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कारगिल के 20 साल: कैप्टन सौरभ कालिया को सिगरेट से दागा, आंखें निकालीं, नाखून उखाड़े, दांत तोड़े, चेहरा बिगाड़ा फिर गोली मारी- आज भी लड़ रहे पिता

शहीद कैप्टन कालिया के शरीर को सिगरेट से दागा गया, आंखें निकालीं गई, नाखून उखाड़े गए, दांत तोड़े गए, चेहरा बिगाड़ दिया गया इसके बाद फिर उन्हें गोली मारी गई। जब उनका शरीर 22 दिनों के बाद भारत वापस आया तो परिवार वाले उन्हें पहचान तक नहीं पा रहे थे।

Kargil Vijay Diwas, Capt saurabh Kalia, modi government, iaf, wing commander Abhinandan, Abhinandan, kargil war, pakistan, indian armyपिता को आज भी है इंसाफ का इंतजार। फोटो: (Express photo/ Gurmeet Singh)

कारगिल विजय की 20वीं सालगिराह पर देश की जवानों के बलिदान की चर्चा है। भारत ने 20 साल पहले पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में धूल चटाई थी। भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन इस युद्ध में शामिल एक शहीद जवान के पिता आज भी मजबूर हैं। वह अपने बेटे कैप्टन सौरभ कालिया को इंसाफ न दिला पाने के लिए खुद को मजबूर समझ रहे हैं। इस युद्ध में कई सैनिकों ने मौत को हस्ते-हस्ते गले लगा लिया था। लेकिन कैप्टन कालिया के साथ जो हुआ, उसे सुनकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं। पाकिस्तानी सैनिकों ने कालिया को युद्ध के दौरान गिरफ्त में लेने के बाद उनके शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया था। कैप्टन कालिया 4 जाट रेजिमेंट (इनफेंटरी) में शामिल थे।

उनके शरीर को सिगरेट से दागा गया, आंखें निकालीं गई, नाखून उखाड़े गए, दांत तोड़े गए, चेहरा बिगाड़ दिया गया इसके बाद फिर उन्हें गोली मारी गई। जब उनका शरीर 22 दिनों के बाद भारत वापस आया तो परिवार वाले उन्हें पहचान तक नहीं पा रहे थे। कैप्टन कालिया को पाकिस्तान ने 15 मई 1999 में अपनी गिरफ्त में लिया था इसके बाद भारत को 9 जून 1999 को उनका शव मिला। परिवार का कहना है कि पाकिस्तान की इस हरकत के लिए उनकी सच्चाई को दुनिया के सामने रखेंगे। इसके लिए बीते 20 साल से परिवार लगातार कोशिश कर रहा है। कैप्टन कालिया के पिता एन एक कालिया (70) ने कहा कि हम अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इन 20 सालों में 500 पत्र और कई मेल लिखने के बावजूद परिवार को इंसाफ नहीं मिला है। कैप्टन कालिया के पिता यह साबित करना चाहते हैं कि पाकिस्तान ने जेनेवा कनवेंशन का उल्लंघन किया है। हालांकि पाकिस्तान इस बात से इनकार करता आया है कि उन्होंने कैप्टन कालिया के साथ किसी भी तरह की बर्बरता को अंजाम नहीं दिया।

पिता कहते हैं ‘मैं सिर्फ मेरे बेटे के लिए नहीं बल्कि सेना की साख के लिए लड़ रहा हूं। मैं पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने रखना चाहता हूं। जिन्होंने अभी तक यह स्वीकार नहीं किया कि उन्होंने ही मेरे बेटे की हत्या की और उसके शरीर को क्षत विक्षत किया।’ बत दें कि इन 20 सालों में पिता ने भारत के राष्ट्रपति, प्राइम मिनिस्टर, मानवाधिकार संगठनों, राजदूतों, विदेश मंत्रियों और यहां तक कि पाकिस्तान के पीएम को भी पत्र लिखे। लेकिन आश्वासन को छोड़कर उन्हें अबतक कुछ भी नहीं मिला। परिवार का कहना है कि सभी मामले को “संवेदनशील या गंभीरता से” लेने में विफल रहे।’ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर में सौरभ नगर स्थित शहीद कालिया के घर पर परिवार ने एक कमरे में बेटे के नाम का संग्रहालय बनाया है। परिवार ने इसे ‘सौरभ स्मृति कक्ष’ नाम दिया है। इसमें उन्होंने कैप्टन कालिया से जुड़ी हर याद – तस्वीरों, डायरियों, किताबों, वर्दी, टोपी, पोस्टर, मिट्टी से लेकर बजरंग पोस्ट की हर उस चीज को संरक्षित करने की कोशिश की है, जो उन्हें पसंद थी।

शहीद कालिया के छोटे भाई पर्थ कालिया ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया ‘इस मुद्दे पर हमारी सरकार पाकिस्तान को घेरने में नाकाम रही। पत्र लिखने के अलावा हमारे पास और क्या विकल्प है? हाल ही में इंडियन एयर फोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन के मामले में हमारी सरकार द्वारा दिखाई गई आक्रामकता तब (1999) गायब थी। अब हमारा देश कूटनीतिक रूप से मजबूत है। अगर यह आक्रामकता तब दिखाई जाती तो उन्होंने (पाकिस्तान) सौरभ के साथ जो किया तब उनकी वैसा करने की हिम्मत नहीं होती। उन्होंने आगे कहा वर्दी में सीमा पर तैनात लोगों के भी कुछ मानवाधिकार हैं, और हम इन्हीं के लिए लड़ रहे हैं, पाकिस्तान को इन नियमों का पालन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।’

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