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Kargil Vijay Diwas 2019 Speech, Essay: विजय दिवस के भाषण के लिए ऐसे करेंगे तैयारी तो हर कोई करेगा वाह-वाह

Kargil Vijay Diwas 2019 Speech, Essay, Quotes: कारगिल युद्ध के शुरुआत में भारतीय सेना को कई सारे सरप्राइजेज मिले। ऊंचाई और बेहद की कम तापमान में लड़ने के संसाधनों की कमी थी। बावजूद इसके युद्ध के 20-25 दिन बाद से जांबाजों ने वो कर दिखाया, जिसे देख पूरी दुनिया हैरान थी।

कारगिल युद्ध के दौरान आग उगलती बोफोर्स तोपें, (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

Kargil Vijay Diwas 2019 Speech, Essay, Quotes: जुलाई, 1999 में कारगिल के युद्ध में भारतीय सेना के युद्ध कौशल और शौर्य को देखकर पूरी दुनिया आश्चर्य में थी। हिमालय की ऊंची चोटियों पर घुसपैठ करके बैठे दुश्मनों से हमारे जवान लोहा ले रहे थे। दुश्मन हमारे जवानों को आसानी से निशाना बना रहे थे। बावजूद इसके ऊंची चोटियों की खड़ी चढ़ाई को भी इंडियन आर्मी के बहादुर जवान लांघ रहे थे और पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेलने पर मजबूर कर रहे थे।

द इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक आर्टिकल में रक्षा विशेषज्ञ उदय भास्कर कहत हैं, “(भारतीय सेना को) लेकिन काफी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। लगभग 550 सैनिक शहीद हुए थे और 1,400 के करीब घायल हो गए थे। जवानों की कैजुअल्टी दर्शा रही थी कि हमारे पास उस दौरान रक्षा के सभी उचित संसाधन मौजूद नहीं थे। सैन्य उपकरणों के अभाव में भी मध्य और नीचले रैंक के जाबांजों ने गजब की नेतृत्व क्षमता दिखाई थी।”

स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए भारतीय जवानों ने ‘करो या मरो’ का सिद्धांत अपना लिया था। ताकि, पाकिस्तानी घुसपैठियों (पाकिस्तानी सेना) को अपनी सीमा से बाहर खदेड़कर वहां फिर से तिरंगा झंडा लहरा सकें। रणभूमि से “ये दिल मांगे मोर” का जिंगल जवानों की मानसिक ताकत को दर्शाता था। विक्रम बत्रा, मनोज मांडे, हनीफउद्दीन और योगेंद्र यादव की शौर्यगाधा से हर कोई परिचीत है।

Live Blog

Highlights

    06:19 (IST)26 Jul 2019
    करगिल दिवस के मौके पर इन बेहतरीन वाट्सएप, फेसबुक मैसेजेज, कोट्स और इमेजेज भेजकर दोस्तों को करें विश

    26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाया जाता है। इस दिन हमारे देश के जवानों ने पाकिस्तान से भारत को बचाने में अपने जान गवां दी थी। यही वो दिन है जब भारतीय जवानों ने कारगिल पर विजय प्राप्त की थी। भारतीय जवानों से लेकर आम इंसान तक के लिए यह दिन बेहद खास और अहम है। इसलिए इस दिन सभी उन जवानों को याद करते हैं जिन्होंने इस युद्ध में जान गवाई थी और उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ श्रद्धांजली अर्पित करते हैं। इस खास मौके पर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को फेसबुक, वाट्स के जरिए मैसेज और कोट्स भेजकर कारगिल विजय दिवस की शुभकामना दें...देखें

    05:00 (IST)26 Jul 2019
    करगिल युद्ध के दौरान नाकाम रही खुफिया तंत्र

    जब कारगिल का युद्ध चल रहा था तब तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष वेद प्रकाश मलिक ने कहा था, "हमारे पास जो कुछ भी है, हम उसी के सहारे लड़ेंगे।" उस दौरान सर्विलांस उपकरण की भी दिक्कत थी, जो आज भी संपूर्ण रूप से पूरी नहीं की जा सकी है। 'द वीक' को दिए साक्षात्कार में कारगिल ऑपरेशन के दौरान डीजी जनरल एनसी विज ने बताया, "खुफिया तंत्र बहुत बढ़िया नहीं था। उन्होंने हमें स्पष्ट सूचनाएं नहीं मुहैया कराई और जो मिलीं वह हमारे काम की नहीं थीं। खुफिया विभाग ने तो एक साल तक युद्ध नहीं हो पाने की संभावना भी जता दी थी।"

    03:56 (IST)26 Jul 2019
    8 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था यह युद्ध

    26 जुलाई को भारत ने करगिल युद्ध में जीत हासिल की थी। करगिल युद्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था। 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था यह युद्ध

    00:50 (IST)26 Jul 2019
    भारतीय सेना को करना पड़ा था मुश्किलों का सामना

    करगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना को कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाड़ियों पर थे जबकि हमारे सैनिकों को गहरी खाई में रहकर उनसे मुकाबला करना था। भारतीय जवानों को आड़ लेकर या रात में चढ़ाई कर ऊपर पहुंचना पड़ रहा था जोकि बहुत जोखिमपूर्ण था।

    23:24 (IST)25 Jul 2019
    करगिल युद्ध में भारत के 550 जवान शहीद हुए और 1400 जवान घायल हो हुए थे

    जानकारी के लिए बता दें करगिल युद्ध में भारत के 550 जवान शहीद हुए और 1400 जवान घायल हो हुए थे। बोफोर्स तोपें करगिल लड़ाई में सेना के खूब काम आई थी।

    22:59 (IST)25 Jul 2019
    इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी ने की थी करगिल युद्ध की जीत की घोषणा

    करगिल युद्ध की जीत की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी ने 14 जुलाई को की थी, लेकिन आधिकारिक तौर पर 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस की घोषणा की गई थी।

    21:59 (IST)25 Jul 2019
    क्यों मनाया जाता है विजय दिवस?

    भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच हुए कारगिर युद्ध के 20 साल पूरे हो गए हैं। दोनों देशों के बीच लड़ी गई यह लड़ाई 3 मई से 26 जुलाई 1999 तक चली थी। कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। कारगिल सेक्टर को मुक्त कराने के लिए यह नाम दिया गया था। 19...पढ़ें खबर।

    20:11 (IST)25 Jul 2019
    किसने देखे थे सबसे पहले करगिल के घुसपैठिए? जानिए

    19:05 (IST)25 Jul 2019
    जवानों के पराक्रम और बदिलान का करें जिक्रः करगिल के वीरों में कैप्टन बतरा का नाम अहम

    करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानियों को बुरी तरह खदेड़ने वाले भारत मां के 10 वीर सपूतों में कैप्टन विक्रम बतरा का नाम भी शामिल है। इन्होंने ही कारगिल के प्वॉइंट 4875 पर तिरंगा फहराते हुए 'दिल मांगे मोर' कहा था। कैप्टन उसी जगह पर वीर गति को प्राप्त हुए। वह 13वीं जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में थे।

    उन्होंने तोलोलिंग पर पाकिस्तानियों द्वारा बनाए गए बंकरों पर न केवल कब्जा किया था, बल्कि अपने सैनिकों को बचाने के लिए सात जुलाई 1999 को पाक सैनिकों से सीधे जा भिड़े थे। उन्होंने इसके बाद वहां तिरंगा फहराया था, जिसकी वजह से आज भी वह चोटी बतरा टॉप नाम से मशहूर है।

    18:05 (IST)25 Jul 2019
    निबंध और भाषण तैयार करने के दौरान काम आएंगे ये 5 टिप्स

    - करगिल विजय दिवस के लिए भाषण या निबंध तैयार करने से पहले अच्छे से इस घटनाक्रम के बारे में पढ़ें। अधिक से अधिक जानकारियां जुटाएं और कोशिश करें कि आपने जो मैटर निकाला हो, वह आधिकारिक स्रोतों के जरिए मिला हो।

    - अपने भाषण और निबंध को और प्रभावशाली बनाने के लिए वीर रस से जुड़ी कविता और शेर-शायरी उसमें शामिल करें। ये काम आप शुरुआत के साथ अंत में भी कर सकते हैं, जबकि निबंध लंबा होने पर उसके बीच में भी इनका जिक्र किया जा सकता है।

    - निबंध और भाषण में घटनाक्रम का बखान करने के दौरान वाक्य सरल, सहज और छोटे रखें, ताकि लोग पढ़ने और सुनने के दौरान ऊबे नहीं।

    - भाषण देने या फिर निबंध लिखने से पहले अच्छे से करगिल के मैटर को पढ़ लें। कोशिश करें कि पूरे भाषण और निबंध को कुछ प्वॉइंटर्स में रखें और उन्हीं के अनुसार आगे बढ़ें।

    - करगिल विजय दिवस पर जाने-माने राजनेताओं, जवानों, वरिष्ठ पत्रकारों या फिर युद्ध के दौरान शहीदों के परिजन से जुड़ा बयान और उनकी कही हुई अहम बातों को भी आप अपने भाषण या निबंध में जोड़ सकते हैं।

    17:40 (IST)25 Jul 2019
    550 जवान हुए थे शहीद, 1400 के आसपास हुए थे जख्मी

    रक्षा विशेषज्ञ उदय भास्कर कहते हैं, "(भारतीय सेना को) लेकिन काफी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। लगभग 550 सैनिक शहीद हुए थे और 1,400 के करीब घायल हो गए थे। जवानों की कैजुअल्टी दर्शा रही थी कि हमारे पास उस दौरान रक्षा के सभी उचित संसाधन मौजूद नहीं थे। सैन्य उपकरणों के अभाव में भी मध्य और नीचले रैंक के जाबांजों ने गजब की नेतृत्व क्षमता दिखाई थी।"

    16:53 (IST)25 Jul 2019
    विजय दिवस का क्या है पूरा इतिहास और किस थीम पर इस बार मनेगा ये खास दिन?

    आजादी मिलने के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी रही है। पाकिस्तान हमेशा से ही अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए भारत को उकसाता रहा है। हालांकि इसका खामियाजा पाकिस्तान को ही भुगतना पड़ा है। भारत और पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध हुए। सन 1965, 1971 और...पढ़ें पूरी खबर।

    15:26 (IST)25 Jul 2019
    हिमालय की ठंड में कम जरूरतों के साथ लड़े भारतीय सैनिक

    जनरल वेद प्रकाश मलिक ने बताया था कि कारगिल युद्ध में हमारे जवानों के पास ऊंची पहाड़ियों पर लड़ने के लिए तकनीकी रूप से बेहतर हथियार नहीं थे। इसके अलावा बेहद ऊंचाई पर लड़ रहे जवानों के सामने ठंड से बचने के लिए बेहतर कपड़े और जैकेट नहीं थे। हालांकि, उन्होंने बताया था कि 1998 के दौरान परणाणु परीक्षण के बाद भारत पर कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा दिए गए थे। जिसकी बदौलत अत्याधुनिक सैन्य साजो सामान भारत नहीं खरीद पाया था। मलिक ने तो यह भी कहा था कि भारतीय सेना के सामने राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को मानने की मजबूरी थी। लिहाजा, सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) को क्रॉस नहीं किया।

    15:24 (IST)25 Jul 2019
    खुफिया तंत्र की नाकामी सेना के लिए मुसीबत

    जब कारगिल का युद्ध चल रहा था तब तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष वेद प्रकाश मलिक ने कहा था, "हमारे पास जो कुछ भी है, हम उसी के सहारे लड़ेंगे।" उस दौरान सर्विलांस उपकरण की भी दिक्कत थी, जो आज भी संपूर्ण रूप से पूरी नहीं की जा सकी है। 'द वीक' को दिए साक्षात्कार में कारगिल ऑपरेशन के दौरान डीजी जनरल एनसी विज ने बताया, "खुफिया तंत्र बहुत बढ़िया नहीं था। उन्होंने हमें स्पष्ट सूचनाएं नहीं मुहैया कराई और जो मिलीं वह हमारे काम की नहीं थीं। खुफिया विभाग ने तो एक साल तक युद्ध नहीं हो पाने की संभावना भी जता दी थी।"

    15:20 (IST)25 Jul 2019
    20 साल बाद पूरी नहीं KRC की सिफारिशें

    KRC की रिपोर्ट में एक 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' की नियुक्ति की बात कही गई थी। इस ओहदे पर बैठा अधिकारी रक्षा मंत्रालय और सैन्य बल के बीच सामंजस्य स्थापित करने में अहम भूमिका अदा करेगा। लेकिन, यह मसला अभी तक लटका पड़ा है। इसके अलावा खुफिया तंत्र की नाकामी, सैन्य उपकरणों की कमी समेत कई संसाधनों को सेना में शामिल करने की बात थी। वह भी संपूर्ण रूप से अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

    15:15 (IST)25 Jul 2019
    'कारगिल रिव्यू कमेटी' की सिफारिशें कहां तक लागू हुईं?

    'द वीक' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जब 29 जुलाई,1999 को भारतीय सेना ने आधिकारिक रूप से कारगिल की चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को बाहर निकाल फेंकने की घोषणा की तब इसके तीन दिन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक कमेटी का गठन किया। ताकि, कारगिल युद्ध के घटनाक्रमों और भविष्य के लिए जरूरी दिशा-निर्देशों में सैन्य जरूरतों को तैयार किया जा सके। 'द कारगिल रिव्यू कमेटी' (KRC) का गठन के सुब्रमण्यम (विदेश मंत्री एस जयशंकर के पिता) के नेतृत्व में किया गया था। 15 दिसंबर, 1999 को कमेटी की रिपोर्ट पूरी हो गई और 23 फरवरी, 200 को संसद पटल पर इसे पेश किया गया। KRC की रिपोर्ट में कुछ ऐसी चीजें शामिल की गई थीं, जिन्हे आज तक गोपनीय रखा गया है। हालांकि, रिपोर्ट में अधिकांश बातों को अभी तक की सरकारों ने लागू किया है, जबकि 20 साल बीत जाने के बाद भी अभी काफी कुछ अमल में लाना बाकी है।

    15:14 (IST)25 Jul 2019
    युद्ध में 20-25 दिन बाद भारतीय सैनिकों ने जबरदस्त अटैक करना शुरू किया

    कारगिल युद्ध में 25-30 दिन बाद भारतीय सैनिकों की रणनीतियां और उनका युद्ध कौशल कारगर साबित होने लगी। मिलिट्री के इतिहास में बहादुर सैनिकों ने पूरी दुनिया में एक अलग ही मिसाल पेश की। एचएस पनाग बताते हैं कि जवानों में जीत को लेकर अपने-अपने रेजीमेंट के लिए व्यक्तिगत गौरव दिलाना भी एक अहम योगदान था। लगातार लड़ने की जिद, जान की परवाह नहीं करने और आत्म-सम्मान के संघर्ष ने दुश्मनों के हौसले तोड़ दिए।

    15:10 (IST)25 Jul 2019
    85 दिनों तक चला युद्ध, शुरुआत में भारतीय सेना को काफी नुकसान

    'द प्रिट' में लिखे एक आर्टिकल में लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग बताते हैं, "85 दिनों तक चले इस युद्ध की शुरुआत में भारतीय सेना को काफी क्षति पहुंची थी। 3 मई, 1999 को सेना को कई विषम और हैरान करने वाली परिस्थितियां पैदा हुई थीं। उस दौरान हमारे रणनीति भी कारगर नहीं थी और बिना योजना के सैनिकों ने चढ़ाई कर दी थी। जानकार बताते हैं कि जब सेना विपरीत मौसम में युद्ध के लिए पहुंची तो वह हाई-अल्टीट्यूड पर युद्ध करने के लिए पूरी तरह अभ्यस्त नहीं हो पाई थी। उस दौरान सेना के अधिकारी और जवानों के पास एड़ी टिकाकर लड़ने के और कोई चारा नहीं था। "

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    3 आजम खान को कोर्ट से तगड़ा झटका, भरने होंगे 3.27 करोड़ रुपए; कब्जा हटने तक 9.1 लाख भी चुकाने होंगे PWD को
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