कान्हा टाइगर रिजर्व में 9 दिनों के भीतर एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई। वन्यजीव अधिकारियों ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि सभी बड़ी बिल्लियां श्वसन संक्रमण से पीड़ित थे। इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार हुई। अधिकारियों के अनुसार मौत का सिलसिला 21 अप्रैल से शुरू हुआ, जब रिजर्व के सारही क्षेत्र में एक शावक को मृत पाया गया।

दूसरे शावक का सड़ा गला शव 24 अप्रैल को बरामद किया गया। जबकि 25 अप्रैल को तीसरा शव बरामद किया गया। तीनों शावक की आयु एक साल थी। शुरुआत में अधिकारियों ने अंदेशा जताया कि शावकों की मौत भूख के कारण हुई है। हालांकि, तीसरे शावक की मौत के बाद अधिकारियों ने कहा कि मौत का कारण संभवतः फेफड़ों का संक्रमण हो सकता है।

तीन शावकों की मौत के बाद बाघिन टी-141 और उसके आखिरी जिंदा बचे शावक को गंभीर स्थिति में पाया गया। ऐसे में दोनों को बेहोश कर मुक्की रेंज के क्वारंटीन केंद्र में इलाज के लिए स्थानांतरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि बाघिन जो करीब 10-11 साल की थी, वह सांसों से जुड़ी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। उसे सांस लेने और खाने में परेशानी हो रही थी। बुधवार को उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। जबकि उसी की तरह लक्षण दिखा रहे शावक की भी उसी शाम मौत हो गई।

फेफड़े में संक्रमण की वजह से मौतें

कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार ने कहा कि फेफड़े में संक्रमण की वजह से मौतें हुई हैं। हम अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे है कि आखिर ऐसा किन परिस्थितियों में हुआ। शावक संभवतः संक्रमण की वजह से कमजोर हो गए होंगे।

वन अधिकारियों ने कहा कि बाघिन के नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। ताकि जांच कर यह पता लगाया जा सके कि इंफेक्शन किस तरह का था। उन क्षेत्रों को परिस्कृत किया जा रहा है, जहां से शवों को बरामद किया गया था। सुरक्षात्मक तौर पर आसपास के इलाके से पानी के नमूने भी इकट्ठा किए गए हैं।

बाघिन मौत से पहले सरही क्षेत्र में अपने चार शावकों के साथ घूम रही थी। अधिकारियों ने बताया कि बाघिन और उसके चारों शावकों की मौत के साथ ही अप्रैल में कान्हा में बाघों की मौत का आंकड़ा पांच हो गया है।