Rajasthan News: राजस्थान हाई कोर्ट ने शनिवार को उदयपुर के कन्हैया लाल हत्याकांड में शामिल पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने महात्मा गांधी के इन शब्दों का हवाला दिया कि “आतंकवाद और धोखेबाजी ताकतवर लोगों के नहीं, बल्कि कमजोर लोगों के हथियार हैं।”

मुख्य न्यायाधीश संजय अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की पीठ ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा, “हमें लगता है कि अपराध की गंभीरता, बड़ी आपराधिक साजिश में अपील करने वालों की खास भूमिका और आतंकवादी घटना की भयानक प्रकृति के कारण आरोपी-अपीलकर्ता जमानत का फायदा पाने के हकदार नहीं हैं।”

क्या था कन्हैया लाल हत्याकांड?

28 जून, 2022 को, मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद नामक दो लोगों ने कथित तौर पर ग्राहक बनकर उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की उनकी दुकान पर हत्या कर दी। यह हत्या कन्हैया लाल तेली की ओर से सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में साझा की गई एक पोस्ट के कारण हुई थी। नूपुर शर्मा बीजेपी की प्रवक्ता थीं, जिन्हें एक लाइव टेलीविजन बहस के दौरान पैगंबर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए निलंबित कर दिया गया था।

पीठ ने सहिष्णुता पर रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता का भी उद्धरण दिया और प्रारंभिक टिप्पणी में कहा, “एक न्यायाधीश का आसन एक अदृश्य, फिर भी भारी भार से घिरा होता है, यह भार इस देश के नागरिकों और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का है जो भारत के संविधान के तहत निहित हैं।”

पीठ ने कहा, “जब अपराध किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को ही निशाना बनाता है, तो जमानत का पूरा स्वरूप ही बदल जाता है।” पीठ ने कहा आगे जोड़ा, “आतंकवाद केवल शारीरिक हमले नहीं है, यह देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर एक सोची-समझी, नाटकीय हमला है। इसका अंतिम उद्देश्य केवल अपराध करना नहीं, बल्कि शांति भंग करना है। इसका लक्ष्य ‘कानून के शासन’ को ‘भय के शासन’ से बदलना है।”

एनआईए ने चार्जशीट को दाखिल किया था

एनआईए ने आरोप पत्र दाखिल किया था और ट्रायल कोर्ट ने 2024 में पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। हत्या के बाद के दिनों और हफ्तों में उनकी गिरफ्तारी के बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने एक स्पेशल कोर्ट में जमानत याचिकाएं दायर की थीं, जिसे अक्टूबर और नवंबर 2024 में खारिज कर दिया गया था।

आरोपियों की ओर से पेश होते हुए सैयद सादात अली और अन्य ने मुख्य रूप से यह तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि घटना से पहले की अवधि खास तौर पर 10 जून से 28 जून 2022 के बीच आरोपी मृतक की दुकान पर या उसके आस-पास मौजूद थे।”

इसके बाद उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि आरोपी ने किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई मैसेज, वॉयस नोट या टेक्स्ट भेजा हो जिसे किसी भी समुदाय की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने या दुश्मनी को बढ़ावा देने के रूप में समझा जा सके।

उन्होंने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट की ओर से दो अन्य आरोपियों, फरहाद मोहम्मद और मोहम्मद जावेद को दी गई जमानत पर भी भरोसा जताया, “ठीक उसी तरह के आरोपों पर जो वर्तमान आरोपी-अपीलकर्ताओं के खिलाफ तय किए गए थे।”

उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी साढ़े चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे में काफी समय लगेगा। हालांकि आरोप पत्र 22.08.2022 को दायर किया गया था और 2024 की शुरुआत में आरोप तय किए गए थे, लेकिन मुकदमा अभी निष्कर्ष से बहुत दूर है।

एजेंसी के वकील ने क्या कहा?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजा ठाकरे ने कहा कि पांचों आरोपियों ने कथित अपराध को अंजाम देने में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका निभाई।

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए ठाकरे और अन्य ने कहा कि अदालत को जमानत के चरण में कोई छोटा-मोटा ट्रायल करने या सबूतों को बहुत बारीकी से तौलने की जरूरत नहीं है। अदालत को जांच एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री को उसके मूल रूप में देखना चाहिए और यदि इससे आरोप को प्रथम दृष्टया सत्य मानने के लिए उचित आधार प्रकट होते हैं, तो जमानत खारिज कर दी जानी चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा, ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत जमानत देने पर कानूनी रोक है, अगर चार्ज-शीट देखने के बाद कोर्ट इस राय पर पहुंचता है कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ आरोप के पहली नजर में सच होने का उचित आधार है।

इसमें कहा गया है कि एनआईए ने विस्तृत और व्यापक जांच पूरी कर ली है, आरोपपत्र दाखिल कर दिया है और निचली अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं, “इससे यह साबित होता है कि प्रथम दृष्टया मूल्यांकन के आधार पर, अपीलकर्ताओं के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और इसलिए, माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मूलभूत कसौटी इस स्तर पर पूरी तरह से खरी उतरती है।”

हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल वर्तमान जमानत पर फैसला लेने के उद्देश्य से हैं और निचली अदालत उपरोक्त टिप्पणियों से अप्रभावित होकर मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाएगी।

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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को कन्हैया लाल मर्डर केस मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के चार साल बाद भी न्याय नहीं मिला है। उन्होंने बीजेपी पर चुनावी फायदे के लिए केस का इस्तेमाल करने और जल्दी ट्रायल पक्का करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। अशोक गहलोत ने कहा कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के मामले की जांच करने और स्पेशल NIA कोर्ट में सुनवाई के बावजूद, केंद्र और राजस्थान दोनों जगह बीजेपी सरकारों के तहत बहुत कम प्रोग्रेस हुई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…