UP Politics: साल 2007 से 2012… उत्तर प्रदेश की राजनीति बहुजन समाज पार्टी का स्वर्णिम दौर रहा था। उसके बाद से लगातार बीएसपी सिकुड़ती चली गई। पार्टी प्रमुख और पूर्व सीएम मायावती किसी भी सदन की सदस्य नहीं है। बीएसपी भले ही यूपी की राजनीति हाशिए पर है लेकिन बीएसपी के संस्थापक कांशीराम काफी चर्चा में हैं। रविवार 15 मार्च को उनकी जयंती है। उनकी जयंती के आस-पास के दिनों में इस बार बीएसपी के साथ ही अन्य सभी राजनीतिक दल यानी बीजेपी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तक उनकी विरासत को खुद से जोड़ने की होड़ में लगे हुए हैं।

दरअरसल, बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती पर पार्टी अध्यक्ष मायावती ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस की तरह समाजवादी पार्टी भी बहुजन समाज की हितकारी नहीं है। इन दलों से बहुजन समाज के हित व कल्याण की आशा करना रेगिस्तान में पानी तलाशने जैसा है। इन पार्टियों के छलावा व दिखावा से सावधान रहना जरूरी है।

बसपा समर्थकों से मायावती का आह्वान

बसपा सुप्रीमो ने मॉल एवेन्यू स्थित केंद्रीय कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आह्वान किया कि बहुजन समाज के लोग बसपा मूवमेंट से जुड़कर मिशनरी अंबेडकरवादी बनें। अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें। उन्होंने कहा कि बसपा ही डॉ. अंबेडकर के नक्शे-कदम पर चलने वाली ’असली पार्टी’ है।

बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि सपा व अन्य विरोधी दलों की कथनी व करनी में बड़ा अंतर है। सांसदी और विधायकी आदि का प्रलोभन देकर बहुजन समाज के वोट की शक्ति को कमजोर करने वाले इन दलों के साथ निजी लाभ व स्वार्थ के लिए पार्टी व मूवमेंट से दगा करने वालों से भी दूरी रखनी जरूरी है।

कांग्रेस कांशीराम को लेकर ज्यादा सक्रिय

खास बात यह है कि कांशीराम को लेकर कांग्रेस काफी ज्यादा आक्रामक हैं। कांग्रेस कांशी राम की विरासत का जिक्र करते हुए लगातार पिछड़े और दलित वोट बैंक विस्तार करने के लिए काम कर रही है। कांशीराम की जयंती की पूर्व संध्या पर कांग्रेस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने अपना काम ठीक से किया होता, तो कांशीराम होते ही नहीं।

कांग्रेस दलित प्रेम के चलते कांग्रेस इस बार परिवर्तन दिवस के रूप में जयंती मना रही है। 15 मार्च को दिल्ली में भी कांग्रेस के मुख्यालय में कांशीराम की जंयती पर बहुजन संवाद कार्यक्रम करने वाली है। इसमें कांशीराम के विचारों और संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प दिलाएगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ही इकलौती पार्टी है, जो कांशीराम की विचारधारा को आगे ले जा सकती है। जिलों में भी वर्कर 15 को अपने स्तर पर कांशीराम को याद करेंगे।

अखिलेश यादव भी खूब ले रहे कांशीराम का नाम

समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व सीएम अखिलेश यादव अब बसपा प्रमुख मायावती की सबसे बड़ी ताकत रहे कांशीराम में अपना सियासी भविष्य तलाश रहे हैं। अखिलेश पीडीए के नारे के साथ यादव (पिछड़े)-मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखते हुए दलित वोटों को जोड़ने पर काम कर रहे हैं। 2024 में सपा का यह दांव सफल भी रहा है। हालांकि, कांग्रेस की वजह से सपा को दलितों का वोट ज्याद मिला था।

इसीलिए 2027 में उसे और मजबूती देने के लिए सपा कांशीराम की जयंती सभी जिले में ‘बहुजन दिवस’ या पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) दिवस के रूप मनाएगी। जानकारों के मुताबिक, अखिलेश दलितों को साथ लाने के लिए अब लोहिया के साथ अंबेडकर-कांशीराम की विचारधारा को लेकर चलना चाहते हैं।

बीजेपी भी होड़ में शामिल

बता दें कि बीजेपी में कांशीराम की विरासत को अपनाने की होड़ में शामिल है। बीजेपी ने 15 दलित महापुरुषों को याद करने के लिए एक कैलेंडर तैयार किया है। इन सबकी जयंती-पुण्य तिथि के कार्यक्रमों से इस समाज के लोगों से मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया हुआ है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं।

योगी सरकार में मंत्री असीम अरुण के नेतृत्व में बीजेपी ने दलित महापुरुषों के दर्शन और योगदान पर फोकस करने का प्लान बनाया है। बीजेपी जिस तरह दलित समुदाय के बीच भावनात्मक कनेक्ट बढ़ाने की कवायद में है, उससे जाहिर है कि कांशीराम भी उनमें शामिल हैं। पार्टी उनके जरिए लगातार अपने वोट बैंक को विस्तार करने के प्रयास में हैं।

यह भी पढ़ें: ‘कांग्रेस की मानसिकता की वजह से ही बसपा बनानी पड़ी’, कांशीराम को लेकर राहुल गांधी पर भड़कीं मायावती

mayawati | congress | rahul gandhi | bsp | kanshiram
बसपा सुप्रीमो मायावती। (इमेज सोर्स- फेसबुक)

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशी राम के अनुयायियों और समर्थकों को कांग्रेस के खिलाफ सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि उनकी दलित विरोधी मानसिकता और सोच के कारण ही बसपा का गठन हुआ। मायावती ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने भी भीमराव अंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया और न ही कांशी राम के निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित किया। पढ़िए पूरी खबरें..