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कर्नाटक रण की इनसाइड स्टोरी: चार्टर्ड विमान भेज सिंघवी को चंडीगढ़ से बुलवाया और…

कर्नाटक कांग्रेस के बड़े नेता जैसे केजे जॉर्ज, डीके सुरेश कुमार, आर ध्रुवनारायण, एमपी पाटिल को इस ऑपरेशन की कमान सौंप दी गई। जब विधायकों को लगातार फोन आने लगे, तो उन्हें एक एप डाउनलोड करने को कहा गया। इस एप पर सारे कॉल रिकॉर्ड किये जा सकते थे।

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कर्नाटक के रण में बीजेपी को शिकस्त देने के लिए कांग्रेस 14 से 19 मई तक कई मोर्चों पर एक साथ सक्रिय थी। इस सियासी लड़ाई का रणक्षेत्र तो बेंगलुरु था, लेकिन इसके लिए किलेबंदी दिल्ली से हो रही थी। मतगणना से एक दिन पहले ही दिल्ली में राहुल गांधी अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत और के सी वेणुगोपाल से मिले थे। सूत्र बताते हैं कि पार्टी को पहले से अंदाजा था कि कर्नाटक में क्या होने वाला है। इसी मीटिंग में तय कर लिया गया कि अगर कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलता है तो जेडीएस को बिना शर्त समर्थन कर दिया जाना चाहिए। 14 मई की सुबह को ही इस संदेश को जेडीएस आलाकमान के पास भेज दिया गया। कांग्रेस के सभी पांच सचिवों मनिका टैगोर, पीसी विष्णुनाथ, मधु याशकी गौड, सेक सैलजानाथ और यशोमति ठाकुर को मतगणना के दिन एक क्षेत्र विशेष में रहने को कहा गया। काउंटिंग के दिन जैसे ही यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलने वाला है, सभी सचिवों को कहा गया कि वे जीतने वाले सभी विधायकों से संपर्क करें और उन्हें बेंगलुरु आने को कहें।

15 मई तो चुनाव नतीजों की खुमारी में गुजर गया। ड्रामा शुरू हुआ 16 मई को। दिल्ली और बेंगलुरु में एक साथ। जैसे ही कांग्रेस को लगा कि बीएस येदियुरप्पा सरकार बनाने के लिए राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलने वाले हैं, पार्टी ने तय कर लिया कि एक जोरदार कानूनी लड़ाई लड़नी होगी और सुप्रीम कोर्ट जाना होगा। लेकिन यहां एक समस्या थी। कांग्रेस की ओर से कानूनी मोर्चा संभालने वाले अभिषेक मनु सिंघवी चंडीगढ़ में थे। सिंघवी के फोन लगातार घनघनाने लगे। इन्हें अहमद पटेल और सुरजेवाला लगातार कॉल कर रहे थे। राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने के लिए फोन पर ही पहला ड्राफ्ट तय किया गया। कर्नाटक के बड़े कांग्रेस नेता एमबी पाटिल से भी संपर्क किया गया। वह कर्नाटक में कानूनी पेचीदिगियों को देख रहे थे। सिंघवी ने भी अपने जूनियर वकीलों से इस बारे में चर्चा की। उन्होंने देवदत्त कामत की मदद ली, जिन्होंने उन्हें उत्तराखंड केस में मदद की थी।

सिंघवी को बैरंग दिल्ली आने को कहा गया। लेकिन तबतक चंडीगढ़ एयरपोर्ट बंद हो चुका था। अगर वह ट्रेन से आते तो वो दिल्ली आधी रात को पहुंच पाते। इसके बाद सिंघवी को पिंजौर से दिल्ली लाने का फैसला किया गया। तुरंत एक चार्टर्ड फ्लाइट भेजा गया। शाम 4.30 बजे सिंघवी इसमें बैठे,  6.30 बजे वो दिल्ली में थे। वह सीधे 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड़ स्थित कांग्रेस के वार रूम में पहुंचे। यहां पर कांग्रेस के कई योद्धा पहले से ही कर्नाटक विजय की रणनीति पर काम कर रहे थे। इनमें पी चिदंबरम, रणदीप सुरजेवाला, विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल शामिल थे। यहां सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन के ड्राफ्ट को फाइनल किया गया।

कांग्रेस ने पहले तो ये तय किया था कि सुप्रीम कोर्ट से अपील की जाए कि वो राज्यपाल को कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुलाने को कहे। हालांकि कांग्रेस नेता यह भी जानते थे कि राज्यपाल येदियुरप्पा को सरकार बनाने के बुलाने वाले हैं। लिहाजा कांग्रेस ने एक दूसरे कानूनी विकल्प पर भी चर्चा की। 9.30 बजे रात को पूरे पिटीशन को तब फिर से लिखना पड़ा जब राज्यपाल ने येदियुरप्पा को शपथग्रहण के लिए बुला लिया और बीजेपी की ओर से घोषणा की गई कि येदियुरप्पा 17 मई को सुबह 9 बजे सीएम पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस के एक नेता कहते हैं, “ये बीजेपी ही थी जिसकी वजह से हमें ऐन मौके पर क्या करना चाहिए इसका आइडिया मिल गया, अगर बीजेपी 9 बजे सुबह शपथग्रहण की बात नहीं करती तो हम अपना कानूनी दांव-पेंच तैयार नहीं कर पाते।”

10 बजे रात के बाद कामत और दूसरे जुनियर वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और लगभग आधी रात को सिंघवी अपने जूनियर वकीलों के साथ अपने नीति बाग घर को छोड़ सुप्रीम कोर्ट के नजदीक पहुंच चुके थे। वे लोग ताज मानसिंह होटल के मचान रेस्तरां में थे। रात 1.45 मिनट पर सभी कोर्ट पहुंचे। इस दौरान बेंगलुरु में भी एक हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायकों को बीजेपी नेताओं और सियासी लाइजनर्स से पाला बदलने के लिए लगाातार फोन आ रहे थे। इस बीच कांग्रेस विधायकों को ईगलटन रिजॉर्ट लेकर चली गई। इस बीच कांग्रेस ने सभी विधायकों को 10-10 के समूह में बांट दिया। हर ग्रुप पर बाज जैसी निगाह रखने के लिए एक वरिष्ठ नेता को नियुक्त किया गया। उन पर कांग्रेस नेताओं का ज्यादा ध्यान था, जो टूट सकते थे।

कर्नाटक कांग्रेस के बड़े नेता जैसे केजे जॉर्ज, डीके सुरेश कुमार, आर ध्रुवनारायण, एमपी पाटिल को इस ऑपरेशन की कमान सौंप दी गई। जब विधायकों को लगातार फोन आने लगे, तो उन्हें एक एप डाउनलोड करने को कहा गया। इस एप पर सारे कॉल रिकॉर्ड किये जा सकते थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “विधायकों को कई तरह के ऑफर मिल रहे थे, कई लोगों को कहा गया, रिजॉर्ट के बाहर आ जाओ, वहां एक कार तुम्हार इंतजार कर रही होगी, उसके अंदर पांच करोड़ रुपये हैं।” इस नेता ने कहा, “अभी तो हमने रिकॉर्डेड कॉल्स का दसवां भाग भी जारी नहीं किया है।”

विधायकों पर लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए इन्हें कोच्चि ले जाने का फैसला किया गया। पार्टी के एक मैनेजर ने कोच्चि में एक फाइव स्टार होटल को संपर्क किया। ये होटल पहले तो कांग्रेस विधायकों को रखने पर राजी हो गया, लेकिन दो घंटे में ये होटल मुकर गया, होटल का कहना था कि उस पर बीजेपी का दवाब है। कोच्चि में दूसरे होटल से बात की गई, लेकिन तब तक ये प्लान भी कैंसिल करना पड़ा। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि विधायकों को ले जाने वाली चार्टर्ड फ्लाइट के परमिशन को डीजीसीए ने ऐन मौके पर कैंसिल कर दिया। हालांकि डीजीसीए इससे इनकार करता है। इसके बाद विधायकों को सड़क से हैदराबाद ले जाया गया।

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