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Kargil Vijay Diwas 2019 Date: कारगिल युद्ध के पूरे हुए 20 साल, जानिए क्यों मनाया जाता है विजय दिवस

Kargil Vijay Diwas 2019 Date:..1999 के बाद से से हर साल यह दिन भारत में कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है। करीब 60 दिन चली इस लड़ाई में दोनों देशों के बहुत से लोग मारे गए।

Kargil Vijay Diwas 2019: कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है।

Kargil Vijay Diwas 2019 Date: भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच हुए कारगिर युद्ध के 20 साल पूरे हो गए हैं। दोनों देशों के बीच लड़ी गई यह लड़ाई 3 मई से 26 जुलाई 1999 तक चली थी। कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। कारगिल सेक्टर को मुक्त कराने के लिए यह नाम दिया गया था। 1999 के बाद से हर साल यह दिन भारत में कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है। इस लड़ाई में दोनों देशों के सैकड़ों सैनिक मारे गए। युद्ध के मैदान पर शौर्य दिखाते हुए भारत को इसमें विजय मिली थी। भारत में 26 जुलाई को विजय दिवस के तौर पर मनाते हैं।

26 जुलाई 1999। इसी दिन भारत ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। यह दिन भारत के लिए हमेशा खास रहेगा। इसीलिए भारत में हर साल 26 जुलाई को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। पाकिस्तान के मंसूबों को भारत के वीर जवानों ने धता बता दिया था। कारगिल युद्ध में भारत के 527 वीर जवान शहीद हुए थे। इनमें से एक थे कैप्टन विक्रम बत्रा। जिनकी कारगिल में दिखाई बहादुरी अमर हो गई। इन्हीं में से हम आपके लिए कुछ और वाकये लाए हैं, जिन्हें खुद कैप्टन विक्रम बत्रा के परिवार वालों ने बताया।

विक्रम बत्रा के पिता गिरधारी लाल ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए बताया कि, विक्रम ने हमेशा अपने देश को आगे रखा। अगर वह चाहते तो 5140 की ऊंचाई पर स्थित कारगिल सेक्टर को जीतने के बाद वापस आ सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। विक्रम ने आगे लड़ने का फैसला लिया। वह देश के लिए हर सांस तक लड़ना चाहते थे। कारगिल के बाद विक्रम 4875 प्वाइंट पर कब्जा वापस पाने के लिए आगे बढ़े। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। यहीं कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गए।

उन्होंने गर्व से आगे बताया कि, विक्रम सेना में आने से पहले ही नौकरी पा गया था। वह मर्चेंट नेवी में था। लेकिन उसने देश की ही खातिर उस नौकरी को छोड़ आर्मी ज्वाइन कर ली और कारगिल युद्ध में लड़ा। यहां उन्होंने एक घायल सैनिक की जिंदगी बचाने के लिए अपना सीना आगे कर दिया और दुश्मन की गोलियां उसका सीना छलनी कर गईं। विक्रम हमेशा नौजवानों के लिए लीजेंड रहेगा।

विक्रम बत्रा का कोड वर्ड था ये दिल मांगे मोर। जिसे उन्हें 5140 प्वाइंट पर जीतने के बाद रेड़ियो पर अपने कमांडर को देना था। कैप्टन विक्रम बत्रा को 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वीरता दिखाने के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

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