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कांग्रेस के लिए नया नहीं है कर्नाटक और गोवा का संकट, इन राज्यों में भी पार्टी को लग चुका है बड़ा झटका

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी साल 2016 में ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। दरअसल 2016 में भाजपा के 26 विधायकों और कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने गवर्नर से मिलकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की मांग की थी।

Author नई दिल्ली | July 12, 2019 3:05 PM
लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद अब कई राज्यों में भी कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल छाए हैं। (PTI Photo/Atul Yadav)

आम चुनावों में करारी हार के बाद अब कांग्रेस को कई राज्यों में भी संकट का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला कर्नाटक और गोवा का है। कर्नाटक की बात करें तो पिछले कई दिनों से वहां राजनैतिक रस्साकशी का दौर चल रहा है। दरअसल कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के 13 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई है और सरकार के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं गोवा में भी कांग्रेस के 15 विधायकों में से 10 ने भाजपा का दामन थाम लिया है। पिछले काफी समय से गोवा की सत्ता में आने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है। हालांकि रेडिफ डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कांग्रेस के लिए यह कोई पहली स्थिति नहीं है, बल्कि पार्टी इससे पहले भी 5 बार अलग-अलग राज्यों में ऐसे ही मिलते जुलते संकट में फंस चुकी है।

अरुणाचल प्रदेशः साल 2015-16 में अरुणाचल प्रदेश में भी राजनैतिक रस्साकशी का दौर देखने को मिला था। दरअसल विधानसभा स्पीकर नबाम रेबिया ने कांग्रेस के 21 में से 14 विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के आरोप में विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया था। जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने अपने आदेश में 13 जुलाई, 2016 को कांग्रेस सरकार को फिर से बहाल करने को कहा। इस पर राज्यपाल तथागत रॉय ने कांग्रेस सरकार से फिर से बहुमत साबित करने को कहा। जिस दिन कांग्रेस सरकार को बहुमत साबित करना था उससे कुछ घंटे पहले ही सीएम नबाम तुकी ने अपना इस्तीफा दे दिया। जिस पर राज्य की कमान बागी विधायक पेमा खांडू को मिल गई।

इस घटना के कुछ दिन बाद ही पेमा खांडू ने कांग्रेस से इस्तीफ दे दिया और उनके साथ पार्टी के अन्य 43 विधायकों ने भी पार्टी छोड़कर पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल ज्वाइन कर ली। इसके एक माह बाद ही खांडू अपने सहयोगियों के साथ भाजपा में शामिल हो गए और इस तरह उत्तरी पूर्वी राज्य अरुणाचल की सत्ता में भाजपा का कब्जा हो गया।

उत्तराखंडः पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी साल 2016 में ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। दरअसल 2016 में भाजपा के 26 विधायकों और कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने गवर्नर से मिलकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की मांग की थी। तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। कोर्ट के आदेश पर विधानसभा में विश्वासमत कराया गया, जिसे हरीश रावत ने साबित कर दिया। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को बर्खास्त कर दिया गया और इस तरह राज्य में कांग्रेस सरकार का संकट टला।

मणिपुरः उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर भी साल 2016 में ही राजनैतिक उथल-पुथल का गवाह बना था। दरअसल कांग्रेस नेता बीरेन सिंह ने सीएम इबोबी सिंह और पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी थी। मार्च, 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस ने 60 सदस्यों वाली विधानसभा में 21 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद नागा पीपल्स फ्रंट और नेशनल पीपल्स फ्रंट के 4-4 विधायकों के समर्थन से सत्ता में आ गए। बाद में 8 कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था।

गुजरातः 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में राज्य में पिछड़े वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस का समर्थन किया था। जिसके चलते कांग्रेस राज्य में भाजपा को कड़ी टक्कर दे पायी थी। हालांकि अब अल्पेश ठाकोर कांग्रेस से नाराज बताए जा रहे हैं और माना जा रहा है कि जल्द ही वह भाजपा का दामन थाम सकते हैं और इतना ही नहीं कांग्रेस के 15 विधायक भी अल्पेश के समर्थन में कांग्रेस छोड़ सकते हैं।

महाराष्ट्रः राज्य में कांग्रेस के वरिष्ठ और कद्दावर नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल हाल ही में भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनसे पहले पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। सुजय विखे पाटिल जहां भाजपा के टिकट पर अहमदनगर दक्षिण सीट से सांसद हैं, वहीं राधाकृष्ण विखे पाटिल को भी फडणवीस सरकार में आवासीय मंत्री बनाया जा चुका है। राधाकृष्ण विखे पाटिल के अलावा अन्य कांग्रेसी विधायक अब्दुल सत्तार भी भाजपा में जा चुके हैं। सत्तार का दावा है कि जल्द ही कांग्रेस के 10 अन्य विधायक भी भाजपा में जा सकते हैं।

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