादेशी नागरिक पड़ोसी देश के बागेरहाट और खुलना जिलों के रहने वाले हैं।
एफआरआरओ को भेजी जा रही
वेरिफिकेशन के दौरान पहचान पत्र, पासपोर्ट, वीजा और अन्य कागजात की जांच की गई। विदेशी नागरिकों के तौर पर पहचाने गए लोगों की जानकारी आगे की कार्रवाई के लिए एफआरआरओ को भेजी जा रही है। इसमें प्रक्रिया के अनुसार उन्हें वापस उनके देश भेजना भी शामिल है।
व्हाइटफील्ड डिवीजन में भी अभियान चलाया गया, जहां 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने 30 से अधिक स्थानों की जांच की। पुलिस ने बताया कि सत्यापन के लिए लगभग 40 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से चार बांग्लादेशी नागरिक पाए गए। बाकी लोगों का सत्यापन जारी है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ विदेशी नागरिकों की पहचान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें यह भी जांचा जा रहा है कि वे देश में कैसे आए और क्या उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से भारतीय पहचान पत्र हासिल किए हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम मकान मालिकों, बिल्डरों और उन अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं जिन्होंने विदेशी नागरिकों को बिना सही कागजात के रहने में मदद की होगी। उन्हें किरायेदारों और कामगारों की पहचान और नागरिकता से जुड़े कागजात की जांच करने के लिए कहा गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि पूछताछ किए गए लोगों में से कई निर्माण कार्य करने वाले और दिहाड़ी मजदूर हैं।
अधिकारियों ने कहा कि वेरिफिकेशन के दौरान हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिकों को उनकी पहचान स्थापित होने के बाद जाने की अनुमति दी जाएगी, जबकि बिना अनुमति के रहने वाले विदेशी नागरिकों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए एफआरआरओ को सौंप दिया जाएगा।
अलग-अलग समूहों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की
इस बीच, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस, डोमेस्टिक वर्कर्स राइट्स यूनियन और ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ने कर्नाटक के गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक और बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। इसमें अभियान के दौरान प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों की अवैध हिरासत, मारपीट और अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
अपनी शिकायत में संगठनों ने आरोप लगाया कि पुलिस टीमों ने बेंगलुरु के कई इलाकों में बस्तियों में प्रवेश किया और पहचान पत्र दिखाने के बावजूद महिलाओं और बच्चों सहित लोगों को हिरासत में लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ हिरासत में लिए गए लोगों की पिटाई की गई, उनके फोन जब्त कर लिए गए और उनके मैसेज और कॉल रिकॉर्ड की जांच की गई।
उन्होंने आगे दावा किया कि कई लोगों को केवल वेरिफिकेशन के लिए हिरासत में लिया गया था और कुछ को उनके कॉल रिकॉर्ड में पाए गए अंतरराष्ट्रीय नंबरों के आधार पर एफआरआरओ को भेज दिया गया था।
इन समूहों ने कहा, “भाषा, धर्म, रहने की जगह या कॉल रिकॉर्ड में इंटरनेशनल फोन नंबर होने के आधार पर किसी को विदेशी नागरिक नहीं माना जा सकता।” उन्होंने इस ऑपरेशन की स्वतंत्र जांच, कथित तौर पर घायल हुए लोगों के इलाज, जिम्मेदार पाए गए कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए गए या मारपीट का शिकार हुए लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है।
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