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कर्नाटक विधानसभा स्पीकर की एक्टिंग के सामने फेल है बीजेपी विधायकों की नौटंकी, जानें क्यों?

कुमार साइंस ग्रैजुएट हैं, जो कि लॉ की डिग्री नहीं पूरी कर पाए थे। 1978 में उन्होंने राजनीतिक करिअर की शुरुआत की और तब वह कांग्रेस के टिकट पर कोलर जिले में श्रीनिवासपुरा विस सीट से पहला चुनाव जीते थे।

Karnataka, Assembly, BJP, Congress, Congress-JD(S) Alliance, Karnataka, Ramesh Kumar, Speaker, State News, Hindi News, National News, India News, Hindi News, Jansatta Newsकर्नाटक विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार। (फोटोः पीटीआई)

कर्नाटक में सियासी ड्रामा फिलहाल खत्म नहीं हुआ है। विधानसभा सोमवार (22 जुलाई, 2019) तक के लिए स्थगित है, जबकि गुरुवार व शुक्रवार को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली जेडी(एस)-कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार की मुश्किल बढ़ाने के लिए सदन में बीजेपी विधायकों की नौटंकी देखने को मिली। फ्लोर टेस्ट अटकने पर उन्होंने सदन में तकिया-चादर के साथ सोकर दिखाया, जबकि सीएम के भाई के नंगे पांव असेंबली में आने पर चर्चा काला जादू और टोटके तक पहुंच आई।

इस सब के बीच, कर्नाटक विधानसभा स्पीकर की एक्टिंग के आगे बीजेपी विधायकों की नौटंकी फेल है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दो बार स्पीकर रहने के अलावा वह टेलीविजन सीरियल एक्टर भी रहे हैं और उनके लिए ड्रामा-नौटंकी जैसी चीजें नई हैं, जबकि मौजूदा समय में वह कर्नाटक के इस सियासी ड्रामे में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कुमार, तेज तर्रार व्यक्तित्व और हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं। एक्टिंग की बात करें तो टीवी सीरियल्स में वह कई राजनेताओं के किरदार में दिख चुके हैं। सदन के बीच-बीच में भी वह कुछ पंच लाइन्स का इस्तेमाल कर जाते हैं। ऐसे ही अलंकारों का इस्तेमाल कर वह विवाद को भी जन्म दे चुके हैं। मसलन उनका ‘रेप पीड़ित’ वाला बयान ही ले लीजिए।

दरअसल, फरवरी 2019 में कुमार से सदन में बार-बार उन पर लगे आरोपों (ऑडियो टेप मामले में) को लेकर सवाल किए जा रहे थे, जिस पर उन्होंने खुद को रेप पीड़ित करार दे दिया था। बकौल कुमार, “मेरी स्थिति तो रेप पीड़ित जैसी हो गई है, क्योंकि ये बार-बार उस घटना के बारे में मुझसे सवाल किए जा रहे हैं।”

कुमार साइंस ग्रैजुएट हैं, जो कि लॉ की डिग्री नहीं पूरी कर पाए थे। 1978 में उन्होंने राजनीतिक करिअर की शुरुआत की और तब वह कांग्रेस के टिकट पर कोलर जिले में श्रीनिवासपुरा विस सीट से पहला चुनाव जीते थे। वैसे बीच में उन्होंने कई पार्टियां भी बदलीं और जनता पार्टी होते हुए जनता दल के टिकट पाए, 1999 में वह कांग्रेस में लौट आए।

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