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‘बीजेपी पर तोहमत लगाने वाली कांग्रेस ही नहीं कर रही संविधान का पालन’, कपिल सिब्बल का पार्टी नेताओं पर अलोकतांत्रिक होने के आरोप

कपिल सिब्बल ने कहा कि 'कांग्रेस हमेशा आरोप लगाती है कि भाजपा संविधान का पालन नहीं करती है और लोकतंत्र की नींव को तबाह कर रही है लेकिन हम क्या चाहते हैं?

Author Translated By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: August 30, 2020 10:10 AM
KAPIL SIBAL CONGRESS RAHUL GANDHIकांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल भी सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में शुमार हैं। (फाइल फोटो)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि उन्होंने जो चिंताएं उठायी थीं, कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के दौरान उनमें से एक पर भी कोई बात नहीं हुई। सिब्बल ने ये भी कहा कि जब चिट्ठी लिखने वालों पर निशाना साधा गया, तब किसी नेता ने इसमें दखल नहीं दिया। बता दें कि कपिल सिब्बल भी उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कांग्रेस में सुधार और पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग करते हुए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी।

द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘कांग्रेस को एक पूर्णकालिक और वास्तविक अध्यक्ष चाहिए और चिट्ठी में जो चिंताएं जाहिर की गई हैं, उन पर जल्द से जल्द चर्चा होनी चाहिए।’ कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘कांग्रेस हमेशा आरोप लगाती है कि भाजपा संविधान का पालन नहीं करती है और लोकतंत्र की नींव को तबाह कर रही है लेकिन हम क्या चाहते हैं? हम अपने (पार्टी) संविधान का पालन करना चाहते है और इस पर किसे आपत्ति हो सकती है।’

उन्होंने कहा कि “इस देश में राजनीति, मैं किसी विशेष पार्टी की बात नहीं करना चाहता, मुख्य तौर पर वफादारी पर आधारित है। हमें वफादारी प्लस चाहिए। यह प्लस क्या है? यह प्लस योग्यता, समावेशिता, किसी काम के लिए समर्पण और सुनने और संवाद करने में सक्षम होने के बारे में है और राजनीति यही होनी चाहिए।”

सिब्बल ने बताया कि पत्र में मांग की गई थी कि एक पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व हो, जो कि फील्ड में सक्रिय हो। इसके अलावा कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव कराए जाएं और संस्थागत नेतृत्व तंत्र स्थापित किया जाए, जिससे सामूहिक रूप से पार्टी में सुधार किए जा सके, लेकिन बैठक में इस पत्र से वफादारी की बहस शुरू हो गई। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष खुद को गांधी परिवार के प्रति निष्ठा जताने लगे और पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेता दरकिनार कर दिए गए।

सिब्बल के अनुसार, ‘कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में पत्र पर चर्चा होनी चाहिए थी। वह एक मौलिक चीज है और यह होनी चाहिए। 23 लोगों ने जो लिखा है यदि वह गलत है तो निश्चित रूप से हमसे सवाल होने चाहिए।’

वरिष्ठ नेता ने कहा कि ‘यदि आप पत्र के सार के बारे में बात नहीं करेंगे और इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाएंगे तो यह अपने आप में उदाहरण है कि आप मुद्दों से दूरी बना रहे हैं और यही हो रहा है। हमारी एक भी अपील, चिंता को, जो हमने पत्र में जाहिर की थी, उस पर बैठक में चर्चा नहीं हुई और अभी भी हमें असंतुष्ट कहा जा रहा है।’

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