कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई कांग्रेस सरकार बनी है। 3 जून को डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का 2 साल का कार्यकाल बाकी है। इससे पहले कांग्रेस के सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे। डीके शिवकुमार के साथ जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री और अन्य 12 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है।

कर्नाटक में 2028 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कर्नाटक में एक तरीके से 12 विधायकों को मंत्रिमंडल में फिर से शामिल किया गया है, जबकि यतींद्र सिद्धारमैया नए मंत्री के रूप में शामिल हुए हैं। यतींद्र, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे हैं।

किस समाज के कितने मंत्री?

डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल में चार अनुसूचित जाति से आने वाले विधायकों को मंत्री बनाया गया है। वहीं तीन लिंगायत विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इसके अलावा दो कुरूबा और एक-एक मुस्लिम, वोक्कालिगा, रेड्डी और ईसाई समुदाय से आने वाले विधायकों को मंत्री बनाया गया है। अनुसूचित जाति से आने वाले जी परमेश्वर को कर्नाटक का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

निशाने पर बीजेपी का वोटबैंक?

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा है और लगभग सभी निर्णायक जातियों को मंत्रिमंडल में जगह दी है। हालांकि सबसे अहम लिंगायत समाज से आने वाले तीन विधायकों को डीके शिवकुमार ने मंत्री बनाया है। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की आबादी करीब 17 फीसदी है और यह बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि डीके शिवाकुमार वोक्कालिग के साथ लिंगायत समाज को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।

कर्नाटक में लिंगायत प्रभावशाली समुदाय माना जाता है। लिंगायत समुदाय बीजेपी का कोर वोट बैंक भी है। डीके शिवकुमार ने उसमें सेंध लगाने का प्रयास किया है। इस समुदाय से आने वाले एमबी पाटील, ईश्वर खंडरे और शरण प्रकाश पाटिल को मंत्री बनाया गया है। ऐसे में डीके शिवाकुमार का संदेश साफ है कि वह लिंगायत समाज को भी अपने साथ जोड़ना चाहते हैं।

4 दलितों को जगह

इससे पहले सिद्धारमैया सरकार में जी परमेश्वर मंत्री थे और उनके पास गृह जैसा महत्वपूर्ण विभाग था। वहीं केएच मुनियप्पा, प्रियांक खड़गे और सतीश जारकीहोली जैसे अनुसूचित जाति से आने वाले नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। तीनों ही नेता सिद्धारमैया सरकार में भी मंत्री थे।

वोक्कालिगा समाज से एक मंत्री

कर्नाटक की एक और प्रभावशाली जाति वोक्कालिगा समुदाय से कृष्णा बायरेगौड़ा को मंत्री बनाया गया है। वहीं डीके सुकुमार खुद वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। वोक्कालिगा समुदाय कर्नाटक की आबादी का करीब 12 फीसदी हिस्सा है। पहले यह जीडीएस का कोर वोट बैंक था, लेकिन इसमें कांग्रेस ने काफी हद तक सेंध लगा दी है। शिवकुमार का प्रभाव बढ़ा है, ऐसे में जीडीएस का वोट बैंक खतरे में है।

2 अल्पसंख्यक मंत्री

अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले दो विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। मुस्लिम समाज से आने यूटी खादर जबकि ईसाई समुदाय से आने वाले केजे जॉर्ज को डीके शिवकुमार ने मंत्री बनाया है। कर्नाटक में मुसलमानों की आबादी करीब 14 फीसदी है जबकि ईसाई समुदाय की आबादी 1.8 फीसदी है।

कुरुबा समाज से 2 विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह

कर्नाटक में कुरुबा समाज ओबीसी वर्ग में आता है। इस समाज से आने वाले दो विधायकों को मंत्री बनाया गया है। यतींद्र सिद्धारमैया और बायराथी सुरेश को मंत्री बनाया गया है। दोनों ही नेता कुरुबा समुदाय से आते हैं। यतींद्र पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे हैं।

डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल में रामलिंगा रेड्डी को भी जगह मिली है। रामलिंगा रेड्डी सामान्य वर्ग से आते हैं। रेड्डी समुदाय के लोग आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी अच्छी संख्या में है।

(यह भी पढ़ें- सिद्धारमैया ने जाते-जाते कर दिया ‘खेला’)

सिद्धारमैया ने एक बड़ा दांव चला। उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ‘सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट’ को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। सिद्धारमैया इस रिपोर्ट को स्वीकार कर अपने ‘अहिंदा’ वोट बैंक को और मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर