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परीक्षाओं के साथ आंदोलन पर डटे JNU छात्रों के दो गुटों की बेमियादी भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर में नौ फरवरी को हुए आयोजन पर छात्रों के खिलाफ हुई दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में जेएनयू परिसर फिर उबल पड़ा है।

Author नई दिल्ली | April 29, 2016 12:31 AM
कैंपस में भूख हड़ताल करते जेएनयू छात्र

अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर में नौ फरवरी को हुए आयोजन पर छात्रों के खिलाफ हुई दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में जेएनयू परिसर फिर उबल पड़ा है। आंदोलनकारी छात्रों की बुधवार देर रात शुरू हुई भूख हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। छात्रों को मलाल है कि जेएनयू प्रशासन ने अब तक कोई सुध नहीं ली। इस बाबत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वाम खेमा दोनों विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

पांच आंदोलनरत विद्यार्थी जहां एबीवीपी से हैं, वहीं जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 20 अन्य विद्यार्थी विभिन्न वाम समूहों से हैं। छात्रों की ओर से गंगा ढाबा से प्रशासनिक प्रखंड तक मशाल जुलूस निकालने के बाद मध्यरात्रि से यह भूख हड़ताल शुरू की गई। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर लटकाए जाने के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारे लगाए जाने को लेकर राष्ट्रदोह के एक मामले में कन्हैया को गिरफ्तार किए जाने के बाद से ही प्रशासनिक ब्लाक विरोध प्रदर्शन का स्थल रहा है। इस मामले में गिरफ्तार कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य अब जमानत पर रिहा हैं। विश्वविद्यालय ने पांच सदस्यीय जांच समिति की सिफारिश पर इस हफ्ते की शुरुआत में विभिन्न छात्रों को दंडित करने की घोषणा की थी।

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कन्हैया पर जहां ‘अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार’ के आधार पर 10,000 रुपए जुर्माना लगाया गया है, वहीं उमर, अनिर्बान और कश्मीरी विद्यार्थी मुजीब गट्टू को विभिन्न अवधियों के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित किया गया है। चौदह छात्रों पर अर्थदंड लगाया गया है, दो छात्रों से छात्रावास की सुविधा वापस ले ली गई, जबकि दो पूर्व छात्रों के लिए विश्वविद्यालय ने प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। कन्हैया ने कहा, ‘प्रशासन ने सोचा कि यदि परीक्षाओं के दौरान यह कार्रवाई की जाती है तो छात्रों की ओर से कोई विरोध नहीं होगा। कृपया हमारे विवेक पर सवाल खड़ा न करें, हम विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी थीसिस लिख सकते हैं और परीक्षाएं दे सकते हैं’।

उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय समिति के इस उच्च स्तरीय नाटक का कारण रोहित वेमुला की खुदकुशी है। हम अपनी जान गंवाकर चीजें सीखना नहीं चाहते, बल्कि इन एजंडों से लड़कर चीजें सीखना चाहते हैं। जेएनयूएसयू की उपाध्यक्ष शेहला राशिद शोरा ने कहा कि जेएनयू का प्रशासन किस तरह के विद्यार्थी चाहता है? चापलूस, अवसरवादी, या प्रशासन का पक्ष लेने वाला! कम से कम जेएनयू में यह संस्कृति नहीं रही है। यहां के छात्र बागी हैं और आजादी -मानव अधिकार के लिए लड़ते रहेंगे। उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासन का फैसला अस्वीकार्य है और उच्चस्तरीय जांच समिति की जांच बस हास्यास्पद है। उन्होंने दंड दिए जाने को सिरे से खारिज किया।

एक अलग हड़ताल पर बैठे एबीवीपी के सदस्य सौरभ कुमार शर्मा पर लगाए गए जुर्माने को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। शर्मा ने ही इस विवादास्पद घटना की शिकायत की थी। जेएनयू छात्रसंघ में एबीवीपी की ओर से एकमात्र सदस्य पर यातायात बाधित करने के लिए 10,000 रुपए जुर्माना लगाया गया है। एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने जुर्माने पर फैसला करते समय राष्ट्रवादियों और राष्ट्रविरोधियों को एक ही डंडे से हांका है और देशभक्ति का अपराधीकरण कर एक गलत नजीर पेश की है। वे हतप्रभ हैं कि दोनों पक्षों को सजा क्यों?

एनयूएसयू के सचिव सौरभ शर्मा ने कहा कि अब देश का नौजवान फैसला करेगा कि क्या उचित है। विश्वविद्यालय के अधिकारी अपने इस रुख पर कायम हैं कि जांच समिति की ओर से गहन जांच के बाद यह निर्णय किया गया और ये विश्वविद्यालय के नियमों के तहत हैं। बावजूद इसके इस कार्रवाई ने कैंपस में आंदोलन का नया खाका खींच दिया है। छात्र संघ और वामपंथी आंदोलनकारियों की भी परीक्षा है। छात्र संघ ने इस मामले पर देशव्यापी अभियान की धमकी दी है।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा कि कार्रवाई पर फैसला विद्वत परिषद में हुआ है जबकि इसे कार्यकारी परिषद में आना चाहिए था। यह एकतरफा और गलत समय पर लिया गया फैसला है। जेएनयू परिसर एक बार फिर उबल पड़ा है। इससे पहले संघ अध्यक्ष कन्हैया, उमर और अनिर्बान को विवादित कार्यक्रम के मामले में देशद्रोह के आरोप में फरवरी में गिरफ्तार किया गया और अभी वे सभी जमानत पर हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर व्यापक विरोध हुआ था।

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