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करगिल लड़ाई में बाल-बाल बचे थे नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ, भारत की बमबारी में जा सकती थी जान

इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के अनुसार व्यापक प्रतिक्रिया के डर से अभी तक इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

Author July 24, 2017 1:50 PM

दिन गुरुवार, तारीख 24 जून 1999, वक्त सुबह के करीब 8.45 बजे। कारगिल का युद्ध अपने चरम पर था। भारतीय वायु सेना के एक जगुआर ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के ऊपर उड़ान भरी। उसका मकसद पाकिस्तानी सेना के एक अग्रिम ठिकाने पर “लेजर गाइडेड सिस्टम” से बमबारी करने लिए टारगेट को चिह्नित करना था। उसके पीछे आ रहे दूसरे जगुआर को बमबारी करनी थी। लेकिन दूसरा जगुआर निशाना चूक गया और उसने “लेजर बॉस्केट” से बाहर बम गिराया जिससे पाकिस्तानी ठिकाना बच गया। इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के अनुसार ठीक उसी समय जब भारतीय विमान पाकिस्तानी ठिकाने पर निशाना लगा रहा था उस ठिकाने पर पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ मौजूद थे। उस हादसे पर व्यापक प्रतिक्रिया के डर से अभी तक इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

भारत सरकार के इस दस्तावेज में लिखा है, “24 जून को जगुआर एसीएलडीएस ने प्वाइंट 4388 पर निशाना साधा। पायलट ने एलओसी के पार गुलटेरी को लेजर बॉस्केट में चिह्नित किया लेकिन बम सही निशाने पर नहीं गिरा क्योंकि उसे लेजर बॉस्केट से बाहर गिराया गया था।” इस दस्तावेज में मोटे अक्षरों में लिखा है कि “बाद में इस बात की पुष्टि हुई कि हमले के समय पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ उस समय गुलटेरी ठिकाने पर मौजूद थे।” दस्तावेज के अनुसार जब पहले जगुआर ने निशाना साधा तब तक ये खबर नहीं थी कि वहां पाकिस्तानी पीएम शरीफ और मुशर्रफ मौजूद हैं। हालांकि एक एयर कमाडोर जो उस समय एक उड़ान में थे ने पायलट को बम न गिराने का निर्देश दिया जिसके बाद बम को एलओसी के निकट भारतीय इलाके में गिरा दिया गया।

कारगिल युद्ध में गुलटेरी सैन्य ठिकाना पाकिस्तानी सेना को रसद और सैन्य साजो-सामान पहुंचाने वाला अग्रिम ठिकाना था। गुलटेरी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एलओसी से नौ किलोमीटर अंदर है। ये ठिकाना भारत के द्रास सेक्टर के दूसरी तरफ स्थित है। 24 जून को पहली बार नवाज शरीफ परवेज मुशर्रफ के साथ सैन्य ठिकाने पर गए थे। पाकिस्तानी अखबार द न्यूज के 25 जून 1999 के संस्करण में शरीफ का बयान छपा कि “युद्ध किसी मसले का हल नहीं है।” अखबार ने लिखा कि पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने 24 जून (1999) को भारत के साथ बातचीत पर ताकि एलओसी पर युद्ध जैसी स्थिति से बचा जा सके। अखबार के अनुसार शरीफ ने भारत सरकार को कश्मीर समेत सभी मसलों पर बातचीत की दावत देने की भी बात कही थी।

रिटायर हो चुके एयर मार्शल विनोद पटनी कारगिल युद्ध में भारतीय वायु सेना के वेस्टर्टन एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ थे। कारगिल युद्ध में हवाई हमलों की निगरानी वही कर रहे थे। पाण्डेय ने इंडियन एक्सप्रेस को 24 जून 1999 की घटना के बारे में बताया, “मशकोह घाटी में लॉजिस्टिक डम्प देखा गया था। पहले जगुआर को जब अचानक ही संदेह हुआ तो उनसे दूसरे को बमबारी न करने का निर्देश दिया, वापस आकर उसने वीडियो में देखा कि वो जिसे निशाने बनाने जा रहे थे वो गुलटेरी था।” एयर मार्शल पटनी ने कहा कि उस समय “न तो मुझे पता था न मुझे सूचित किया गया था” कि गुलटेरी में शरीफ मौजूद हैं। पटनी कहते हैं, “वैसे भी गुलटेरी पर हमला नियम विरुद्ध था।”  तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय वायु सेना को भारतीय इलाके में ही कार्रवाई का निर्देश दिया था।

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