कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष ने नए मंत्री बने बी नागेंद्र के इस्तीफे का मांग को लेकर सोमवार को बाधित रही। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने विधानसभा में कहा कि पिछली सरकार ने माना था कि इस घोटाले में कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से 94 करोड़ रुपये का गबन किया गया था।

बी. नागेंद्र को वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के कारण सिद्धारमैया कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था।

‘सरकार को जवाब देना चाहिए?’

आर. अशोक ने कहा, “अब, यदि उन्हें फिर से मंत्री बनाया जाता है, तो सदन की गरिमा कैसे बनी रहेगी? उन्हें पहले क्यों हटाया गया था? उन्हें फिर से क्यों शामिल किया जा रहा है? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि जब तक नागेंद्र को हटाया नहीं जाता, तब तक बीजेपी 27 अगस्त को खत्म हो रहे मॉनसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही नहीं चलने देगी।

‘सदन के लिए क्या कोई नियम नहीं हैं?’

इससे पहले, जब विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने प्रश्नकाल शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की, तो भाजपा विधायक सुनील कुमार ने बीच में टोकते हुए पूछा कि विपक्ष एक “दागी, भ्रष्ट मंत्री” (नागेंद्र का जिक्र करते हुए) से जवाब कैसे पा सकता है। उन्होंने कहा, “पहले उनका इस्तीफा मांगिए।” इस पर सत्ता पक्ष ने सुनील कुमार की बातों पर आपत्ति जताई और जीएस पाटिल ने अशोक से पूछा, “आपने मुझे (इस विषय पर चर्चा के लिए) कोई नोटिस नहीं दिया है। क्या सदन के लिए कोई नियम नहीं हैं?”

बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ उठाया और कहा कि नागेंद्र पर लगाए गए आरोप सदन के नियमों का उल्लंघन करते हैं; साथ ही उन्होंने स्पीकर से इस पर फैसला देने को कहा।

बीजेपी विधायकों ने की नारेबाजी

इसके बाद बीजेपी विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कांग्रेस पर वाल्मीकि समुदाय के साथ धोखा करने का आरोप लगाया, जबकि जीएस पाटिल ने अशोक से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर चर्चा करने से पहले नोटिस दें।

जब BJP विधायक अपनी बात पर अड़े रहे, तो स्पीकर ने सदन की कार्यवाही लंच के लिए स्थगित कर दी। लंच के बाद के सेशन में भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहा, जिसके बाद, स्पीकर ने दिन भर के लिए सदन स्थगित करने से पहले प्रश्नकाल शुरू किया।

हाईकमान भी शामिल है- भाजपा एमएलसी

विधान परिषद में भी ऐसे ही हालात देखने को मिले। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए, भाजपा एमएलसी सी.टी. रवि ने आरोप लगाया कि अगर कांग्रेस ने किसी मंत्री को हटाने और फिर से शामिल करने का फैसला किया है, तो “इसका मतलब है कि हाईकमान भी (घोटाले में) शामिल है”। रवि ने कहा कि कांग्रेस ने नागेंद्र को मंत्री बनाकर अनुसूचित जनजाति समुदाय के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि जब तक नागेंद्र को हटाया नहीं जाता, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।

सिद्धारमैया ने सदन में माना था कि घोटाला हुआ- विधायक

इधर बीजेपी नेता अरविंद बेलाड ने मामले पर कहा, “मांग बहुत स्पष्ट है। वाल्मीकि समुदाय के उत्थान के लिए बनाई गई संस्था, वाल्मीकि कॉर्पोरेशन में 189 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सदन में माना था कि घोटाला हुआ है। साफ सबूत हैं कि ये पैसे कांग्रेस हाईकमान को भेजे गए और बेल्लारी उपचुनाव में इस्तेमाल हुए। इसी वजह से तत्कालीन मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा लिया गया। बाद में उन्हें जेल भी भेजा गया। 24 तारीख से अब तक हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। हम विरोध कर रहे हैं, इतने सारे घोटालों के बावजूद, सरकार के पास विधानसभा चलाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

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