Manipur News: मणिपुर के कुछ हिस्सों में एक महीने से ज्यादा समय से राशन और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई में कठिनाई आ रही है। राज्य में अशांति अब तीन-तरफा संघर्ष में बदल गई है और कई तरफ से नाकेबंदी के कारण सप्लाई रुक गई है। इसका सबसे साफ उदाहरण कुकी-जो बहुल कांगपोकपी जिला है। जिले में सामान लाने का मुख्य रास्ता नागालैंड के दीमापुर से शुरू होता है और मणिपुर के नागा बहुल सेनापति जिले या मैतेई बहुल इंफाल से होकर गुजरता है।
मणिपुर में 2023 में कुकी-जो और मेइतेई समुदायों के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच तनाव बढ़ने से कांगपोकपी जाने वाले रास्ते पर कई तरह की समस्याएं पैदा हो गई हैं। सेनापति और राज्य की राजधानी दोनों जगहों पर नागा समूहों ने कांगपोकपी की ओर जाने वाले मालवाहक वाहनों का आवागमन रोक दिया है।
मौजूदा नाकाबंदी 13 मई को तनाव बढ़ने के बाद शुरू हुई, जब कांगपोकपी में तीन कुकी-जो नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद दोनों तरफ से बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बनाया गया। इस घटनाक्रम का नतीजा यह हुआ कि इस महीने की शुरुआत में छह नागा बंधक मृत पाए गए।
इस दौरान दोनों पक्षों द्वारा नाकाबंदी और कामकाज बंद करने की घोषणा की गई, लेकिन कांगपोकपी में कुकी-जो समूह इस नाकाबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बाद में पूर्ण नाकाबंदी हटा ली गई, लेकिन यूनाइटेड नागा काउंसिल के एक नेता ने कहा कि कुकी-जो समुदाय के खिलाफ उनकी आर्थिक नाकाबंदी अभी भी जारी है।
सामान का कोई भंडार नहीं
कांगपोकपी में एक थोक वितरक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “सामान का कोई भंडार नहीं है न चीनी, न नमक, न आलू, न प्याज। हमारे पास कुछ स्टॉक था, जिसे दुकानों ने लगभग एक महीने तक चलाया। हमने लोगों को घबराकर खरीदारी करने से रोका और उनकी जरूरतों के हिसाब से सामान वितरित और बेचा। लेकिन वह स्टॉक भी खत्म हो गया है, सिवाय उन चीजों के जिनकी बिक्री कम होती है, जैसे कि मिठाई। करीब 20 दिन हो गए हैं, 13 मई से हमारी आपूर्ति नहीं आई है।”
उन्होंने बताया कि कस्बे में बोतलों में पेट्रोल 300 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है और एलपीजी सिलेंडर 3500 रुपये से 4000 रुपये के बीच बिक रहे हैं। थोक व्यापारी ने बताया कि आखिरी बार उनके पास बेचने के लिए स्टॉक कुछ दिन पहले था, जब जिले के विधायक और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने 50 किलो के 640 बोरे चावल की डिलीवरी की व्यवस्था की थी।
विधायक और सुरक्षा बलों की मदद से चावल मिले
डिस्ट्रीब्यूटर ने कहा, “आम तौर पर इस तरह के बोरे लगभग 1800 रुपये में बिकते हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट और दूसरी लागतों की वजह से इन्हें 2000 रुपये में बेचा गया।” जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन विधायक की मदद से चावल की एक खेप मिली थी। इसमें से 40-50 क्विंटल चावल शुक्रवार को हर सब-डिविजनल ऑफिसर को दिया गया, ताकि इसे डिस्ट्रीब्यूटर के जरिये बेचा जा सके। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को राशन कार्ड धारकों के लिए एलपीजी सिलेंडर से भरा एक ट्रक भी आया था।
उन्होंने कहा, “हमें विधायक की मदद से और सुरक्षा बलों के जरिये चावल मिला है, लेकिन मैं यह नहीं कह सकता कि यह खाने-पीने का काफी सामान है।” आवाजाही में आ रही दिक्कतों का असर हेल्थकेयर सुविधाओं तक पहुंचने पर भी पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सीमित सुविधाएं होने के कारण, जिन मरीजों को आगे इलाज की जरूरत होती थी, वे पहले इंफाल जाते थे। बाद में, मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद, वे सड़क मार्ग से कोहिमा जाने लगे।
स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच प्रभावित हुई
अधिकारी ने बताया, “अब अगर कोई गंभीर मरीज होता है, तो वे उस इलाके के एसडीओ से संपर्क करते हैं ताकि उन्हें आर्मी के काफिले के साथ इंफाल ले जाया जा सके। ऐसा हर दो-तीन दिन में किया जा रहा है।” जिले के कुछ इलाके तो और भी ज्यादा कटे हुए हैं। उदाहरण के लिए, जिले के लीमाखोंग इलाके से जिला मुख्यालय तक पहुंचना मुश्किल है क्योंकि इसके लिए नागा बस्तियों से होकर गुजरना पड़ता है।
इलाके के एक गैर-मणिपुरी दुकानदार ने कहा कि चूंकि वे लोग इस संघर्ष में शामिल नहीं हैं, इसलिए उनके जैसे अन्य दुकानदारों को अपने परिवारों के लिए कुछ सामान खरीदने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन उन्हें अपनी दुकानों में बेचने की अनुमति नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमारी छोटी दुकानें हैं, इसलिए हम अपनी दुकानों के लिए सामान लाने के लिए हर रोज इंफाल जाते थे, मुर्गी और मछली से लेकर दवाइयों तक सब कुछ। अब हमें सिर्फ 5-10 किलो सामान लाने की इजाजत है, जो हमारे परिवारों के लिए काफी है। मई के मध्य से हमारी दुकानों में सामान नहीं आ रहा है और बेचने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।”
उखरुल पर असर
इस नाकाबंदी का असर नागा-बहुल उखरुल पर भी पड़ा, जहां इंफाल से माल ढुलाई का रास्ता कुकी-जो बस्तियों के दो हिस्सों से होकर गुजरता है। दरअसल, कुकी-जो समूहों द्वारा इस मार्ग पर नाकाबंदी को लेकर तनाव के बीच 29 मई को उखरुल जिला मुख्यालय की ओर सुरक्षा घेरे में जा रहे मालवाहक ट्रकों के काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें एक ट्रक चालक की मौत हो गई थी। उखरुल के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “फिलहाल इस सड़क पर कोई नाकाबंदी नहीं है और सुरक्षाकर्मियों के साथ माल की आवाजाही हो रही है।”
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और मणिपुर पुलिस ने राज्य में हिंसा से जुड़े छह मामलों में 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है। नवंबर 2024 में जिरीबाम में एक हमार महिला की हत्या और उसे जलाने की घटन सामने आई थी। इसके बाद जून 2024 में इंफाल से जिरीबाम जाते समय पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के काफ़िले पर हमला और नवंबर 2023 में उखरुल में बैंक डकैती हुई थी। इन सभी मामलों में ये गिरफ्तारी की गई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
