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राजद की नजर में तेजस्वी के लिए चुनौती नहीं है कन्हैया

कन्हैया की यात्रा को लेकर पूछने पर राजद सांसद मनोज झा ने कहा, मुद्दा है संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) का विरोध। इन दोनों मुद्दों पर संसद से लेकर सड़क तक बिहार का कौन सा दल सबसे ज्यादा मुखर होकर विरोध कर रहा है, यह बिहार की जनता देख रही है।

Author नई दिल्ली | Updated: February 20, 2020 1:27 AM
कन्हैया कुमार की सभाओं में बढ़ती भीड़ से विपक्षी दलों में उमड़ने लगी चिंता की लकीरें (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

अजय पांडेय
जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार की बिहार में पिछले 20-22 दिनों से जारी जन गण मन यात्रा में उमड़ रही भीड़ को भले ही सूबे के मुख्य विपक्षी दल राजद और इसके नेता तेजस्वी यादव के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा हो लेकिन खुद राजद नेता ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि चुनाव नजदीक आते आते राजद की ताकत का अंदाजा सबको हो जाएगा। हालांकि कांग्रेस का मानना है कि कन्हैया की यात्रा विपक्ष के लिए मददगार साबित होगी।

कन्हैया की यात्रा को लेकर पूछने पर राजद सांसद मनोज झा ने कहा, मुद्दा है संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) का विरोध। इन दोनों मुद्दों पर संसद से लेकर सड़क तक बिहार का कौन सा दल सबसे ज्यादा मुखर होकर विरोध कर रहा है, यह बिहार की जनता देख रही है।

उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हम इस मुद्दे पर किसी की रैली को चुनौती नहीं मानते, बल्कि यह अच्छी बात है कि इन जनविरोधी फैसलों का विरोध चौतरफा हो रहा है। दूसरी ओर कन्हैया की यात्रा को राजद व तेजस्वी के लिए चुनौती करार दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, चुनाव आने दीजिए आपको सबकुछ पता लग जाएगा।

उधर, कांग्रेस का कहना है कि कन्हैया यदि सीएए और एनआरसी के खिलाफ रैली कर रहे हैं तो यह अच्छी बात है क्योंकि यह संपूर्ण विपक्ष के लिए अच्छी बात है। पार्टी के बिहार मामलों के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि जहां-जहां जरूरत हुई है, कांग्रेस के लोगों ने भी कन्हैया की रैली के आयोजन में सहयोग किया है। बिहार विधानसभा के आगामी चुनाव में भाकपा व अन्य वामपंथी दलों को चुनावी गठबंधन में शामिल करने के मुद्दे पर गोहिल ने कहा कि निश्चित रूप से सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की जाएगी।

सियासी जानकारों का कहना है कि कन्हैया कुमार की रैलियां बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए को इसलिए रास आ रही हैं क्योंकि एनडीए नेताओं को यह लगता है कि कन्हैया की रैलियों में उमड़ रही अल्पसंख्यकों की भीड़ राजद के लिए खतरा साबित हो सकती है क्योंकि लालू यादव की यह पार्टी मुसलिम-यादव (एमवाई) समीकरण पर ही टिकी है।

कहा जा रहा है कि कन्हैया की काट के लिए ही राजद नेता तेजस्वी यादव आगामी 23 फरवरी से समूचे बिहार में बेरोजगारी के खिलाफ यात्रा निकाल रहे हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के मुद्दे में सीएए और एनआरसी के विरोध के अलावा बेरोजगारी को भी शामिल किया है।

बहरहाल, सूत्रों का कहना है कि राजद व अन्य दलों ने लोकसभा के चुनाव में विपक्षी गठबंधन में भाकपा को भले शामिल नहीं किया हो लेकिन विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन उसके बगैर पूरा नहीं हो पाएगा और संभव है कि कन्हैया की रैलियां उसके लिए लिए विपक्षी मोर्चे में ज्यादा सीटें भी सुनिश्चित करने वाली साबित हो सकती हैं।

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